Monday, February 29, 2016

पपीता खाने के फायदे :Benefits of papaya





पपीता को गुणों की खान कहा गया है। यह आपके पेट का भी खयाल रखता है और त्वचा की खूबसूरती का भी। यह कई बीमारियों से दूर रखता है और इसका स्वाद भी बेजोड़ है। पपीता को गुणों की खान कहा गया है। यह आपके पेट का भी खयाल रखता है और त्वचा की खूबसूरती का भी। यह कई बीमारियों से दूर रखता है और इसका स्वाद भी बेजोड़ है।पपीता को गुणों की खान कहा गया है। यह आपके पेट का भी खयाल रखता है और त्वचा की खूबसूरती का भी। यह कई बीमारियों से दूर रखता है और इसका स्वाद भी बेजोड़ है।यह एक ऐसा फल है जो आपको कहीं भी आसानी से मिल जाएगा. अगर आपके घर के सामने कुछ जमीन है तो आप इसका पेड़ भी लगा सकते हैं. ये एक ऐसा फल है जिसे कच्चा होने पर भी इस्तेमाल में लाया जा सकता है| पपीता खाने के फायदे  उल्लेख करता हूँ- 




1) पपीता कफ के साथ आने वाले खून को रोकता है और खूनी बवासीर को भी ठीक करता है। हृदय रोगियों के लिए भी पपीता काफी लाभदाक होता है। पपीते के दस बीज पानी में पीस कर चौथाई कप पानी में मिला कर पीने से पेट के कीड़े मर जाते हैं। इसका एक हफ्ते तक नियमित रूप से प्रयोग करना चाहिए। बच्चा मां के दूध पर निर्भर रहता है, लेकिन कई बार ऐसा देखने में आता है कि मां को पर्याप्त दूध नहीं होता, जिससे बच्चा भूखा रह जाता है। कच्चे पपीते की सब्जी खाने से मां के दूध में वृद्धि होती है।
2)  कोलेस्ट्रॉल कम करन में सहायक-
पपीते में उच्च मात्रा में फाइबर मौजूद होता है. साथ ही ये विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स से भी भरपूर होता है. अपने इन्हीं गुणों के चलते ये कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में काफी असरदार है.
3) पपीते को पेट के लिए तो वरदान माना गया है। इसमें पेप्सिन नामक तत्व पाया जाता है, जो भोजन को पचाने में मदद करता है। पपीता का सेवन रोज करने से पाचन शक्ति में वृद्धि होती है। पका पपीता पाचन शक्ति को बढ़ाता है, भूख को बढ़ाता है, मोटापे को नियंत्रित करता है और अगर आपको खट्टी डकारें आती हैं तो पपीते का रस उसे भी बंद कर देगा। पके या कच्चे पपीते की सब्जी बना कर खाना पेट के लिए लाभकारी होता है।
4) पपीते का रस अरुचि, अनिद्रा, सिरदर्द, कब्ज व आंव-दस्त आदि रोगों को ठीक करता है। आपको भूख नहीं लगती या पेशाब ठीक से नहीं होता तो सुबह में नियमित रूप से पके पपीते का सेवन करें। इससे भूख भी लगने लगेगी और पेशाब से संबंधित समस्या भी दूर हो जाएगी। पपीते के रस के सेवन से खट्टी डकारें बंद हो जाती है। यह हृदय रोग, आंतों की कमजोरी आदि को भी दूर करता है।
5) वजन घटाने में-
एक मध्यम आकार के पपीते में 120 कैलोरी होती है. ऐसे में अगर आप वजन घटाने की बात सोच रहे हैं तो अपनी डाइट में पपीते को जरूर शामिल करें. इसमें मौजूद फाइबर्स वजन घटाने में मददगार होते हैं |.
6)  रोग प्रतिरक्षा क्षमता बढ़ाने में-
रोग प्रतिरक्षा क्षमता अच्छी हो तो बीमारियां दूर रहती हैं. पपीता आपके शरीर के लिए आवश्यक विटामिन सी की मांग को पूरा करता है. ऐसे में अगर आप हर रोज कुछ मात्रा में पपीता खाते हैं तो आपके बीमार होने की आशंका कम हो जाएगी|
 7) कच्चे पपीते का दूध त्वचा रोग के लिए काफी फायदेमंद साबित होता है। पपीते का प्रयोग लोग फेस पैक में भी करते हैं। त्वचा को ठंडक पहुंचाने वाला पपीता आंखों के नीचे के काले घेरे को दूर करता है। अगर आप कील-मुंहासों से परेशान हैं तो कच्चे पपीते के गूदे को शहद में मिलाकर चेहरे पर लगाएं और जब वह सूख जाए तो गुनगुने पानी से चेहरा धो लें। उसके बाद मूंगफली के तेल से हल्के हाथ से चेहरे पर मालिश करें। एक महीने तक नियमित रूप से ऐसा करने से आपको काफी लाभ होगा।
8) आंखों की रोशनी बढ़ाने में-
पपीते में विटामिन सी तो भरपूर होता ही है साथ ही विटामिन ए भी पर्याप्त मात्रा में होता है. विटामिन ए आंखों की रोशनी बढ़ाने के साथ ही बढ़ती उम्र से जुड़ी कई समस्याओं के समाधान में भी कारगर है.|


9) पपीते के पत्तों के उपयोग से उच्च रक्तचाप में लाभ होता है और हृदय की धड़कन ठीक रहती है। यह पौरुष को बढ़ाता है, पागलपन को दूर करता है एवं वात दोषों को नष्ट करता है। अगर आप पपीता खाते रहते हैं तो आपको किसी कारण से होने वाला जख्म भी जल्द भरता है।
10) पाचन तंत्र को सक्रिय रखने में-
पपीते के सेवन से पाचन तंत्र भी सक्रिय रहता है. पपीते में कई पाचक एंजाइम्स होते हैं. साथ ही इसमें कई डाइट्री फाइबर्स भी होते हैं जिसकी वजह से पाचन क्रिया सही रहती है.
11) पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द में
जिन महिलाओं को पीरियड्स के दौरान दर्द की शिकायत होती है उन्हें पपीते का सेवन करना चाहिए. पपीते के सेवन से एक ओर जहां पीरियड साइकिल नियमित रहता है वहीं दर्द में भी आराम मिलता है.

