Sunday, October 30, 2016

माइग्रेन का इलाज सिर्फ एक मिनट में सेंधा नमक के प्रयोग से; Migraine treatment, using rock salt in just one minute



आज हम आपके लिए माइग्रेन का एक रामबाण नुस्खा लेकर आये है जो माइग्रेन की एक मिनट में ही कर देगा छुट्टी और आप पायेंगे चेन की साँस |माइग्रेन से यह नुस्खा जितना सरल आपको देखने में लग रहा है इसका रिजल्ट उतना ही असरदार है और आपको शीघ्र ही मिल जाता है आइये जानते है इस साधारण से दिखने वाले नुस्खे को तेयार करने की विधि 
इस रामबाण नुस्खे के लिए जरूरी सामग्री :-
# सेंधा नमक
# उबाल कर ठंडा किया हुआ पानी 5 मि.ली.
इस ओषधि को तेयार करने की विधि :-
सबसे पहले आप सेंधा नमक को पानी में घोल लीजिये अभी आप सीधा लेट जाइए और अब किसी ड्रापर या रुई की सहायता से सिर में जिस साइड में दर्द हो रहा हो उसके उलटी दिशा के नथुने में यह घोल 1 से 2 मि.ली. डाल लीजिये इस प्रयोग को करते ही आपको कुछ ही समय में आराम मिल जायेगा अगर आपको फिर भी आराम न मिले तो आप कुछ देर के बाद दोबारा इसे आजमा सकते है या प्रयोग कर सकते हैI
सावधानी :-
आपको यह प्रयोग एक या दो बार ही करना है अगर आप अधिक बार इस प्रयोग को करेंगे तो आपके गले में कांटे चुबने जेसी चुबन हो सकती है अगर आपको इस प्रकार की समस्या आये तो आप थोडा सा देशी घी लेकर उसको गुनगुना करके उसको ऊँगली की सहायता से गले में लगा दीजिये जहा पर आपको चुभन महसूस हो रही है तो आपको आराम मिल जायेगा
कई बार हमारे सिर के अाधे हिस्से में अचानक से दर्द होने लगता है और यह दर्द कई बार उठता है। इस दर्द से बचने के लिए हम कई तरह के उपाय करते है लेकिन इसका कोई असर नहीं होता है। इसे अर्धकपारी दर्द या अर्ध मस्तिष्क दर्द, जिसे माइग्रेन भी कहते है। यह बार-बार उठने वाला दर्द है, जो कभी-कभी कम अौर कई बार असहनीय हो जाता है। इसके साथ दूसरें लक्षण जैसे सुनने, बोलने या महसूस करने की शक्ति पर असर होना अाम बात है।
माइग्रेन के दर्द से पीड़ित लोग संसार के सभी भागों में पाए जाते है। इंगलैंड में किए गए एक सर्वेक्षण में वहां के 10 प्रतिशत से 12 प्रतिशत लोगों को इस बीमारी से पीड़ित बताया गया है। महिलाअों में यह बीमारी पुरूषों की अपेक्षा ज्यादा पाई जाती है। महिला और पुरूषों में यह अनुपात 2:1 है। हालांकि एक अप्रचलित माइग्रेनियस न्युरेलजीया, सिर्फ पुरूषों तक सीमित है।
माइग्रेन के प्रकार :-



माइग्रेन चार प्रकार का हो सकता है।
1. क्लासिकल माइग्रेन
इस माइग्रेन में दर्द शुरू होने के लक्षण महसूस होने लगते है। अगले दिन रोगी को दर्द का अहसास होने लगता है, इसमें देखने की क्षमता पर असर पड़ता है और धुंधला नजर अाने लगता है। कई बार तो अांखों के सामने अधेरा छा जाता है। यह लक्षण 15 से 30 मिनट में अपने अधिकतम रूप पर पहुंच जाता है। कभी-कभी तो व्यक्ति को पूरा दिन इस समस्या से गुजरना पड़ता है। इसका एक लक्षण और है जी मचलाना और बैचेनी या चक्कर अाना। ऐसा होने के बाद तुरंत बाद सिरदर्द होने लगता है। यह दर्द एक आंख के ऊपर से सिर के पिछले हिस्से तक फैल जाता है। क्लासिकल माइग्रेन की तीव्रता जैसे टीस उठना, सिर पर लगातार मार लगने का अहसास या असहनीय और पीड़ादायक है।

2. साधारण या अाम माइग्रेन
इस तरह का माइग्रेन अाम देखने को मिलता है। एक अनुमान के अनुसार, 10 प्रतिशत से 18 प्रतिशत लोग साधारण माइग्रेन से पीड़ित होते है। यह क्लासिकल माइग्रेन की तरह खतरनाक नहीं होता। इसके लक्षण अधिकतर माइग्रेन की तरह ही होते है लेकिन दर्द की तीव्रता 30 से 60 मिनट तक हो सकती है। इस तरह के माइग्रेन में कुछ देर तक अाराम या ऐसा कोई काम, जिससे सिर से जाने वाले खून की मात्रा बढ़ सकती है जैसे- व्यायाम, झुकना, सीढ़ी चढ़ना, खांसना, उल्टी होना अादि से रोगी बेहतर महसूस कर सकता है।

3. माइग्रेनियम न्यूरेलजिया


यह अधिकतर सिर्फ पुरुषों में विशेषकर 20 से 40 वर्ष के पुरुषों में और विशेषकर सर्दियों और बसंत ऋतु में होता है। इसमें दर्द एक आंख में होता है और आंखें लाल हो जाती हैं और पानी निकलने लगता है और उसी आंख की तरफ नाक भी बहने लगती है। यह दर्द 24 घंटों में एक या दो बार हो सकता है। यह 15 से 45 मिनट तक रहता है। पर आश्चर्यजनक रूप से इस प्रकार के माइग्रेन में उल्टियां नहीं होतीं, जो दूसरे हर प्रकार के माइग्रेन में आम लक्षण है।
4. बच्चों का माइग्रेन
बच्चों को माइग्रेन अधिकतर यात्रा करने पर ही होता है। यह आगे चलकर वयस्क होने पर माइग्रेन का दूसरा रुप धारण कर सकता है। बच्चों को उल्टी होना, चक्कर आना और चिड़चिड़ाहट इसके आम लक्षण हैं। इस माइग्रेन में सिरदर्द की तीव्रता कम होती है।
इसमें अधिकतर बच्चे पेट दर्द की शिकायत करते हैं। बच्चों में इसका प्रतिशत चार है अर्थात माइग्रेन पीड़ितों में से करीब 40 प्रतिशत बच्चे इस रोग से वयस्क होने पर मुक्ति पा जाते हैं।

माइग्रेन होने के कारण:-
1. पैतृक
2. दबाव,शारीरिक, मानसिक
3. व्यक्तित्व
4. असंतुलित भोजन
5. वातारण
6. बहुत अधिक यात्रा करना
7. सिर व गर्दन की चोट
8. ब्लड प्रेशर
9. हारमोंस का प्रभाव
10. दूसरी दवाइयों का असर

उपचार :-

माइग्रेन का इलाज शुरूअाती लक्षणों के साथ ही शुरू कर देना चाहिए। इलाज जैसे एस्प्रिन या पेरासिटामॉल के साथ हो सकता है। अगर माइग्रेन साधारण ना होकर क्लासिक हो तो मेरोक्लोप्रेमिड और इसके अाधे घंटे बाद एस्प्रिन या पेरासिटामॉल लेना काफी असरदायक होता है।
माइग्रिल और इफेरगोट, जिसमें इरगोटेमिन की मात्रा दो मिलीग्राम है, को लेने पर उल्टी बंद हो जाती है और साथ ही दर्द का प्रभाव कम हो जाता है। इसके अलावा बाजार में केफेगोट और फेमिरगिन भी मिलती है। इरगोरिमिन युक्त दवाई की पहली खुराक दो मिलीग्राम की होनी चाहिए। अगर 45 से 60 मिनट बाद भी दर्द कम ना हो तो अादी लेबलेट और लेनी चाहिए। ध्यान रहे इसका इस्तेमाल प्रैग्नेंसी में बिल्कुल ना करें।




जिन लोगों ने लंबे समय की बीमारी के बावजूद भी इसका इलाज नहीं किया है तो उनको तुरंत डॉक्टरी सहायता लेनी चाहिए। माइग्रेनियम न्यूरेलजिया का माइग्रेन होने पर तुरंत ली गई दवाई से काफी फायदा होता है। इस तरह के दर्द में भी इरगोटिमिन युक्त दवाई लेनी चाहिए। ऐसे में क्लोनिडिन या पिझोटिफेन दिन में तीन बार लेना फायदेमंद हो सकता है।

बच्चों के माइग्रेन में एस्प्रिन का प्रयोग काफी है या उल्टी रोकने की दवा दी जा सकती है। कुल मिलाकर माइग्रेन ऐसी बीमारी है, जिसका इलाज अावश्यक है। हालांकि इसका कोई जानलेवा प्रभाव नहीं होता, लेकिन यह काफी कषंटदायक होता है। इसलिए उचित दवाइयों के अलावा मानसिक तनाव, जिनसे अपचन होने की संभावना हो ऐसी खाने की चीजें, तेज रोशनी और ज्यादा ध्वनि से बचना और संतुलित खाना नियमपूर्वक खाना, 7-8 घंटे की नींद लेना, खुश रहना इस बीमारी का सबसे अच्छा इलाज है।




Friday, October 28, 2016

लाल प्याज से Thyroid का चमत्कारिक उपचार.: Thyroid treatment with wondrous red onion.



Thyroid का सरल उपचार
सेंट पीटर्सबर्ग, रूस से एक प्रसिद्ध चिकित्सक ने थायराइड ग्रंथि के विकारों का इलाज खोजने का दावा किया है इस अविश्वसनीय उपाए में सिर्फ एक घरेलु औषधि का उपयोग होता है
और वो है लाल प्याज |


प्याज के गुणों के बारे में हम सब जानते हैं इसमें बहुत सारे anti-bacterial, anti-fungal, anti-inflammatory, and cancer fighting गुण होते हैं इस में विटामिन और मिनरल्स भी भरपूर मात्रा में होते हैं जो हमारे शारीर को पोषण देते हैं और बिमारियों से बचाते हैं |
प्याज से Thyroid का इलाज (Thyroid Gland Remedy)
ये उपचार रात को सोने से पहले करना है एक प्याज लेकर उसको दो हिस्सों में काट लें और गर्दन पर Thyroid Gland के आस पास गोल गोल मसाज करे |
मसाज करने के बाद गर्दन को धोएं नहीं रात भर ऐसे ही छोड़ दें और प्याज का रस अपना काम करता रहेगा |
ये उपचार बहुत ही आसान है और आप इसे एक बार जरुर आजमा कर देखें आप को अच्छे नतीजे प्राप्त होंगे |



Saturday, October 22, 2016

किडनी की सफाई करें सिर्फ 5 रुपये मे: Clean your kidney: in just Rs. 5/-




हमारी किडनी एक बेहतरीन फ़िल्टर हैं जो सालो से
हमारे खून की गंदगी को साफ़ करने का काम करती हैं
मगर हर फ़िल्टर की तरह इसको भी साफ़ करने की ज़रुरत हैं
ताकि ये और भी अच्छा काम करे।
आज हम आपको बता रहे हैं इसकी सफाई के बारे में और
वह भी सिर्फ 5 रुपैये में।

*एक मुट्ठी भर धनिया लीजिये इसको छोटे छोटे टुकड़ो
में काट ले और अच्छी तरह धुलाई कर ले। फिर एक बर्तन
में १ लीटर पानी डाल कर इन टुकड़ो को डाल दे, 10 मिनट
तक धीमी आंच पर पकने दे, बस अब इसको छान ले और ठंडा
होने दो अब इस ड्रिंक को हर रोज़ एक गिलास खाली पेट
पिए। आप देखेंगे के आपके पेशाब के ज़रिये सारी
गंदगी बाहर आ रही हैं।
* इसके साथ थोड़ी से अजवायन डाल ले तो सोने
पे सुहागा ।
अब समझ आया के हमारी माँ अक्सर धनिये की चटनी
क्यों बनती थी और हम आज उनको old fashion कहते हैं।
विशिष्ट परामर्श-
किडनी अकर्मण्यता याने किडनी फेल होने की स्थिति से निपटने में वैध्य राज श्री दामोदर 98267-95656 द्वारा दुर्लभ जडी बूटियों से निर्मित हर्बल औषधि जीवन रक्षक सिद्ध होती है | बढे हए क्रिएटनीन लेविल को नीचे लाने में सहायक होती है| ड़ायलिसिस की कम जरूरत पड़ती है|








बार बार पेशाब आने के अचूक नुस्खे :Frequent urination treatment





* जामुन की गुठली एवं बहेडे का छीलका दोनो बारीक पीस लें आठ दिन तक चार ग्राम रोज पानी के साथ लें,बार बार पेशाब आना बंद हो जायेगा
* कलमी शोरा दस ग्राम दूध दो सौ पचास ग्राम और पानी एक किलो इन सबकोमिलाकर दिन में दो बार पियें पेशाब खुलकर आयेगा बहुमूत्र रोग ठीक होजायेगा
* पिस्ता छ: दाने मुनक्का तीन दाने और काली मिर्च तीन दाने इन्हे सुबह शाम चबाकर पंद्रह दिन खाने से पेशाब बार बार नही आयेगा
* काले तिल भुने हुए आधा किलो + आंवला १५० ग्राम इन दोनो में आवश्यकतानुसार देसी गुड(गन्ने का) मिला कर १५ या २० ग्राम के लड्डू बना लें। सुबह-शाम सेवन करें और इसे खाने के आधे घंटे तक पानी न पियें। बस आपकी समस्या जादू की तरह से गायब हो जाएगी।



* यदि बार-बार पेशाब आता है, यदि बहुमूत्र रोग हो गया है तो उसके उपचार के लिए आंवले के पांच ग्राम रस में हल्दी की चुटकी घोलिए और उसमें पांच ग्राम शहद मिलाकर पी जाइये। ऐसा करने से जरा-जरा सी देर में पेशाब का आना बंद हो जाता है।
* मूली के नियमित प्रयोग से बहुमूत्र में आराम मिलता है
* आंवले का रस का सूखा चूर्ण गुड के साथ मिलाकर लेने से पेशाब खुलकर आता है
* जवाखार और मिश्री तीन तीन ग्राम ताजे जल के साथ कुछ दिन लेने से बहुमूत्र का रोग समाप्त हो जाता है
* राई काले तिल कलमी शोरा टेसू के फ़ूल एवं दालचीनी सभी को समभाग मेंलेकर चूर्ण बना लें,रोज दो ग्राम सुबह शाम शहद के साथ खाने पर बहुमूत्र रोगसे मुक्ति मिलती है
* बहुमूत्र में बबूल का गोंद घी मे भून कर मक्खन के साथ सुबह को खाने से फ़ायदा होता है
* अदरक का ताजा रस सेवन करने से रुका हुआ मूत्र जल्दी बाहर निकल जाता है,साथ ही बहुमूत्र की शिकायत भी दूर होती है



Tuesday, October 18, 2016

लीवर के रोगों मे रामबाण है घरेलू नुस्खे : household tip for Liver diseases


यदि ख़राब हो रहा है तो कुछ सामान्य से लक्षणों से जाना जा सकता है !
जैसे -
* मुंह से गंदी बदबू आना
* काले घेरे या थकान भरी आंखें
* पाचन तंत्र में खराबी
* त्वचा पर धब्बे -
* गहरे रंग का मूत्र
* आंखों में पीलापन
* मुंहु में कड़वाहट
* पेट पर सूजन
जैसे लक्षणो से आसानी से समझा जा सकता है कि लीवर खराब हो रहा है !
खराब लीवर की चिकित्सा से पहले जानना होगा की लीवर के रोग कौन कौन से हैं ताकि उनके अनुसार चिकित्सा की जा सके !