Friday, February 26, 2016

गुड खाने के फायदे : Benefits of eating molasses






गुड़ में हैं औषधीय गुण - गुड़ का सेवन ज्यादातर लोग ठंड में ही करते हैं, वह भी थोड़ी मात्रा में इस सोच के साथ की ज्यादा गुड़ खाने से नुकसान होता है। इसकी प्रवृत्ति गर्म होती है, लेकिन ये एक गलतफहमी है। गुड़ हर मौसम में खाया जा सकता है और पुराना गुड़ हमेशा औषधि के रूप में काम करता है। आयुर्वेद संहिता के अनुसार यह शीघ्र पचने वाला, खून बढ़ाने वाला व भूख बढ़ाने वाला होता है। इसके अतिरिक्त गुड़ से बनी चीजों के खाने से बीमारियों में राहत मिलती है।उल्लेख करते हैं गुड के स्वास्थ्य लाभ -
तुरंत ऊर्जा के लिए-
बहुत अधिक थकान या कमजोरी महसूस करने पर गुड़ का सेवन तुरंत ऊर्जा देता है। चूंकि यह बहुत जल्दी पच जाता है इसलिए इससे ब्लड में शुगर का स्तर भी तुरंत नहीं बढ़ता है।




एसिडिटी में सहायक गुड़ - अगर आप गैस या एसिडिटी से परेशान हैं तो खाने के बाद थोड़ा गुड़ जरूर खाएं ऐसा करने से ये दोनों ही समस्याएं नहीं होती हैं। गुड़, सेंधा नमक, काला नमक मिलाकर चाटने से खट्टी डकारें आना बंद हो जाती हैं।
दमा का उपचार-
गुड़ शरीर के ताप पर नियंत्रण करता है और इसमें एंटी एलर्जिक तत्व हैं इसलिए दमा के मरीजों के लिए इसका सेवन काफी फायदेमंद है।

कान दर्द की समस्या दूर करता है गुड़ - ठंड में कई लोगों को कान के दर्द की समस्या होने लगती है। ऐसे में कान में सरसों का तेल डालने से व गुड़ और घी मिलाकर खाने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

स्मरण शक्ति बढ़ाता है - गुड़ का हलवा खाने से स्मरण शक्ति बढ़ती है। शरीर से जहरीले तत्वों को बाहर निकालता है व सर्दियों में यह शरीर के तापमान को नियमित करने में मदद करता है। यह लड़कियों के मासिक धर्म को नियमित करने में मददगार होता है।
*गुड़ खाने से याद्दाश्त कमजोर नहीं होती, इसलिए अगर आप अपनी याद्दाश्त दुरुस्त रखना चाहते हैं,तो इसका नियमित सेवन करें।
जोड़ों के दर्द में आराम-



रोज गुड का एक टुकडा अदरक के साथ सेवन करने से , सर्दियों में जोड़ों के दर्द मे  फायदा पहुंचाता  है|
थकान दूर करता है गुड़ - यह सेलेनियम के साथ एक ऐंटिऑक्सिडेंट के रूप में कार्य करता है। गुड़ में मध्यम मात्रा में कैल्शियम, फॉस्फोरस व जस्ता पाया जाता है यही कारण है कि इसका रोजाना सेवन करने वालों की इम्युनिटी पावर बढ़ता है। गुड़ में मैग्निशियम अधिक मात्रा में पाया जाता है इसलिए ये बॉडी को रिचार्ज करता है साथ ही इसे खाने से थकान भी दूर होती है।
पीरियड्स का दर्द-
जिन महिलाओं को पीरियड्स के दौरान अधिक दर्द होता है उनके लिए गुड़ का सेवन काफी फायदेमंद है। चूंकि यह पाचन ठीक रखता है इसलिए पीरियड्स के दर्द से आराम में यह फायदेमंद है।

त्वचा के लिए फायदेमंद-
गुड़ रक्त से टॉक्सिन दूर करता है जिससे त्वचा दमकती है और मुहांसे की समस्या नहीं होती है।




जुकाम और कफ
गुड़ की तासीर गर्म है इसलिए इसका सेवन जुकाम और कफ से आराम दिलाता है। जुकाम के दौरान अगर आप कच्चा गुण नहीं खाना चाहते हैं तो चाय या लड्डू में भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

*दिल की बीमारी से परेशान लोगों के लिएये लाभदायक साबित होता है।

*गुड़ खाने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।

*इसे खाने से बैठे हुए गले को ठीक किया जा सकता है।

*गुड़ से बनी चाय सेहत के लिए अच्छी मानी जाती है, इसलिए चाय में चीनी की जगह गुड़ डालें।

*गुड़ जितना पुराना होता है, उतना लाभदायक साबित होता है। इसलिए गुड़ के पुराना होने पर उसे फेंके नहीं।

Monday, February 22, 2016

गाय के घी के फायदे : Benefits of Cow Ghee





आयुर्वेद में गाय के घी को अमृत समान बताया गया है। हमारे घरों में बहुत से ऐसे लोग हैं जो  वीक्यूजेक्यूएन को नियक़्न्तृत रखने के प्रति सतर्कता  बरतते हैं और  घी को हाथ तक नहीं लगाते। पर अगर गाय के घी को नियमित रूप से अपने भोजन में शामिल किया जाए तो इससे वजन भी नियंत्रित रहता है और किसी भी प्रकार की बीमारी भी नहीं लगती। देशी घी का मतलब है गाय के दूध से बना शुद्ध घी, जो कि एक प्रकार की दवा भी माना जाता है। गाय के घी के  लाभ  उल्लेख करता हूँ -

 बच्चे के जन्म के बाद वात बढ़ जाता है जो घी के सेवन से निकल जाता है। अगर ये नहीं निकला तो मोटापा बढ़ जाता है।
कब्ज मिटाये -
कब्ज को हटाने के लिए भी घी मददगार है।



पित्त की समस्या - 
गर्मियों में जब पित्त बढ़ जाता है तो घी उसे शांत करता है।
इसमें ढेर सारा एंटीऑक्‍सीडेंट पाया जाता है जो कि फ्री रेडिकल्स से लड़ता है और चेहरे की चमक बरकरार रखता है।
*आंखों की ज्‍योति बढ़ाने हेतु 1 चम्मच शुद्ध घी, 1 चम्मच पिसी शकर, 1 चम्मच पिसी कालीमिर्च तीनों को मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय चाटकर गर्म दूध पीने से आँखों की ज्योति बढ़ती है।
मोटापा कम करे देशी घी खाने से मोटापा कम होता है।

*माइग्रेन में आमतौर पर सिर के आधे हिस्से में दर्द होता है और सिरदर्द के वक्त मितली या उलटी भी आ सकती है। इस समस्या  से बचने के लिए गाय का घी आपकी मदद कर सकता है। दो बूंद गाय का देसी घी नाक में सुबह शाम डालने से माइग्रेन दर्द ठीक होता है। साथ ही गाय के घी नाक में डालने से एलर्जी खत्म होती है, नाक की खुश्की दूर होती है और दिमाग तरोताजा हो जाता है।




*फफोलों पर देसी घी लगाने से आराम मिलता है। नाक में घी डालने से खुश्की दूर होती है और दिमाग तरोताजा रहता है। इस घी की छाती पर मालिश करने से बच्चों को जुकाम में लाभ होता है और कफ बाहर निकलता है।

*अगर ज्यादा कमजोरी लगे तो एक गिलास दूध में एक चम्मच गाय का घी और मिश्री मिलाकर पिएं। गाय के घी का नियमित प्रयोग करने से एसिडिटी व कब्ज की शिकायत कम हो जाती है। इस घी के प्रयोग से मांसपेशियां व हड्डियां मजबूत होती हैं।

*गाय के घी पर हुए शोध के अनुसार, इससे रक्त और आंतों में मौजूद कोलेस्ट्रॉल कम होता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि घी से बाइलरी लिपिड का स्राव बढ़ जाता है। देशी घी शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल के लेवल को सही रखता है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करता है।