* एकदम से होने वाले रोग.... एक्यूट !
और
धीरे धीरे लंबे समय में होने वाले रोग.... क्रोनिक !
एक्यूट रोग लंबे समय तक रह कर क्रोनिक लीवर रोग पैदा करते है !
इसी प्रकार से यकृत के रोग भी कुछ दवाओं या शराब ( अल्कोहल ) आदि के लंबे समय तक सेवन से होने वाला लीवर रोग विश्व में सबसे अधिक देखा जाता है इसमें लीवर क्षति ग्रस्त होकर सिकुड़ जाता है - इस स्थिति को सिरोसिस कहा जाता है !
 ये यकृत रोग तीन स्तर पर :-
* पहले फेटी और सूजन वाला
* दूसरा अल्कोहलिक हेपेटाइटिस
* अंत में तीव्र मारक सिरोसिस तक पहुँचता है !

 फैटी लीवर लिवर के लिये आयुर्वेद औषधि :-
* आरोग्यवर्धिनी वटी 2 गोली - पूनर्नवादि मण्डुर 2 गोली - प्लीहारी वटी 2 गोली पानी से दिजिये !
* कालमेघनवायसलौह 10 ग्राम - रोहितक लौह 5 ग्राम - वृहत लोकनाथ रस 5 ग्राम यानी 20 गोली - इन सबको एक मेँ मिलाकर ठिक से पीसकर कम से कम 30 खुराक बना लिजिये -
और 1 - 1 पुड़िया उसमे से लेकर शहद के साथ चटायेँ !
रोहितकारिष्ट 3 चम्मच + कालमेघासव 3 चम्मच पानी 6 चम्मच मिलाकर सुबह और शाम भोजन के बाद दें !
छोटी इलाइची चबा कर खायें 3 महीने तक दिन मे एक इलाइची रोज खायें


* अजवाईन 3 ग्राम और आधा ग्राम नमक भोजन के बाद पानी के साथ लेने से लिवर - तिल्ली के सभी रोग ठीक होते हैं !
** जिगर की कमजोरी :-
ग्वारपाठा के पत्तों का रस तथा शहद दोनों को चीनी मिट्टी के बर्तन में मुंह बंद कर 1 सप्ताह तक धूप में रखें - इसके बाद इसे छान लें !
जितना ग्वारपाठा के पत्तों का रस लें - उसकी आधी मात्रा में शहद
इसमें से 10 - 20 ग्राम की मात्रा में सुबह - शाम सेवन करने से यकृत विकारों ( जिगर के रोगों ) को दूर करने में लाभ मिलता है !
 इसकी अधिक मात्रा विरेचक होती है परन्तु उचित मात्रा में सेवन करने से मल एवं वात की प्रवृत्ति ठीक होने लगती है !
इसमें सेवन से यकृत ( जिगर ) मजबूत हो जाता है और उसकी क्रिया सामान्य हो जाती है !
* हल्दी को अपने खाने में शामिल करें या रात को सोने से पहले एक गिलास दूध में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर पिए !
* साबूत चावल के दाने चुटकी भर ( 7 दाने ) ले सुबह सुबह पानी के साथ खाली पेट निगल ले !
{ ध्यान रहे चावल के दाने टूटे हुए न हो एक दम से साबुत हों - इन्‍हे लेते वक्त चबाना नही - सिधे पानी से निगल लें - फिर उसके आधे घंटे बाद ही कुछ खायें - लिवर को नयी ज़िदगी मिलेगी इस प्रयोग से }
एक बहुत उपयोगी और कई बार परीक्षित नुस्खा !!!
यह पूरी तरह निरापद है .... !
इसका कोई साइड इफ़ेक्ट भी नही .... !
यहाँ तक की 6 माह के बच्चे को भी दे सकते है !
# भृंगराज ~ Alba .... लीवर के लिए अमृत ... !
* किसी को पीलिया के कारण की तकलीफ है
* किसी को शराब के कारण लीवर की तकलीफ है







* लीवर की कई तरह की तकलीफ में यह राम बाण इलाज है !
* लिवर बढा हुवा हो तो प्याज रस में काला नमक व थोडा सा निम्बू रस निचोड नियमित पीयें !
इससे बढा हुवा लीवर व तिल्ली ( Spleen ) सामान्‍य हो जायेंगे व लीवर सबंधि  कष्ट भी दूर होजाएंगे
* लीवर की बिमारी में भुई आंवला अत्यंत ही गुणकारी है - लीवर की परेशानी हो Bilirubin बढा हुवा है व पीलिया रोग है भुई आंवला के पंचाग - जड टहनी फल फूल पत्ति का काढा बनाकर सुबह शाम पीयें - इससे लीवर की सूजन और लीवर बढे होने की परेशानी है तो वह भी जल्द दूर हो जायेगी !
*जिनको लीवर की परेशानी नही है - वो भी भुई आंवला का काढा बना 1 माह नियमित सेवन कर ले तो पूरे वर्ष लीवर की परेशानी नही होगी !
इसके साथ पतंजलि के-
'' दिव्य उदरामृत वटी '' 2 - 2 गोली सुबह शाम ...
'' सर्वकल्प क्वाथ '' का सुबह शाम सेवन करें ..
लीवर की किसी भी समस्या के लिये रामबाण है !

विशिष्ट परामर्श- लीवर ,तिल्ली (स्प्लीन)और आंतों संबंधी रोगों की रामबाण हर्बल औषधि  है "उदर रोग हर्बल" जो रोग की बढ़ी हुई अवस्था मे भी कारगर परिणाम देती है|| वैध्य श्री दामोदर  से  98267-95656 पर संपर्क किया जा सकता है| 

Sunday, October 16, 2016

घर पर हर्बल नेचुरल डाई बनाने का तरीका- how to make Herbal natural dye at home

घर पर हर्बल नेचुरल डाई बनाने का तरीका-


क्या आप बाल काला करने के लिए डाई या केमिकल युक्त हानिकारक कलर इस्तेमाल करते हैं। शायद आप नहीं जानते ये आपके बालो के लिए कितने हानिकारक हैं और साथ में ये आपकी त्वचा और स्वस्थ्य को भी बहुत नुक्सान पहुंचाते हैं। इनसे आपको बालो के गिरने पकने और गंजे पन की शिकायत हो सकती हैं। । तो अब आप भारतीय ज्ञान की मदद से घर पर ही बनाये अपने लिए बाल काला करने की सुरक्षित हर्बल और देसी डाई। और अपने बालो और त्वचा को बचाइये इन हानिकारक पदार्थो से।
आइये जाने इसको बनाने की विधि।
आवश्यक सामग्री-
1. सूखी पीसी मेहँदी – 20 ग्राम
2. काफी पाउडर – 3 ग्राम
3. कत्था – 3 ग्राम
4. ब्राह्मी चूर्ण – 10 ग्राम
5. आंवला चूर्ण – 10 ग्राम
6. दही – 25 ग्राम
7. नीम्बू का रस – 4 चम्मच
1 से 5 तक सभी को कूट पीस कर आपस में मिला लीजये। आवश्यकता अनुसार मिला कर रख लीजिये। बाद में ५० ग्राम मिश्रित पाउडर में २५ ग्राम दही और ४ चम्मच नीम्बू का रस मिला कर बालो में आधे घंटे तक लगा कर रखे। फिर पानी से धो लीजिये। इसके प्रयोग से बाल काले घने तथा मुलायम हो जायेंगे।
विशेष – कई बार पहली बार में तुरंत काले बाल नहीं होते। तो जब आप तीन चार बार इसको नियमित करेंगे तो आपके बाल प्राकृतिक रूप से काले दिखने लगेंगे।
इसके साथ में आप बाल धोने के लिए घर पर ही बनाया हुआ या फिर गौ पंचगव्य से बना हुआ शैम्पू और साबुन इस्तेमाल कीजिये।
अगर छोटी उम्र में ही आपके बाल झड़ने पकने या सफ़ेद होने लग गए हैं तो आप अपनी नियमित खुराक पर ज़रूर ध्यान दे। भोजन में नियमित मिनरल्स और फोलिक एसिड को शामिल करे।

कैसा भी कितना भी पुराना और किसी भी रोग का दर्द हो जायेगा छू मंतर.



कैसा भी कितना भी पुराना और किसी भी रोग का दर्द हो जायेगा छू मंतर.
जोड़ों का दर्द गठिया बाई बादी का दर्द पुरानी चोट का दर्द गुम चोट का दर्द आर्थराइटिस का दर्द सभी दर्दों के लिए रामबाण.
ज़रूरी सामान.
आमा हल्दी – 200 ग्राम .
सौंठ – 200 ग्राम . (सूखी अदरक को सौंठ कहा जाता है, ये पंसारी से मिल जाती है, इसका बना बनाया चूर्ण भी मिल जाता है )
मेथी दाना – 200 ग्राम .
भेड़ का दूध – एक गिलास (250 ग्राम.)
विधि :-
सबसे पहले आमा हल्दी सोंठ और मेथी दाना को साफ करके अलग अलग कूट लीजिये अभी इस चूर्ण को 250 ग्राम भेड़ के दूध में उबालना है इसको धीमी आंच पर धीरे धीरे हिलाते रहना है ताकि यह खोये की तरह गाड़ा हो जाये ये इतना गाड़ा हो जायेगा की इसकी गोलिया बनाई जा सकेंगी अभी इसको आप गोलियों के आकर में डाल लीजिये गोलियों का आकारइतना हो की आसानी से निगलि जा सके 2 ग्राम की एक गोली बना लीजिये
सेवन की विधि :-
इस गोली को आप दिन में दो बार सुबह और शाम गाय के दूध के साथ लीजिये
इसके फायदे ;-
इस गोली के सेवन से आपके शरीर का दर्द चाहे कैसा भी दर्द हो जोड़ो का दर्द हो बाई बादी का दर्द हो वात का दर्द हो शुगर के कारण दर्द हो अर्थात किसी भी प्रकार का दर्द हो इसके नियमित सेवन से कुछ ही दिनों में ठीक हो जायेगा
इसको आप जरूर आजमाए



Wednesday, October 12, 2016

10 दिन मे तोंद सपाट करने के उपाय : Measures to flat belly in 10 days



गुन गुना पानी पीना :
पानी हमारे शरीर के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। पानी के बिना इंसान जी नहीं सकता है, लेकिन गुनगुना या गर्म पानी भी कम फायदेमंद नहीं है। ये गुणों की खान है। गुनगुना पानी पीने से मोटापा कम होता है। मोटापे से परेशान लोगों के लिए गुनगुना पानी बहुत हितकारी है। खाना खाने के आधे घंटे बाद एक ग्लास गुनगुने पानी को सिप करके पीने से शरीर का वजन कम होता है। इसके पीछे ये तर्क दिया जाता है कि गुनगुना या गर्म पानी शरीर के विषैले तत्वों को बाहर निकाल देता है। इससे शरीर की गंदगी को साफ करने का प्रोसेस तेज होता है और किडनी के माध्यम से गंदगी बाहर निकल जाती है। इसके अलावा थोड़ा गर्म पानी पीने से कब्ज भी दूर होती है। गर्म पानी से नहाने से थकान मिटती है और त्वचा में निखार आता है। गर्म पानी के इस्तेमाल से वजन कम होने के साथ-साथ ब्लड सर्कुलेशन भी संतुलित होता है। गर्म पानी में नींबू और शहद मिलाकर पीने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, साथ ही ये मिश्रण वजन कम करने में भी फायदेमंद है। किडनी की सही देखभाल के लिए दिन में सुबह-शाम 2 बार गुनगुना पानी पीना चाहिए। जिससे शरीर में मौजूद गंदगी बाहर निकल जाती है और शरीर साफ रहता है। अक्सर कई बीमारियों की शुरुआत पेट निकलने की समस्या से ही शुरु होती है। एक स्वास्थ्य विशेषज्ञ के अनुसार, प्रतिदिन अपने भोजन में नमक की मात्रा घटाकर और पोटैशियम से भरपूर :*फाइबर युक्त भोजन का अधिकाधिक उपयोग कर हम तोंद के निकलने से बच सकते हैं। । एक दिन में अधिकतम 1500 मिलीग्राम नमक ही खाएं। *घुलनशील एवं अघुलनशील रेशेयुक्त भोजन की मिश्रित मात्रा का प्रयोग करना चुस्त-दुरुस्त एवं छरहरा रहने का सबसे अच्छा तरीका है। पेट के अत्यधिक भरे होने से बचें, क्योंकि इससे कब्ज होती है। सोडियम चूंकि शरीर में जल के स्तर को बनाए रखता है, वहीं पोटैशियम अतिरिक्त जल से निजात दिलाने में मददगार होता है।