*गाय के घी का स्मोकिंग पॉइंट दूसरे फैट की तुलना में बहुत अधिक है। यही कारण है कि पकाते समय आसानी से नहीं जलता। घी में स्थिर सेचुरेटेड बॉण्ड्स बहुत अधिक होते हैं, जिससे फ्री रेडिकल्स निकलने की आशंका बहुत कम होती है। घी की छोटी फैटी एसिड की चेन को शरीर बहुत जल्दी पचा लेता है। जिससे आपकी पाचन शक्ति बढ़िया  रहती है।

*अब तक तो यही समझा जाता था कि देशी घी ही रोगों की सबसे बड़ी जड़ है? लेकिन यह सच नहीं है क्योंकि गाय का घी दिल समेत कई बीमारियों को दूर करने में सहायक होता है। दिल की नलियों में ब्लॉकेज होने पर गाय का घी एक ल्यूब्रिकेंट की तरह काम करता है। जिस व्यक्ति को हार्ट अटैक की तकलीफ है और चिकनाई खाने की मनाही है, वह गाय का घी खाएं, इससे दिल मजबूत होता है।   

*गाय के घी में बहुत अधिक मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है, जो फ्री रेडिकल्स से लड़ता है और चेहरे की चमक बरकरार रखता है। साथ ही यह त्‍वचा को मुलायम और नमी प्रदान करता है और त्‍वचा को नॉरिश करने के साथ-साथ ड्रायनेस को भी कम करता है और त्वचा की कांति बढ़ाता है। आप देशी घी से रोज चेहरे की मसाज कर सकते हैं।




*देशी घी शरीर में जमा फैट को गला कर विटामिन में बदलने का काम करता है। इसमें चेन फैट एसिड कम मात्रा में होता है, जिससे आपका खाना जल्दी डाइजेस्ट होता है और मेटाबॉल्जिम सही रहता है। इसके अलावा खाने में देशी घी मिलाकर खाने से खाना जल्दी डाइजेस्ट होता है। यह मेटाबॉल्जिम प्रक्रिया को बढ़ाता है।

*देशी घी में विटामिन के2 पाया जाता है, जो ब्लड सेल में जमा कैल्शियम को हटाने का काम करता है। इससे ब्लड सर्कुलेशन सही रहता है। देसी घी इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में मदद करता है, जिससे इन्फेक्शन से और बीमारियों से लडऩे की ताकत मिलती है।
*अगर आपकी आंखों के नीचे काले घेरे हो गए तो हर रात सोने से पहले घी की कुछ बूंदों को प्रभावित जगह पर हल्के हाथ से लगाएं. घी को अच्छी तरह लगाकर सो जाइए. सुबह उठकर ठंडे पानी से मुंह साफ कर लें.
* अगर आपके पास मेक अप-रिमूवर नहीं है तो आप घी से भी मेकअप साफ कर सकती हैं. खासतौर पर आंखों के मेकअप के लिए आप घी का इस्तेमाल कर सकती हैं.
*अगर आपके बाल बहुत रूखे हो गए हैं तो भी आप घी का इस्तेमाल कर सकती हैं. ये त्वचा को मॉइश्चर करने के साथ ही बालों में भी कुदरती नमी बनाए रखता है.
* दो मुंहे बालों के लिए भी घी काफी फायदेमंद है. बाल के अंतिम छोर पर अच्छी तरह से घी लगा लें. इसे एक से दो घंटे तक लगा रहने दें और बाद में धो दें.
* घी को चेहरे पर लगाने से फेशियल सा ग्लो आता है. हर रोज नहाने से पहले दो बूंद घी को अपने चेहरे पर अच्छी तरह से मल लें. कुछ दिन में ही आपको असर नजर आने लगेगा.
*अगर लिप बाम लगाने के बावजूद आपके होंठ फटे ही हैं तो एक बार  इस्तेमाल करके देखें घी का. सोने से पहले हर रात अपने होठों पर घी की एक से दो बूंद को अच्छी तरह से लगा लें. ऐसा करने से आपके होंठ फटेंगे नहीं और उनका मॉइश्चर भी बना रहेगा.

Friday, February 19, 2016

अंकुरित अन्न खाने के लाभ Benefits of Sprouts






अंकुरित अनाज में मौजूद पौषक तत्व  हमारी सेहत के लिए कई तरह से फायदेमंद हैं। इसमें फाइबर बहुत अधिक होता है। इसलिए इन्हें खाने से पेट जल्दी भर जाता है और भरपूर एनर्जी मिलती है। स्प्राउट्स को नियमित  भोजन  में शामिल करने पर इससे होने वाले फायदों  का उल्लेख  करते हैं -


बीमारियां से रहेंगे दूर-
इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम जैसे तत्वों की भरपूर मात्रा होती है, जो शरीर को मजबूत बनाते है। रोज स्प्राउट्स खाने से कई बीमारियों का खतरा टलता है।

त्वचा मे चमक आती है-
स्प्राउट्स में एंटी-ऑक्सीडेंट्स भी पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। इन्हें खाने से झुर्रिया दूर रहती हैं और स्किन ग्लो करती है। ये शाकाहारी  डाइट का एक बेहतर विकल्प  माने जाते हैं।
आंख और बाल को बनाता है खूबसूरत-
अंकुरिय अन्न  से शरीर में प्रोटीन की कमी दूर हो जाती है। इससे मसल्स, आंख और बाल पर अच्छा असर पड़ता है। इम्यून सिस्टम भी मजबूत  बनता  है।
अंकुरित अन्न  से वजन कम होता है-
अंकुरित अन्न  में फाइबर की काफी मात्रा होती है। इससे शरीर  को सही मात्रा में एनर्जी मिलती है। यह वजन कम करने में सहायक होता है।


  सुधरता है डाइजेशन-
स्प्राउट में मौजूद फाइबर बॉडी के फंक्शन को ठीक करता है। इन्हे खाने से डाइजेशन सिस्टम सुधरता है और कब्ज से राहत मिलती है।
हड्डियां होती हैं मजबूत-
स्प्राउट्स में मौजूद पौषक कैल्शियम की मात्रा बढ़ाने का काम करते हैं। रोज कटोरी स्प्राउट्स खाने से हड्डियां मजबूत होती हैं।
शरीर को करता है विजातीय द्रव्यों से मुक्त- 
रोज खाने से शरीर में मौजूद हानिकारक एसिड्स आसानी से बाहर निकलते हैं। यह शरीर  को नेचुरल डिटॉक्स करता है और कई बीमारियों से बचाता है।
स्प्राउट्स से मिलती है एनर्जी-
स्प्राउट्स में विटामिन A, C, B-6 और K भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। साथ ही इसमें पर्याप्त मैग्नीशियम, फास्फोरस, कैल्शियम और पोटैशियम भी मौजूद होते हैं। ये न्यूट्रीएंस शरीर को पर्याप्त एनर्जी देते हैं।