केले और शकरकंद जैसे पोटैशियम से भरपूर खाद्य पदार्थ का सेवन करने से कमर के मध्य हिस्से को पतला करने में मदद मिलती है। पर्याप्त मात्रा में जल का सेवन करने से भोजन के रेशे अपना कार्य कहीं बेहतर तरीके से कर पाते हैं और कब्ज की शिकायत को दूर रखते हैं।
*ऐसे खाद्य पदार्थों से दूर रहें जो पचने में मुश्किल हों, जैसे चीनी या वसायुक्त खाद्य पदार्थ। फ्लेवर्ड पेय पदार्थों, कम कार्बोहाइड्रेट वाले एवं चीनी रहित खाद्य पदार्थों को हमारा शरीर आसानी से नहीं पचा पाता। बड़ी आंत में पाए जाने वाले जीवाणु उन्हें फर्मेट करने की कोशिश करते हैं, जिसके कारण पेट में गैस बनती है और पेट फूल जाता है।
*यदि आप अपनी तोंद से परेशान हैं और उसे शेप में लाने के लिए जी जान लगाकर कसरत करने में जुटे हैं तो जरा रुक कर एक बार यह भी सोच लीजिए कि कहीं ऐसा तो नहीं कि शरीर से अतिरिक्त वसा हटाने के जुगत में आप खुद को बीमार बना रहे हों। हर इंसान चाहता है कि वह शर्ट या टी-शर्ट से बाहर झांकती तोंद को कम कर फिट बन सके। और इसके लिए कई लोग रात दिन एक कर तरह-तरह के व्यायाम भी करते हैं। लेकिन उन्हें यह नहीं मालूम होता कि इससे फायदा होने के बजाय उन्हें नुकसान तो नहीं हो रहा है। जी हां फिटनेस एक्सपर्ट बताते हैं कि जो लोग वजन घटाने के लिए एक्सरसाइज रूटीन बनाए हुए हैं उन्हें सावधान होकर पहले यह तय करना चाहिए कि उनके लिए कौंन सा व्यायाम और कितना व्यायाम बेहतर है। जो लोग बिना सोचे-समझे तमाम तरह के व्यायाम करते हैं, वे फायदे की जगह नुकसान उठआ सकते हैं। आपको जानकर खुशी होगी की आपको अपनी तौंद को कम करने के लिए ढ़ेर सारी नहीं बल्कि दो एक्सरसाइज ही काफी हैं। लेकिन एक्सरसाइज के साथ-साथ डाइट और दिनचर्या का ध्यान रखना भी जरूरी होता है। तो चलिये जानें कौंन सी हैं ये एक्सरसाइज और क्या है इन्हें करने का सही तरीका। कैटल बॉल स्विंग ग्रुप क्लासेज में आपको प्लियोमेट्रिक (एक तरह की कसरत जिसमें बहुत तेज गति होती है) करना सिखाया जाता होगा। इसमें वेट बांधकर टेबल को जंप करते रहना होता है। लेकिन स्टेप अप बेंच को जंप करके पार करना और उस दौरान डंबल या लाइट वेट को टखने से बांधना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इससे चोट लग सकती है। हालांकि जंप करने से काफी कैलोरी खर्च होती है, लेकिन बात यह भी है कि वेट लेकर जंप करने से कोई टिश्यू या मसल खिंच सकती है या फिर कहीं चोट भी लग सकती है।
फिटनेस एक्सरपर्ट बताते हैं कि यदि आप जंप करना चाहते हैं तो कैटल बॉल स्विंग करें। डंबल और बारबेल का उपयोग केवल रेजिस्टेंस ट्रेनिंग प्रोगाम में ही करना चाहिए, जहां आपके सभी मूवमेंट पर ट्रेनर की पेनी नजर होती है। केटल बॉल एक्सरसाइज के लिए झुक कर (हाफ बेंड) खड़ा होना पड़ता है। इसके बाद दोनों पैरों में थोड़ा गैप बनाया जाता है और कैटल बॉल्स को दोनों हाथों में पकड़कर पैरों के बीच में होते हुए कंधों तक उठाकर स्विंग किया जाता है। बोट स्टाइल 'बोट' यानी नाव के आकार में शरीर को स्ट्रेच करने की यह एक्सरसाइज पेट का फैट कम करने की एक बेहद कारगर और फायदेमंद एक्सरसाइज है। इसे करने के लिए जमीन पर बैठ जाएं, ऐसे में आपके दोनों पैर सीधे होने चाहिए। अब दोनों हाथों को ऊपर उठाते हुए सांस खींचें और झुकते हुए दोनों पंजों को हाथों से छुएं। इस दौरान कोशिश करें कि आपके कंधों से घुटने छू जाएं। इस एक्सरसाइज को रोज दिन में तीन बार करें। कुछ ही हफ्तों में आप अपने पेट की चर्बी में कमी होती हुई महसूस कर पाएंगे। फैड डाइट न लें।



*वजन घटाने के लिए डिटॉक्स बेहतर उपाय नहीं है। तेजी से वजन घटाना कई बार खतरनाक साबित हो सकता है। फैड डाइट आपको मोटा होने से बचाता है लेकिन इसके साथ कई स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं और कई मामलों में तो आप पहले से भी ज्यादा मोटे हो जाते हैं। पौष्टिक आहार समय से खाएं और भूख से थोड़ा कम ही खाएं। वजन घटाने के लिए सबसे पहले डायटीशियन से संपर्क करके अपने अनुकूल डाइट प्लान बनवाएं ताकि आप हेल्दी तरीके से वजन घटा सकें और एक्सरसाइज का भी पूरा असर हो सके। वजन घटाने के लिए डाइट और एक्सरसाइज दोनों को साथ में लेकर ही बेहतर परिणाम पाये जा सकते हैं।
*रात में देर तक जग कर काम करते हैं तो अब ये आदत छोड़ दें। समय से सो जाएं और भरपूर नींद लें क्योंकि जब आप थके होते हैं तो आपके शरीर में कुछ ऐसे हार्मोन बनते हैं जो आपके मीठा खाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। साथ ही, कम सोने से शरीर में कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है। शरीर के लिए रोज सात घंटे की नींद जरूरी है इसलिए सात घंटे की नींद लें और फिट रहें।
*तोंद कम करने में शहद भी फायदेमंद होता है। शहद के कई गुण हैं। यह न सिर्फ मोटापा बढ़ाने, बल्कि मोटापा कम करने में भी कारगर है। आपको चाहिए कि आप रोजाना सुबह पानी के साथ शहद का सेवन करें। इससे आप शीघ्र ही कमर और पेट को कम करने में सफल होंगे। आप चाहें तो सप्ताह में एक दिन तरल पदार्थ पर भी रह सकते हैं। इसमें आप नींबू पानी, दूध, ज्यूस, सूप इत्यादि चीजों को प्राथमिकता दें। आप चाहें तो एक दिन सलाद या फलाहार को भी दे सकते हैं। इसमें आप मात्र फल या सलाद ही खाएंगे। सलाद खाकर वजन घटाने में आपको मदद मिलगी।
*पुदीना में मोटापा विरोधी तत्व पाये जाते हैं। पुदीना रस एक चम्मच २ चम्मच शहद में मिलाकर लेते रहने से उपकार होता है।
*मोटापा भगाने का और एक मंत्र आ गया है। हाल ही एक शोध में पता चला है कि सुबह जल्दी उठकर नाश्ते से पहले नियमित व्यायाम करने से मोटापा जल्दी दूर भागता है। शोध के मुताबिक जो लोग नाश्ते के बाद कसरत करते हैं उनके मुकाबले वे अपना मोटापा 20 फीसदी तक ज्यादा घटा सकते हैं बनस्पित उनके जो नाश्ते के बाद कसरत करते हैं। शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की थी कि क्या रातभर भूखे रहने के बाद सुबह उठकर व्यायाम करने से भूख बढ जाती है और लोग ज्यादा खाना खाते हैं। अध्ययन के तहत 12 सक्रिय लोगों को सुबह 10 बजे के लगभग ट्रेडमिल पर कुछ देर व्यायाम करने को कहा गया। इनमें सुबह के नाश्ते से पहले व बाद में व्यायाम करने वाले दोनों तरह के लोग शामिल थे। बाद में सभी प्रतिभागियों को चॉकलेट मिल्क शेक दिया गया और लंच में पास्ता दिया गया। प्रतिभागियों से कहा गया कि वह पेट भर कर खाना खा सकते हैं। शोधकर्ता एम्मा स्टीवंसन और जेवियर गोन्जालेज के समूह ने पाया कि बिना नाश्ता किए व्यायाम करने वाले प्रतिभागियों को दिन में ज्यादा भोजन की आवश्यकता महसूस नहीं हुई। भूखे पेट व्यायाम करने वाले प्रतिभागी अपेक्षाकृत 20 प्रतिशत अधिक वसा कम करने में कामयाब रहे।
*यह बहुत जरूरी है लेकिन कुछ लोगों के लिए यह बहुत कठिन टॉस्क है तो वे मानस‌िक उपाय करें। जब उनके सामने फैटी डाइट हो तो वे उससे होने वाले नुकसान के बारे में सोचें और अपनी तोंद को देंखे। ओवर इटिंग से बचना जरूरी है। कोई भी बहाना न बनाएं। खुद के साथ न्याय करें।
पेट की चर्बी को कम करने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है डाइट पर कंट्रोल। मान सकते हैं कि इसपर नियंत्रण के लिए 80 प्रतिशत भूमिका डाइट की ही होती है। शक्कर से बिल्कुल दूरी बरत लें और ग्लूकोज व कार्बोहाइड्रेट की जगह प्रोटीन की अधिकता वाली डाइट लें।
*सुबह-सुबह रोजाना लहसुन की दो तीन कलियां चबाना और ऊपर से नींबू पानी पीना आपके लिए काफी फायदेमंद होता है। इससे वजन कम करने की आपकी प्रक्रिया दोगुनी हो जाएगी। इसके साथ ही आपके शरीर में रक्‍त प्रवाह भी सुचारू हो जाएगा
*पेट, कमर और जांघों पर जमा चर्बी को कम करने के लिए आप क्या कुछ नहीं करते हैं, फिर भी बढ़ती चर्बी पर नियंत्रण रखने में कामयाब नहीं हो पाते हैं। इन हिस्सों पर जमा फैट्स यानी बेली फैट्स न सिर्फ दिखने में बुरा लगता है बल्कि भविष्य में आनी वाली कई गंभीर बीमारियों का संकेत भी है। तो चलिए आज हम आपको इसे कम करने के ऐसे प्रभावी उपायों की जानकारी दे रहे हैं जिनसे आप आसानी से अपने शरीर को चर्बी को कम कर सकते हैं। वजन बढऩे की एक बहुत बड़ी वजह होती है कोर्टिसोल नामक हार्मोन का तेजी से बढऩा। इसके पीछे तनाव, खानपान व जीवनशैली संबंधित की कारण हो सकते हैं।



*अगर आप बहुत अधिक स्ट्रेस में रहते हैं तो शरीर में कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है। विटामिस सी युक्त डाइट के सेवन से शरीर में कोर्टिसोल नियंत्रित हो सकता है। इसमें कार्निटाइन नामक तत्व भी पाया जाता है जो शरीर के फैट्स को बर्न करने में सहायक है। संतरे, शिमलामिर्च, टमाटर, नींबू व अन्य साइट्रस फलों में *विटामिन सी भरपूर मात्रा में मिलता है।
जानकर ताज्जुब होगा लेकिन बेली फैट्स कम करने के लिए ओमेगा 3 फैट्स वाली डाइट बहुत फायदेमंद है। मछली, अखरोट आदि में ओमेगा 3 फैट्स अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं जो चर्बी को कम करने में मदद करते हैं।
*रोज बादाम का सेवन आपका वजन घटा सकता है। पुरड्यू यूनिव‌र्सिटी के शोध की मानें तो बादाम में मौजूद विटामिन ई और मोनोसैचुरेटेड फैट्स न सिर्फ शरीर में मौजूद सैचुरेटेड फैट्स को कम करने में मदद करता है बल्कि ओवर डाइटिंग से भी बचाता है। रोज हल्के भुने बादाम का सेवन बेहतरीन नाश्ता है जिसे लेने के बाद दिनभर स्नैक्स खाने का मन नहीं करता है, वहीं यह शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है।
*रस्सी कूदना वजन घटाने के लिए बेहतरीन एक्सरसाइज है। वजन घटाने के लिए रस्सी कूदने के साथ स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करें।
*सुबह-शाम की सैर सबसे ज्यादा लाभकारी है। आपको कमर और पेट के आसपास की चर्बी को दूर करने के लिए चाहिए कि रोजाना सुबह उठकर कुछ देर सैर पर जाएं और रात के खाने के बाद भी सैर करना न भूलें। प्रतिदिन कम से कम 2 किलोमीटर चलें। इससे आप अतिरिक्त कैलोरी को आसानी से कम कर पाएंगे और पेट-कमर की अतिरिक्त चर्बी को भी कम किया जा सकता है। उपरोक्त उपायों को अपनाकर तोंद को कम किया जा सकता है।











Tuesday, October 11, 2016

क्या डायबिटीज़ मे केला खा सकते हैं?Can banana be eaten in diabetes



केले में क्या होता है?
केला फाइबर का समृद्ध स्त्रोत होने के अलावा इसमें विटामिन सी, विटामिन बी6 और पौटेशियम भी मौजूद रहता है जिसके कारण इसे आहार में शामिल करना अच्छा माना जाता है। जहाँ बी6 आपके मूड को अच्छा रखता है वहीं विटामिन सी आपके प्रतिरक्षा तंत्र को मज़बूत बनाता है, पौटेशियम आपके ब्लडप्रेशर को नियमित रखता है तथा फाइबर के कारण आपको पेट काफी समय तक भरा हुआ महसूस होता है। एक अध्ययन से यह भी पता चला है कि केले में उपस्थित स्टार्च (24 ग्राम प्रतिदिन) इन्सुलिन की संवेदनशीलता को बढ़ने में सहायक होता है तथा टाइप-2 डायबिटीज़ में वज़न कम करने में सहायक होता है।
प्रत्येक व्यक्ति की ग्लूकोज़ के प्रति प्रतिक्रियाएं अलग अलग हो सकती हैं, अत: आपके शरीर के लिए क्या सही है यह जानने के लिए आपको अपने विवेक का उपयोग करना होगा। अपने आहार की मात्रा में फल सब्जियों और केले के बीच संतुलन बनायें। क्योंकि आहार के मामले में संयम रखना बहुत आवश्यक है और विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ खाना बहुत अच्छी बात है। तो यदि आप अपने आहार में सेब, अंगूर, ब्लूबेरीज़ या एवोकेड़ो को शामिल कर सकते हैं तो आप अपने शरीर में शुगर के स्तर को आसानी से संतुलित रख सकते हैं।



क्या खाये और क्या नहीं? यह डायबिटीज रोगी के मन में सबसे पहला और जरूरी सवाल होता है। इस सवाल के चलते अक्‍सर लोग बिना जानकारी के बस अपने अंदाजे से कुछ भी खाना छोड़ देते हैं। जिसके कारण वह जाने-अनजाने में आहार के फायदों से महरूम हो जाते हैं। इसलिए टाइप-2 डायबिटीज के रोगी को कुछ भी खाना खाने या छोड़ने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
टाइप-2 डायबिटीज में शरीर उचित मात्रा में इंसुलिन का उत्‍पादन नहीं कर पाता। जिसके कारण ब्‍लड में से ग्लूकोज खींच लिया जाता है ताकि कोशिकाओं में उसे एकत्रित करके रखा जा सके। इसके परिणामस्वरूप आपके शरीर में शुगर का स्तर बढ़ता या घटता रहता है। यानी आपके शरीर में शुगर के स्तर को नियमित करने में आहार एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अधिक ग्लाइसेमिक युक्त आहार लेने से शुगर का स्तर एकदम बढ़ता और शुगर के तुरंत बर्न होने के बाद अचानक कम हो जाता है।
डायबिटीज में केले का सेवन करना चाहिए या नहींh
केले के अनगिनत गुणों के कारण इसे अपने आहार में शामिल करना अच्‍छा माना जाता है। केला फाइबर का समृद्ध स्रोत होने के साथ-साथ इसमें विटामिन सी, विटामिन बी6, पोटेशियम, मिनरल, मैग्‍नीज भी मौजूद रहता है। विटामिन बी6 आपके मूड को अच्छा रखता है वहीं विटामिन सी आपके प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाता है, पौटेशियम आपके ब्लडप्रेशर को नियमित रखता है तथा फाइबर के कारण आपको काफी समय तक भरा हुआ महसूस होता है। आपको ये जानकार आश्चर्य होगा कि इस फल को खाने से स्किन में अलग ही ग्लो आता है।
अक्सर लोग ये मानते हैं कि डायबिटीज होने पर फलों में केला खाना छोड़ देना चाहिए क्योंकि इसको खाने से ब्लड शुगर लेवल बढ़ता है। लेकिन एक शोध से साबित हुआ है कि यदि आप को दूर करना चाहते हैं तो केला सबसे उत्तम फल है। यानी रोजाना संतुलित मात्रा में या 250- 500 ग्राम/दिन केला खाने से फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज लेवल के साथ एलडीएल कोलेस्ट्रॉल और एचडीएल कोलेस्ट्रॉल का अनुपात भी कम होता है।
डायबिटीज के रोगियों को यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि केले में कार्बोहाइड्रेट भी होते हैं, इसलिए अपने आहार में इसे शामिल करते समय इस बात का भी ध्यान अवश्य रखना चाहिए। डायबिटीज के रोगी केले भी खा सकते हैं। अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन, डायबिटिज में लोगों को केला खाने के लिए प्रोत्साहित करता है। उनके अनुसार केला एक स्वस्थ आहार है जिसका सेवन करना पूरी तरह से उचित है।