Saturday, February 13, 2016

योग भगाये रोग : Benefits of yoga





1) योग से ब्लड शुगर का लेवल घटता है और ये LDL या बैड कोलेस्ट्रोल को भी कम करता है। डायबिटीज रोगियों के लिए योग बेहद फायदेमंद है। 
2) ध्यान के लाभ – ध्यान भी योग का अतिमहत्वपूर्ण अंग है | आजकल ध्यान यानि मेडिटेशन का प्रचार हमारे देश से भी ज्यादा विदेशों में हो रहा है आज की भौतिकता वादी संस्कृति में दिन रात भाग दौड़, काम का दबाव, रिश्तो में अविश्वास आदि के कारण तनाव बहुत बढ़ गया है | ऐसी स्तिथि में मेडिटेशन से बेहतर और कुछ नहीं है ध्यान से मानसिक तनाव दूर होकर गहन आत्मिक शांति महसूस होती है, कार्य शक्ति बढती है ,नींद अच्छी आती है | मन की एकाग्रता एवं धारणा शक्ति बढती है |
3) जहाँ जिम आदि से शरीर के किसी खास अंग का ही व्यायाम होता है वहीँ योग से शरीर के समस्त अंग प्रत्यंगों,ग्रंथियों का व्यायाम होता है जिससे अंग प्रत्यंग सुचारू रूप से कार्य करने लगते हैं |




4)  योगाभ्यास से रोगों से लड़ने की शक्ति बढती है | बुढ़ापे में भी जवान बने रह सकते हैं त्वचा पर चमक आती है शरीर स्वस्थ,निरोग और बलवान बनता है |
5)  जहाँ एक तरफ योगासन मांस पेशियों को पुष्टता प्रदान करते हैं जिससे दुबला पतला व्यक्ति भी ताकतवर और बलवान बन जाता है वहीँ दूसरी ओर योग के नित्य अभ्यास से शरीर से  वसा  कम भी हो जाता है इस तरह योग पतले  और मोटे दोनों के लिए फायदेमंद है 
|6)  अनुसंधान  में पाया गया है कि कुछ योगासनो और मैडिटेशन के द्वारा आर्थराइटिस, बैक पेन आदि दर्द में काफी सुधार होता है और दवा की ज़रुरत कम होती जाती है।



7)  योग शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ता है और दवाओं पर आपकी निर्भरता को घटता है।  अनुसंधानो  में साबित हो चुका है कि अस्थमा , हाई ब्लड प्रेशर , टाइप २ डायबिटीज के मरीज योग द्वारा पूर्ण रूप से स्वस्थ चुके  हैं।
8)  योग का प्रयोग शारीरिक , मानसिक और आध्यत्मिक लाभों के लिए हमेशा से होता रहा है l आज की चिकित्सा शोधों ने ये साबित कर दिया है की योग शारीरिक और मानसिक रूप से मानव जाति के लिए वरदान है |
9)  योगासनों के नित्य अभ्यास से मांसपेशियों का अच्छा व्यायाम होता है | जिससे तनाव दूर होकर अच्छी नींद आती है, भूख अच्छी लगती है, पाचन सही रहता है|
10)  प्राणायाम के लाभ – योग के अंग प्राणायाम एवं ध्यान भी योगासनों की तरह शरीर के लिए बहुत फायदेमंद हैं, प्राणायाम के द्वारा श्वास प्रश्वास की गति पर नियंत्रण होता है जिससे श्वसन संस्थान सम्बन्धित रोगों में बहुत फायदा मिलता है | दमा, एलर्जी, साइनोसाइटिस,पुराना नजला, जुकाम आदि रोगों में तो प्राणायाम बहुत फायदेमंद है ही साथ ही इससे फेफड़ों की ऑक्सीजन ग्रहण करने की क्षमता बढ़ जाती है जिससे शरीर की कोशिकाओं को ज्यादा ऑक्सीजन मिलने लगती है जिसका पूरे शरीर पर सकारात्मक असर पड़ता है |








Tuesday, February 9, 2016

चौलाई साग के औषधीय गुण Benefits of Amaranth



     हरे पत्ते की सब्जी स्वास्थ्य के लिये बहुत ही लाभ कारी होती हैं। चौलाई को मालवा मे खाटी भाजी के नाम से जानते हैं| इन हरे पत्ते की सब्जियों को यदि रोजाना के खाने के साथ प्रयोग किया जाय तो शरीर में होने वाले विटामिन्स की कमी को काफी हद तक पूरा किया जा सकता है।
   चौलाई दो तरह की होती है- एक सामान्य पत्तों वाली तथा दूसरी लाल पत्तों वाली। कटेली चौलाई तिनछठ के व्रत में खोजी जाती है। भादौ की कृष्ण पक्ष की षष्ठी को यह व्रत होता है। चौलाई को खाने से आंतरिक रक्तस्राव बंद हो जाता है। यह सब्जी खूनी बवासीर, चर्मरोग, गर्भ गिरना, पथरी रोग और पेशाब में जलन जैसे रोग में बहुत ही लाभदायक सि‍द्ध हुई है।
यह कफ और पित्त का नाश करती है जिससे रक्त विकार दूर होते हैं। पेट और कब्ज के लिए चौलाई का साग बहुत उत्तम माना जाता है। चौलाई की सब्जी का नियमित सेवन करने से वात, रक्त व त्वचा विकार दूर होते हैं। सबसे बडा गुण सभी प्रकार के विषों का निवारण करना है, इसलिए इसे विषघ्न भी कहा गया है| इसके डंठल और पत्तों में पौष्टिक तत्वों की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। पेट और कब्ज के लिए चौलाई बहुत उत्तम मानी जाती है
इसे हम अनेकों प्रकार से बनाते हैं जैसे चौलाई के पत्तों में दाल मिला कर साग बनाते हैं, चौलाई को आलू के साथ मिला कर चौलाई आलू भुजिया बनाते हैं, चौलाई को बैंगन में मिला कर चौलाई बैंगन भाजी बनाते हैं ।
आप अपने स्वाद के हिसाब से इसे अन्य मनचाही सब्जियों में मिलाकर बना सकते हैं. चौलाई के पत्ते को मूंग के दाल के साथ मिला कर बहुत ही स्वादिष्ट सब्जी बनायी जाती है। कुछ घरों में मूंग दाल की जगह तुअर अथवा उड़द दाल को मिलाकर भी बनाते हैं।
कुल मिलाकर चौलाई एक स्वादिष्ट सब्जी भी है और महत्वपूर्ण दवा भी।
चौलाई की औषधीय उपयोगिता-
* औषधि के रूप में चौलाई के पंचाग यानि पांचों अंग जड़, डंठल, पत्ते, फल और फूल काम में लाये जाते हैं। इसकी डंडियों और पत्तियों में प्रोटीन, खनिज, विटामिन ए, सी प्रचुर मात्रा में है। इसका सेवन सब्जी या सूप के रूप में होता है। चौलाई पेट के रोगों के लिए गुणकारी है। इसमें रेशे, क्षार द्रव्य होते हैं, जो आंतों में चिपके हुए मल को निकालकर उसे बाहर धकेलने में मदद करते हैं। इससे पेट साफ होता है और कब्ज दूर होता है। पाचन संस्थान को ताकत मिलती है। छोटे बच्चों को यदि इसका दो-तीन चम्मच रस दिया जाय, तो कब्ज दूर करता है।
*दूध पिलाने वाली माताओं के लिए यह उपयोगी है अगर उन्हें दूध कम उतरता है, तो चौलाई के साग का सेवन करें।3) चौलाई की जड़ को पीसकर चावल के माड (पसावन) में डालकर, शहद मिलाकर पीने से प्रदर रोग ठीक होता है। जिन स्त्रियों को बार-बार गर्भपात होता है। उनके लिए चौलाई साग का सेवन लाभकारी है।
*चूहे, बिच्छू, संखिया किसी का भी विष चढ़ गया हो, तो चौलाई का रस या जड़ का क्वाथ में काली मिर्च डालकर पीने से विष दूर हो जाता है।
* ये सिद्ध हो चुका है कि धूम्रपान, शराब सेवन करने वाली महिलाएं मंदबुद्धि तथा कम वजन वाले बच्चे को जन्म देती हैं। ऐसी महिलाओं को चौलाई साग का लगातार सेवन करना चाहिये। शराब सेवन व धूम्रपान छूट जायेगा।