इसके अलावा शरीर में शुगर के स्तर एक जैसा रखने के लिए फल तथा कार्ब्स का सेवन दिन में थोड़े थोड़े अंतराल पर करें। सही तरीके से अपनी योजना बनायें तथा दिन में एक केले के सेवन का आनंद उठायें। इस प्रकार डायबिटीज़ के रोगी केला खाने से होने वाली समस्याओं से बच सकते हैं।
कच्चे केले या पके हुए केले
जैसे जैसे केला पकता है उसमें उपस्थित स्टार्च, शुगर (शर्करा) में बदलने लगता है। जब आप पूर्ण रूप से पका हुआ केला खाते हैं तो आप ऐसे फल का सेवन करते हैं जिसमें लगभग 90 प्रतिशत स्टार्च होता है। यही कारण है कि शोधकर्ता कहते हैं कि कच्चा केला कम ग्लायसिमिक प्रतिक्रिया देता है। अत: पके हुए केले की तुलना में कच्चा केला अधिक श्रेष्ठ है।
पका केला खाने से बचें
केले के पकने के बाद उसमें उपस्थित स्टार्च, शुगर में बदलने लगता है। और जब आप पूरा पका केला खाते हैं तो आप ऐसे फल का सेवन करते हैं जिसमें लगभग 90 प्रतिशत स्टार्च होता है। यही कारण है कि कच्चा केला कम ग्लाइसेमिक प्रतिक्रिया देता है। इसलिए डायबिटीज से ग्रस्‍त लोगों के लिए पके केले की तुलना में कच्चा केला अधिक श्रेष्ठ होता है।


Monday, October 10, 2016

शरीर की सारी बीमारियों का काल हैं ये गुड और जीरे का चमत्कारिक पानी..!



* मासिक धर्म को नियमित करता है यह मिश्रण महिलाओं के शरीर में हार्मोंस के असंतुलन को नियमित करता है और इस प्रकार मासिक धर्म की अनियमितता को दूर करता है। यह मासिक धर्म के समय होने वाले दर्द से भी राहत दिलाता है।






*यह एक प्राकृतिक डिटॉक्स है जीरे और गुड़ का यह मिश्रण प्राकृतिक बॉडी डिटॉक्स (विषैले पदार्थों को बाहर निकालना) की तरह कार्य करता है जो आपके संपूर्ण शरीर को स्वच्छ करता है तथा शरीर से विषैले पदार्थों को प्रभावी रूप से बाहर निकालता है तथा इस प्रकार आपके प्रतिरक्षा तंत्र को मज़बूत बनाता है।

*.पेट फूलने से आराम दिलाता है जीरे और गुड़ का मिश्रण एसिड के प्रभाव को बेअसर कर देता है जिसके अकारण पेट में गैस बनना, पेट फूलना और एसिडिटी कम होती है।
 कब्ज़ को रोकता है आयुर्वेद में भी यह बताया गया है कि यह मिश्रण कब्ज़ से आराम दिलाने तथा उसे रोकने में सहायक होता है क्योंकि यह मल त्याग की प्रक्रिया को नियमित करता है।




* एनीमिया से बचाव जीरा तथा गुड़ दोनों में पोषक तत्व तथा खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं जो लाल रक्त कोशिकाओं को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक होते हैं। इस प्रकार यह ड्रिंक एनीमिया से बचाव करता है।
* शरीर के तापमान को कम करता है यह प्राकृतिक पेय शरीर के तापमान को कम करता है और शरीर के तापमान को नियमित करता है जिससे बुखार, सिरदर्द और जलन आदि से राहत मिलती है।

*शरीर के दर्द को कम करता है जीरे और गुड़ के मिश्रण में प्रदाहनाशी गुण होते हैं अत: यह प्रभावित भाग में रक्त प्रवाह को बढाकर शरीर के दर्द को कुछ हद तक कम करता है।






Thursday, October 6, 2016

रोज़ाना गुड़ खाने के फायदे,लाभ: Benefits of eating jaggery


रोज़ाना गुड़ खाने के 
फायदे,लाभ 
 Gur Khane Ke Fayde .