*कहा गया है कि किसी भी तरह के चर्म रोग में इसके पत्ते पीस कर लेप कर 21 दिनों तक लगातार लेप करने से वह ठीक हो जाता है। शरीर में अगर कही भी खून बह रहा है और बंद नहीं हो रहा लाल पत्ते वाली चौलाई की जड़ को पानी में पीस कर पी लेने से ही रुक जाता है। एक बार पीने से नहीं रुक रहा तो बारह घंटे बाद दुबारा पीने को कहा गया है। चाहे गर्भाशय से खून बह रहा हो या मल द्वार से या बलगम के साथ यह सब में उपयोगी बताई गई है। मान्यता है कि गर्भवती को खून दिखाई दे जाए तो फ़ौरन पी ले, गिरता हुआ गर्भ रुक जायेगा। जिनको गर्भ गिरने की बीमारी हो उन महिलाओं के लिये मासिक धर्म के समय में रोज जड़ पीस कर चावलों के पानी के साथ पीने का उल्लेख मिलता है।



शरीर में रक्त की कमी दूर करें :
औषधि के रूप में चौलाई की जड़, पत्ते और बीज सभी काम में लाये जाते है। इसकी पत्तियों और बीजों में प्रोटीन, विटामिन ए और सी प्रचुर मात्रा में होता है। ऐमरैन्थ यानि चौलाई का साग एनिमिया रोग से लड़ने का सबसे कारगर उपाय है। इसके सेवन से शरीर में रक्त की कमी दूर होती है। शरीर में खून की कमी को दूर करने के लिए इसका सेवन सब्जी या सूप के रूप में करें।
सूजन को कम करें :
ऐमरैन्थ यानि चौलाई के तेल और पेप्टाइड में एंटी-इफ्लेमेंटरी गुण होता है जो दर्द और सूजन को सहजता से कम करने में मदद करता है। यह पुरानी स्थितियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है जहां पर सूजन स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।
रक्तचाप कम करें :
अध्ययन के अनुसार, ऐमरैन्थ में मौजूद फाइबर और फिटोन्यूट्रीएंट्स नामक तत्व रक्तचाप को कम करने में मदद करते है। जिससे यह कोलेस्ट्रॉल, सूजन और रक्तचाप के साथ प्रभावी ढ़ंग से लड़ता है और दिल की सेहत के लिए भी अच्छा होता है।
पेशाब में जलन :
पेशाब में होने वाली जलन को शांत करने के लिए चौलाई के रस का कुछ दिनों तक सेवन करने से मूत्रवृध्दि होती है और जलन ठीक होती है।
फोड़े-फुंसी :
फोड़े-फुंसी पर चौलाई के पत्तों की पुल्टिस बना कर लगाने से फोड़ा जल्द पक कर फूट जाता है। सूजन होने पर उस स्थान पर इसका लेप करने से सूजन दूर होती है
स्तनों का आकार बढ़ने के लिए :
नारियों को अपने स्तनों का आकार बढ़ाना हो तो अरहर की दाल के साथ चौलाई का साग पका कर चालीस दिनों तक लगातार खाइये,जड़ काटकर फेकना नहीं है वह भी पका देनी है।
खूनी बवासीर :
खूनी बवासीर हो या मूत्र में खून आता हो ,चौलाई के पत्ते पीस कर मिश्री मिलाकर शरबत बनाकर ३ दिन लगातार पीजिये।
वजन करने में मददगार :
जैसा की हम जानते हैं कि प्रोटीन रक्त में इंसुलिन के स्तर को कम कर और हार्मोंन की विज्ञप्ति कर आपकी भूख को दबा देता है जिससे की आप भूख को कम महसूस करते हो। आपको यह जानकर खुशी होगी कि लगभग 15 प्रतिशत चौलाई में प्रोटीन होता है जो आपके वजन घटाने के कार्यक्रम में सहायता कर सकता हैं।
पथरी :
पथरी में चौलाई का साग चालीस दिनों तक प्रतिदिन खाने पर पथरी गल जाती है
कैंसर की रोकथाम :
ऐमरैन्थ में मौजूद पेप्टाइड्स श्ारीर में सूजन को दूर करने के साथ कैंसर के विकास को रोकने में भी बहुत मददगार होता है। इसमें मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त होने से बचाता है जिससे कैंसर को रोकने में मदद मिलती है।
प्रतिरक्षा प्रणाली को बढावा :
ऐमरैन्थ का एक और स्वास्थ्य लाभ यह भी है कि मौजूद आवश्यक विटामिन, खनिज और शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को ठीक रखने में मदद करते है। इसलिए अगर आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है तो आपको चौलाई को लेने पर विचार करना चाहिए।

Sunday, February 7, 2016

किशमिश खाने के फायदे Benefits of raisins





अंगूर को एक विशेष प्रक्रिया के तहत सुखाकर किशमिश बनाया जाता है इसलिए इसमें वो सभी गुण पाए जाते हैं जो अंगूर में होते हैं. किशमिश का इस्तेमाल मुख्य रूप से मीठाई, खीर और दूसरी मीठी चीजों को सजाने या स्वाद के लिए किया जाता है. पर एक बेहतरीन स्वाद के अलावा ये सेहत का भी खजाना है.
किशमिश खाना स्वास्थ्य के लिए वरदान है. खासतौर पर सर्दियों में इसके सेवन से कई तरह की बीमारियों से बचाव होता है:




1. किशमिश के सेवन से कब्ज में फायदा होता है. अगर आपको कब्ज की समस्या है तो इसके सेवन से फायदा होगा.
2. अगर आपका वजन बहुत कम है और आप वजन बढ़ाने को लेकर फिक्रमंद हैं तो किशमिश का सेवन आपके लिए फायदेमंद होगा. इसमें पर्याप्त मात्रा में ग्लूकोज और फ्रक्टोज पाया जाता है जिससे ताकत तो मिलती है ही साथ ही इसमें मौजूद तत्व वजन बढ़ाने में सहायक होते हैं.
3. किशमिश में पर्याप्त मात्रा में आयरन पाया जाता है. खून के निर्माण के लिए आवश्यक विटामिन बी कॉम्प्लेक्स की आवश्यकता होती है. किशमिश में पर्याप्त मात्रा में विटामिन बी कॉम्प्लेक्स पाया जाता है. ऐसे में खून की कमी होने पर किशमिश का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है.

4. किशमिश कामेच्छा को प्रोत्साहित करने में भी कारगर है. यौन दुर्बलता को दूर करने के लिए भी किशमिश का सेवन किया जाता है.


5. किशमिश में कुछ ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो हड्डियों को मजबूती देने का काम करते हैं. अगर आपको घुटने में दर्द की शिकायत है तो भी किशमिश का सेवन फायदेमंद होगा.
6. किशमिश में एंटी-ऑक्सीडेंट गुण पाया जाता है जो आंखों की रोशनी के बहुत फायदेमंद होता है.

वजन बढ़ाने में उपयोगी

जो लोग अपना वजन बढ़ाने के बारे में सोच रहे है| उन्हें बतादे की किशमिश उनके लिए बेहद फायदेमंद है|  किशमिश में भरपूर मात्रा में फ्रुक्टोज और ग्लूकोज पाया जाता हैं। जो एनर्जी देने के साथ साथ वजन बढ़ाने में भी मदद करता है। अगर आप सही प्रकार से वजन बढ़ाना चाहते हैं, तो बिना इन्तेजार किये आज से ही किशमिश खाना शुरु कर दें।




एनीमिया-

किशमिश में काफी मात्रा में आयरन होता है जो कि एनीमिया से लड़ने की शक्‍ति रखता है। दरहसल खून को बनाने के लिये विटामिन बी कॉमप्‍लेक्‍स की जरुरत पढ़ती है और किशमिश इस कमी को पूरी करती है। इसके अलावा इसमें मौजूद कॉपर भी खून में लाल रक्‍त कोशिका को बनाने में मदद करता है|

बुखार ठीक करे-

आपने अक्सर देखा होगा की जब किसी को बुखार होता है तो उसे किशमिश खाने की सलाह दी जाती है| दरहसल किशमिश में मौजूद फिनॉलिक पायथोन्‍यूट्रियंट जो कि जर्मीसाइडल, एंटी बॉयटिक और एंटी ऑक्‍सीडेंट तत्‍वों की वजह से जाने जाते हैं, वो वाइरल तथा बैक्‍टीरियल इंफेक्‍शन से लड़ कर बुखार को जल्‍द ठीक कर देते हैं।

पाचन तंत्र सुचारू करे-

रोजाना किशमिश का सेवन करने से आपका हाजमा ठीक रहता है और पाचन तंत्र भी सुचारू रूप से कार्य करता है| किशमिश लैक्सटिव के रूप में कार्य करती है। यह पेट में जाकर पानी को अवशोषित करती है, जिसके फलस्वरूप कब्‍ज से राहत मिलती है| किशमिश में पाये जाने वाले फाइबर गैस्ट्रोइंटेस्टिनल मार्ग से विषाक्त और अपशिष्‍ट पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करते हैं।

आँखों के लिए फायदेमंद-

किशमिश में विटामिन ए, ए-कैरोटीनॉइड और ए-बीटा कैरोटीन मौजूद होता है, जो कि आँखों को फ्री रैडिकल्‍स से लड़ने में मदद करता है। इसमें एंटी ऑक्‍सीडेंट गुण भी पाये जाते है| किशमिश खाने से मोतियाबिंद, उम्र बढने की वजह से आँखों में आने वाली कमजोरी,मसल्स  डैमेज आदि नहीं होता।
  

शराब से छुटकारा

किशमिश की मदद से आप शराब के नशे से छुटकारा पा सकते है| जब भी आपकी शराब पीने की इच्छा हो तब शराब की जगह 10 से 12 ग्राम किशमिश को चबा-चबाकर खाए या किशमिश का शरबत पियें। जहा एक तरफ शराब पीने से ज्ञानतंतु सुस्त हो जाते हैं वही किशमिश के सेवन से शीघ्र ही पोषण मिलता है जिसके चलते मनुष्य उत्साह, शक्ति और प्रसन्नता का अनुभव करने लगता है। यह प्रयोग लगातार करते रहने से कुछ ही दिनों में शराब छूट जायेगी।

कोलेस्ट्रोल घटाए

बहुत कम लोग यह बात जानते है कि किशमिश पूरी तरह से कोलेस्‍ट्रॉल मुक्त होता है। किशमिश में घुलनशील फाइबर बहुत अधिक मात्रा में होता है। यह घुलनशील फाइबर बुरे कोलेस्‍ट्रॉल का विरोध करता है| इसके अलावा किशमिश पोलीफेनोल्स एंजाइम को भी दबाता है जो शरीर में कोलेस्ट्रॉल को अवशोषित के लिए जिम्मेदार होता है।


कैंसररोधी

कैंसर कोशिकाओं के विकास के लिए फ्री रेडिकल्‍स सबसे प्रमुख कारणों में से एक है| इसके अलावा यह मेटास्टेसिस को भी प्रोत्साहित करते हैं। किशमिश में उच्‍च स्‍तर में काट्चिंस तत्‍व होता है यह तत्‍व रक्त में पॉलीफेनोलिक एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। एंटीऑक्‍सीडेंट शरीर के आस-पास रहने वाले फ्री रेडिकल्‍स को शरीर से बाहर निकालता है।

किशमिश के अन्य फायदे -

  1. किशमिश में प्रचुर मात्रा में फाइबर होता हैं जो कब्ज दूर करता हैं।
  2. किशमिश आँखों के लिए भी बेहद फायदेमंद होता हैं।
  3. किशमिश में आयरन पाया जाता हैं जो एनीमिया के उपचार में मदद करता है।