गुड़ में हैं औषधीय गुण : गुड़ का सेवन ज्यादातर लोग ठंड में ही करते हैं, वह भी थोड़ी मात्रा में इस सोच के साथ की ज्यादा गुड़ खाने से नुकसान होता है। इसकी प्रवृत्ति गर्म होती है, लेकिन ये एक गलतफहमी है। गुड़ हर मौसम में खाया जा सकता है और पुराना गुड़ हमेशा औषधि के रूप में काम करता है। आयुर्वेद संहिता के अनुसार यह शीघ्र पचने वाला, खून बढ़ाने वाला व भूख बढ़ाने वाला होता है। इसके अतिरिक्त गुड़ से बनी चीजों के खाने से बीमारियों में राहत मिलती है।
मोटापा को करें कंट्रोल
माना जाता है कि अगर आप दूध के साथ चीनी का इस्तेमाल करते है तो इसकी जगह आप गुड का इस्तेमाल करें। ऐसा करने से आपका वजन कंट्रोल में रहेगा। जिससे आप मोटापा का शिकार नहीं होगे।.
जिस दिन आप बहुत ज्‍यादा थके हुए हों, उस दिन पानी के साथ गुड़ का सेवन करें और फिर देंखे ये आपको कैसे फायदा पहुंचाता है। इसी तरह से गुड़ का दूध के साथ सेवन करने से काफी फायदा मिलता है। लेकिन इस बात का ध्‍यान रखें कि दूध हमेशा ठंडा होना चाहिये तभी फायदा पहुंचेगा नहीं तो गरम दूध और गुड जहर के समान होंगे।
*पेट संबंधी समस्या को रखें ठीक
*अगर आपको पाचन संबधी कोई भी समस्या है तो गर्म-गर्म दूध और गुड का सेवन करने से आपको पेट संबंधी हर समस्या से निजात मिल जाता है।
*ठंड में जरूर खाएं गुड़ : गुड़ में सुक्रोज, ग्लूकोज, खनिज तरल और जल अंश मौजूद होते हैं। इसके अलावा गुड़ में कैल्शियम, फॉस्फोरस, आयरन और ताम्र तत्व भी अच्छी मात्रा में मिलते हैं। इसलिए चाहे हर मौसम में आप गुड़ खाना न पसन्द करें लेकिन ठंड में गुड़ जरूर खाएं।
* गुड़ खाने से खून बढ़ता है।
* खाना खाने के बाद इसे खाने से गैस नहीं बनती है।
असिडिटी में सहायक गुड़ : अगर आप गैस या असिडिटी से परेशान हैं तो खाने के बाद थोड़ा गुड़ जरूर खाएं ऐसा करने से ये दोनों ही समस्याएं नहीं होती हैं। गुड़, सेंधा नमक, काला नमक मिलाकर चाटने से खट्टी डकारें आना बंद हो जाती हैं।
 *गुड़ खाने से याद्दाश्त कमजोर नहीं होती, इसलिएअगर आप अपनी याद्दाश्त दुरुस्त रखना चाहते हैं,तो इसका नियमित सेवन करें।
*जोड़ो के दर्द को करें दूरगुड़ खाने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है। अगर रोजाना गुड़ का एक छोटा पीस अदरक के साथ मिला कर खाया जाए तो जोड़ों में मजबूती आएगी और दर्द दूर होगा।
खूबसूरती बढ़ाए
इसे खाने से त्‍वचा मुलायम और स्‍वस्‍थ बनती है। बाल भी अच्‍छे हो जाते हैं। साथ ही मुंहासे और एक्‍ने भी ठीक हो जाते हैं।
 *गुड़ खाने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।
 *इसे खाने से बैठे हुए गले को ठीक किया जा सकता है।
*गुड़ से बनी चाय सेहत के लिए अच्छी मानी जाती है, इसलिए चाय में चीनी की जगह गुड़ डालें।
 *अगर आपको खट्टी डकारें आती हैं, तो गुड़ में काला नमक मिलाकर चाटें. ऐसा करने से खट्टी डकारें आना बंद हो जाएंगी।
 *यह लड़कियों के मासिक धर्म को नियमित करने में मददगार होता है।
 ज्यादातर लोगों को लगता है कि गर्मी के मौसम में इसका सेवन नहीं करना चाहिए। अगर आपको भी यही लगता है, तो ये आपकी गलत फहमी है। ये एक ऐसी चीज है, जिसे किसी भी मौसम में खाया जा सकता है।
*पीरियड्स के दर्द से आराम
पीरियड्स में दर्द होता है तो महिलाओं को इसका सेवन जरुर करना चाहिये। पीरियड शुरु होने के 1 हफ्ते पहले 1 चम्‍मच गुड़ का सेवन रोजाना करें।
*कान दर्द की समस्या दूर करता है गुड़ : ठंड में कई लोगों को कान के दर्द की समस्या होने लगती है। ऐसे में कान में सरसों का तेल डालने से व गुड़ और घी मिलाकर खाने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।
*जुकाम को भगाने में भी ये लाभदायक साबित होता है।

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अस्थमा से परेशान लोगों के लिए गुड़ और काले तिल से बने लड्डूखाना फायदेमंद होता हैं।
*अस्थमा और ब्लडप्रेशर कंट्रोल करता है गुड़ : गुड़ और काले तिल के लड्डू खाने से सर्दी में अस्थमा परेशान नहीं करता है। रोजाना गुड़ का सेवन हाइब्लडप्रेशर को कंट्रोल करता है। जिन लोगों को खून की कमी हो उन्हें रोज थोड़ी मात्रा में गुड़ जरूर खाना चाहिए। इससे शरीर में हीमॉग्लोबिन का स्तर बढ़ता है।
* दिल की बीमारी से परेशान लोगों के लिएये लाभदायक साबित होता है।
*प्रेगनेंसी में एनीमिया नहीं होता
*प्रेगनेंट महिलाओं को रोजाना गुड़ खाने की सलाह दी जाती है, जिससे उन्‍हें एनीमिया ना हो। एनीमिया होने पर महिलाएं जल्‍दी थक जाती हैं और उन्‍हें कमजोरी आने लगती है।
स्मरण शक्ति बढ़ाता है गुड़ : गुड़ का हलवा खाने से स्मरण शक्ति बढ़ती है। शरीर से जहरीले तत्वों को बाहर निकालता है व सर्दियों में यह शरीर के तापमान को नियमित करने में मदद करता है। यह लड़कियों के मासिक धर्म को नियमित करने में मददगार होता है।
 *थकान मिटाने के लिए गुड़ का शर्बत पीएं।
*थकान दूर करता है गुड़ : यह सेलेनियम के साथ एक ऐंटिऑक्सिडेंट के रूप में कार्य करता है। गुड़ में मध्यम मात्रा में कैल्शियम, फॉस्फोरस व जस्ता पाया जाता है यही कारण है कि इसका रोजाना सेवन करने वालों की इम्युनिटी पावर बढ़ता है। गुड़ में मैग्निशियम अधिक मात्रा में पाया जाता है इसलिए ये बॉडी को रिचार्ज करता है साथ ही इसे खाने से थकान भी दूर होती है।
*अगर आपके कान में दर्द रहता है, तो घी में गुड़ मिलाकर खाएं।

Tuesday, October 4, 2016

बच्चों के लिए घरेलू उपचार दस्त, उल्टी, खांसी-सर्दी के लिए Home remedies for children diarrhea, vomiting, cough-cold


बच्चों के लिए
 घरेलू उपचार
 दस्त, उल्टी, खांसी-सर्दी के लिए  


छोटे बच्चों  अगर दस्त ,उल्टी,सर्दी खांसी  की समस्या  हो तो  निम्न आयुर्वेदिक नुस्खा  उपयोग करने से  बहुत अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं-
  इसे बाल चतुरभद्र  कूर्ण के नाम से जाना जाता है| बाजार मे आयुर्वेदिक औषधि विक्रेताओं से  ले सकते हैं और यदि घर पर ही इस औषधि का निर्माण करना चाहें तो पूरा नुस्खा नीचे लिख देता हूँ -
  इसके लिए चार जड़ी बूटियों की जरूरत होती है-
1 मोथा
2॰ ककड़ासिंघी
३ .अतीस
४. छोटी पीपल
सभी को कूट पीसकर  कपड़छन कर चूर्ण बनाकर डिब्बे मे भरकर रखें|
यह औषधि  बच्चोइन के निम्न रोगों मे सफलता से व्यवहार की जा सकती है
*बच्चों के दस्त मे
*उल्टी होने पर
*खांसी सर्दी होने पर


* बुखार होने पर
*पेट दर्द और पेट फूलने पर
मात्रा और सेवन विधि :
छ; मास से कम आयु के बछों को  १२५ मिलीग्राम  याने एक मसूर के दाने के बराबर  शहद मे मिलाकर चटाना चाहिए |
छ; महीने से एक साल तक के बच्चों को  २५० मिलीग्राम  खुराक होगी | बच्चों के वजन के अनुसार यह मात्रा कुछ कम - ज्यादा हो सकती है|
ऐसे भी अगर बच्चों को इसकी एक खुराक रोजाना दी जावे तो  रोग प्रतिरोधक  क्षमता बढती है |
इस चूर्ण को आपा चाहें तो निम्न विधि से सिरप भी बना सकते हैं
  १० ग्राम चूर्ण  को १००मिली पानी मे  इतना उबालें की एक चौथाई  भाग शेष रह जाये|  आंच से उतारलें| ठंडा होने पर इसमे २५ ग्राम शहद मिश्रित करें| औषधि तैयार है| इसे आप बालकों को ड्रापर  से १०-१५ बूंद  की खुराक दे सकते हैं| बेहद उपयोगी औषधि है|