  4. किशमिश कैल्शियम का अच्छा स्रोत हैं जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है|
  5. गठिया और गुर्दे की पथरी की समस्या से निजात दिलाने में भी किशमिश मदद करता है।
  6. किशमिश मुंह में हानिकारक बैक्टीरिया की वृद्धि को रोकता हैं। इससे कैविटी और दाँत क्षय को रोकने में मदद मिलती है|
  7. किशमिश पोटेशियम और मैग्नीशियम का अच्छा स्त्रोत हैं हैं जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने और रक्तचाप कम करने में मदद करता हैं।
  8. इसमें भरपूर मात्रा में फ्रुक्टोज़ और ग्लूकोज पाया जाता हैं जो शरीर में ऊर्जा प्रदान करता हैं और वजन बढ़ाने में भी मदद करता हैं।
  9. किशमिश संक्रमण के खिलाफ शरीर की रक्षा करता है। इसमें मौजूद पॉलीफेनोलिक एंटीऑक्सीडेंट पेट के कैंसर के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है।
  10. किशमिश में औषधीय गुण.
  11. कब्ज- – जब इस को खाया जाता है तो यह पेट में जा कर पानी को सोख लेती हैं। जिस वजह से यह फूल जाती है और कब्‍ज में राहत दिलाती है
  12.  वजन बढाए :- हर मेवे की तरह यह भी वजन बढाने में मददगार साबित होती है क्‍योंकि इसमें फ्रकटोज़ और ग्‍लूकोज़ पाया जाता है जिससे एनर्जी मिलती है। अगर आपको भी अपना वजन बढाना है और वो भी कोलेस्‍ट्रॉल बढाए बिना तो आज से ही इस को खाना शुरु कर दें।
  13. . अम्लरक्तता- जब खून में एसिड बढ जाता है तो यह परेशानी पैदा हो जाती है। इसकी वजह से स्‍किन डिज़ीज, फोडे़, गठिया, गाउट, गुर्दे की पथरी, बाल झड़ने, हृदय रोग, ट्यूमर और यहां तक ​​कि कैंसर होने की संभावना पैदा हो जाती है। किशमिश में अच्‍छी मात्रा में पोटैशियम और मैगनीशियम पाया जाता है
  14.  एनीमिया - इस में भारी मात्रा में आयरन होता है जो कि सीधे एनीमिया से लड़ने की शक्‍ति रखता है। खून को बनाने के लिये विटामिन बी कॉमप्‍लेक्‍स की जरुरत को भी यही किशमिश पूरी करती है। कॉपर भी खून में लाल रक्‍त कोशिका को बनाने का काम करता है।
  15.  बुखार - इस में मौजूद फिनॉलिक पायथोन्‍यूट्रियंट जो कि जर्मीसाइडल, एंटी बॉयटिक और एंटी ऑक्‍सीडेंट तत्‍वों की वजह से जाने जाते हैं, बैक्‍टीरियल इंफेक्‍शन तथा वाइरल से लड़ कर बुखार को जल्‍द ठीक कर देते हैं।


  16.  शराब के नशे से छुटकारा- शराब पीने की इच्छा हो तब शराब की जगह 10 से 12 ग्राम किशमिश चबा-चबाकर खाते रहें या किशमिश का शरबत पियें। शराब पीने से ज्ञानतंतु सुस्त हो जाते हैं परंतु किशमिश के सेवन से शीघ्र ही पोषण मिलने से मनुष्य उत्साह, शक्ति और प्रसन्नता का अनुभव करने लगता है। यह प्रयोग प्रयत्नपूर्वक करते रहने से कुछ ही दिनों में शराब छूट जायेगी।
  17.  यौन दुर्बलता- इस समस्‍या के लिये रोजाना किशमिश खाएं क्‍योंकि यह कामेच्छा को प्रोत्साहित करती है। इसमें मौजूद अमीनो एसिड, यौन दुर्बलता को दूर करता है। इसीलिये तो शादी-शुदा जोडों को पहली रात दूध का गिलास दिया जाता है जिसमें किशमिश और केसर होता है।
  18.  हड्डी की मजबूती- इस में बोरोन नामक माइक्रो न्‍यूट्रियंट पाया जाता है जो कि हड्डी को कैल्‍शियम सोखने में मदद करता है। बोरोन की वजह से ऑस्‍टियोप्रोसिस से बडी़ राहत मिलती है साथ ही किशमिश खाने से घुटनों की भी समस्या  नहीं पैदा होती |
  19. आंखों के लिये -इसमें एंटी ऑक्‍सीडेंट प्रोपर्टी पाई जाती है, जो कि आंखों की फ्री रैडिकल्‍स से लड़ने में मदद करता है। किशमिश खाने से कैटरैक, उम्र बढने की वजह से आंखों की कमजोरी, मसल्‍स डैमेज आदि नहीं होता। इसमें विटामिन ए, ए-बीटा कैरोटीन और ए-कैरोटीनॉइड आदि होता है, जो कि आंखों के लिये अच्‍छा होता है।




  20. किशमिश खाने से छू मंतर हो जाएगा लो ब्लड प्रेशर-आपको अक्सर चक्कर आते हैं, कमजोरी महसूस होती है तो हो सकता है कि आप लो ब्लड प्रेशर के शिकार हों। ज्यादा मानसिक तनाव, कभी क्षमता से ज्यादा शारीरिक काम करने से अक्सर लोगों में लो ब्लडप्रेशर की शिकायत होने लगती है।कुछ लोग इसे नजर अन्दाज कर देते हैं तो कुछ लोग डॉक्टर के यहां चक्कर लगाकर परेशान हो जातें हैं। लेकिन आयुर्वेद में लो ब्ल्डप्रेशर को कन्ट्रोल करने के लिए कारगर इलाज है वो है किशमिश। 

    स्मरण शक्ति और दिमाग को तेज करने वाले योगासन yoga to get sharp mind














    दिनभर की थकान और तनाव के बाद कई बार हम छोटी छोटी चीजें भूल जाते हैं। लेकिन दिन में सिर्फ 10 मिनट योगा करने से इस परेशानी को भी दूर कर सकते हैं और अपनी स्मरण शक्ति तेज कर सकते हैं।


    भूजंगासन यानि पेट के बल सिधाई में लेट कर धीरे धीरे अपने हाथों के बल ऊपर को उठाना और सिर को उठाना जैसे कोबरा बैठा हो। यह मुद्रा न सिर्फ आपको आराम दिलाती है बल्कि दिमाग से जुड़ी नसों को भी संतुलित और प्रेरित करती है।





    हस्तपदोतासन। सीधे खड़े हो कर अपने शरीर को पैरों की तरफ झुकाने और हाथों से जमीन छूनें की यह मुद्रा स्मरण शक्ति और दिमाग की शक्ति बढ़ाती है। साथ ही ऐसा करने से चेहरे में खून का बहाव बढ़ता और आप जवां दिखते हैं।






    हलासन। जैसा कि इस तस्वीर में दिखाया है, उसी तरह यह योग करने से दिमाग तेज चलता है क्योंकि खून का बहाव बढ़ जाता है। इससे थायरॉएड और पैराथायरॉएड ग्लांड की मालिश भी हो जाती है और पूरा शरीर कसा और मजबूत बनता है।



    सुखासन - रीढ़ की हड्डी सीधी कर के पालथी मार के बैठना और ध्यान करना। यह योग सबसे आसान है लेकिन आपके शरीर और दिमाग में उर्जा भरने के लिए काफी है। यह आपकी एकाग्रशक्तिसु बढ़ाता है।


    पश्चिमोत्तासन। पैर और हाथ सीधे आगे की तरफ फैला कर खुद को सामने की ओर ऐसे झुकाएं कि माथा पैरों को छुए, जैसे कि तस्वीर में दिख रहा है। यह मुद्रा तनाव दूर करती है।




    सर्वांगसन। कंधों के बल अपने शरीर को ऊपर की तरफ उठाने की यह मुद्रा दिमाग तक खून के बहाव को बढ़ाती है। यह योग आपको भावात्मक रूप से भी मजबूत बनाता है।

    Saturday, February 6, 2016

    जामुन के फायदे // Benefits of Blackberry







    जामुन बेहद लाभदायक फल है। यह स्वाद और सेहत से भी भरपूर होता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं। जामुन के सेवन से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है।
    1.यह पाचन तंत्र के लिए लाभकारी है। विशेषकर डायबिटीज वाले लोग भी इसका सेवन कर सकते हैं। बस एक बात का ध्यान रखें कि कभी भी खाली पेट जामुन का सेवन न करें

    कभी भी जामुन खाने के बाद दूध का सेवन करें। हाँ अधिक मात्रा में भी जामुन खाने से बचें।
    यदि आपको एसिडिटी की समस्या रहती है तो काले नमक में भुना जीरा मिलाकर पीस लें। फिर इसके साथ जामुन का सेवन करें। एसिडिटी की समस्या दूर हो जाएगी।
    जामुन का सिरका बनाकर बराबर मात्रा में पानी मिलाकर सेवन करने से यह न केवल भूख बढ़ाता है, बल्कि कब्ज की शिकायत को भी दूर करता है।
    अगर आपको कमजोरी महसूस होती है या आप एनीमिया से पीडित हैं तो जामुन का सेवन आपके लिए फायदेमंद रहेगा।
    जामुन में फाइटोकेमिकल्स भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।
    यदि आपका बच्चा बिस्तर गीला करता है तो जामुन के बीजों को पीसकर आधा-आधा चम्मच दिन में दो बार पानी के साथ पिलाएं।
    यदि आप अपने चेहरे पर रौनक लाना चाहती हैं तो जामुन के गूदे का पेस्ट बनाकर इसे गाय के दूध में मिलाकर लगाने से निखार आता है




    जामुन शुगर पेशेंट के लिए काफी फायदेमंद होता है। इसमे कैरोटीन, आयरन, फोलिक एसिड, पोटैशियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और सोडियम भी पाया जाता है। इस वजह से यह शुगर का लेवल मेंटेन रखता है।साथ ही, डायबिटीज के मरीजों को बार-बार प्यास लगने वा अधिक बार पेशाब होने की समस्या में भी मददगार है।
    जामुन में फ्लेवोनॉइड्स, फेनॉल्स, प्रोटीन और कैल्शियम भी पाया जाता है, जो सेहत के लिए लाभकारी होता है।
    इस फल में विभिन्न प्रकार के मिनिरल जैसे कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम और विटामिन सी अच्छी मात्रा में है। इसकी वजह से यह हड्डियों के लिए फायदेमंद तो है ही, साथ ही शरीर की प्रतिरोधी क्षमता को बढ़ाता है।
    एन‌िमिक लोगों के लिए जामुन का सेवन संजीवनी बूटी की तरह ही है। अन्नामलाई विश्वविद्यालय के शोध की मानें तो इसके नियमित सेवन से रक्त में हिमोग्लोबिन का स्तर बढ़ जाता है।
    जामुन में पोटैशियम की मात्रा अधिक है। 100 ग्राम जामुन के सेवन से शरीर को 55 मिलीग्राम पोटैशियम मिलता है। इससे दिल का दौरा, हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक आदि का रिस्क कम होता है।
    जामुन का फल ही नहीं बल्कि इसकी पत्तियों के भी काफी फायदे हैं। आयुर्वेद में इसकी पत्तियों का पाचन ठीक रखने और मुंह से जुड़ी समस्याओं में काफी इस्तेमाल किया जाता है।



    Tuesday, February 2, 2016

    सफ़ेद बाल काले करेंगे ये घरेलू उपाय how to make white hairs black





    यदि आप समय से पहले बालों के सफेद होने की समस्या से परेशान हैं तो कुछ घरेलू उपाय भी आजमा कर देख लीजिए।  आपको जरूर  फायदा होगा।
    प्याज का रस  समय से पहले बालों के सफेद होने, बालों के झड़ने और गंजापन रोकने में मदद करता है। एक कांच के कटोरा में प्याज और नींबू का रस मिलाएं। अपने बालों और सिर पर मालिश करें। 30 मिनट के लिए छोड़ दें और एक हल्के हर्बल शैम्पू से धो लें। हालांकि प्याज का रस ठंडा होता है इसलिए इसका इस्तेमाल गर्मियों करना ठीक रहेगा।



    समय से पहले सफेद बालों के इलाज के लिए आंवला एक अच्छा उपाय है। नारियल के तेल में सूखे आंवले के कुछ टुकड़े डालकर उबाल लें। फिर तेल ठंडा हो जाने पर उसे अपने बालों और सिर पर तेल से मालिश करें। बालों को धोने से पहले कम से कम एक घंटे के लिए या रात भर छोड़ दें। यह प्रक्रिया सप्ताह में कम से कम एक या दो बार  करे|
    नारियल के तेल का  प्रयोग नींबू के रस के साथ किया जाता है। नींबू का रस मिला नारियल तेल अपने बालों और सिर पर मालिश करें। सिर में तेल लगाने के करीब एक घटे बाद ही अपने बालों को धो लें। नारियल तेल सफेद बालों के विकास को रोकने में मददगार है।
    बाल काले करने में मेंहदी पत्तों का प्रयोग भी कारगर है। एक मुट्ठी मेंहदी के पत्तों को पीसकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट में तीन चम्मच आंवला पाउडर, एक चम्मच कॉफी पाउडर और एक चम्मच सादे दही को मिलाकर अपने बालों पर समान रूप से लगाएं, फिर सूख जाने के बाद धो लें।
    बादाम का तेल, नींबू का रस, और आंवला के रस को बराबर मात्रा में मिलाएं। सफेद बालों की समस्या का इलाज करने के लिए इस मिश्रण से अपने बालों की मालिश करें इससे आपके बाल धीरे-धीरे काले होने लगेंगे|
    लौकी के रस में जैतून का तेल या तिल का तेल मिलाकर अपने सिर और बालों की मालिश करें। चौलाई का ताजा रस बालों की प्राकृतिक रंग बनाए रखने, बालों के झड़ने और समय से पहले बालों को सफेद होने से रोकने में मदद करता है।




    नारियल के तेल में कुछ करी पत्ते को पत्तियों के काले होने तक उबालें। फिर इसके ठंडा हो जाने पर अपने सिर और बालों की तेल से मालिश करें। बालों को धोने से पहले 30 से 45 मिनट के लिए छोड़ दें।
    काले तिल या तिल का तेल समय से पहले बालों के सफेद होने की समस्या से छुटकारा पाने में अत्यधिक प्रभावी है। प्रतिदिन एक चम्मच काले तिल का बीज कम से कम तीन महीने तक सेवन करें। अपने बालों पर तिल के तेल से मालिश करें, फायदा मिलेगा।
    काली चाय बालों को काला करने के साथ-साथ नरम और चमकदार बनाता है। एक कप पानी में दो चम्मच चाय की पत्तियों को डालकर उबाल लें। उसमें एक चम्मच नमक मिला लें। फिर ठंडा होने पर छानकर इस पानी से अपने बालों और सिर की मालिश करें और एक घंटे के बाद ठंडे पानी से धो लें।