Monday, October 5, 2015

आवाज बैठ जाना याने गला बैठने के उपचार How to Treat hoarse throat




१) अदरक का रस १० ग्राम ,निम्बू का रस १० मिली और एक ग्राम सेंधा नमक मिलाकर दिन में तीन बार आहिस्ता -आहिस्ता पीने से आवाज ठीक होती है|

) मुलेठी ,आंवला,मिश्री प्रत्येक २ ग्राम का काढा ५० मिली बनाकर पीने से गला बैठने में लाभ होता है|

३) आवाज सुरीली बनाने के लिए १० ग्राम बहेड़ा की छाल को गोमूत्र में भावित कर चूसने से आवाज कोयल जैसी सुरीली हो जाती है| किसी चूर्ण को किसी द्रव पदार्थ में मिलाकर सूख जाए तब तक घोटना-इसे भावित करना कहते हैं|

४) जामुन की गुठलियाँ को पीसकर शहद में मिलाकर गोलियां बनालें| एक गोली दिन में चार बार चूसें| गले की आवाज बैठने में हितकारी उपाय है| खांसी में भी लाभकारी है| भाषण देने व़ालों और गायकों के लिए यह नुस्खा अमृत तुल्य है| आवाज का भारीपन भी ठीक हो जाता है|
५)सोते समय एक ग्राम मुलहठी की छोटी सी गांठ मुख में रखकर कुछ देर चबाते रहे। फिर मुंह में रखकर सो जाए। सुबह तक गला साफ हो जायेगा। मुलहठी चूर्ण को पान के पत्ते में रखकर लिया जाय तो और भी अच्छा रहेगा। इससे सुबह गला खुलने के साथ-साथ गले का दर्द और सूजन भी दूर होती है।




   
६) जिन व्यक्तियों के गले में निरंतर खराश रहती है या जुकाम में एलर्जी के कारण गले में तकलीफ बनी रहती है, वह सुबह-शाम दोनों वक्त चार-पांच मुनक्का के दानों को खूब चबाकर खा लें, लेकिन ऊपर से पानी ना पिएं। दस दिनों तक लगातार ऐसा करने से लाभ होगा।

७) कच्चा सुहागा आधा ग्राम मुंह में रखें और उसका रस चुसते रहें। दो तीन घण्टों मे ही गला बिलकुल साफ हो जाएगा।

८) रात को सोते समय सात काली मिर्च और उतने ही बताशे चबाकर सो जायें। बताशे न मिलें तो काली मिर्च व मिश्री मुंह में रखकर धीरे-धीरे चूसते रहने से बैठा गला खुल जाता है।





९) 1 कप पानी में 4-5 कालीमिर्च एवं तुलसी की थोंडी सी पत्तियों को उबालकर काढ़ा बना लें और इस काढ़े को पी जाए|










१०) गुनगुने पानी में नमक मिला कर दिन में दो-तीन बार गरारे करें। गरारे करने के तुरन्त बाद कुछ ठंडा न लें। गर्म चाय या गुनगुना पानी पिएं जिससे गले को आराम मिलेगा।







११) गले में खराश होने पर सुबह-सुबह सौंफ चबाने से बंद गला खुल जाता है।















Thursday, October 1, 2015

पेट में गैस बनने के सरल उपचार : How to deal with gas trouble.





पेट में गैस या वायु की बीमारी पेट की मंदाग्नि (पाचनशक्ति की कमजोरी या अपच) के कारण होती है। शरीर में यह बीमारी तीन भागों से हो जाती है।
पहला- शाखा,
 दूसरा-मर्म, अस्थि और संधि 
 तीसरा- कोष्ठ (आमाशय)।
 वायु या गैस की बीमारी कोष्ठ से पैदा होती है। जब वायु कोष्ठ में चलती है, तो मल-मूत्र का अवरोध, हृदय के  रोग, वायु  का गोला, और बवासीर आदि रोग उत्पन्न हो जाते हैं।
कारण : मनुष्य सेवन किया गया भोजन हजम नहीं कर पाता है तो उसका कुछ भाग शरीर के भीतर सड़ने लगता है। इस सड़न से गैस पैदा होती है। गैस बनने के अन्य कारण भी होते हैं, जैसे- अधिक  व्यायाम करना, अधिक  मैथुन करना, अधिक देर तक पढ़ना-लिखना, कूदना, तैरना, रात में जागना, बहुत परिश्रम करना, कटु, कषैला तथा तीखा भोजन खाना, लालमिर्च, इमली, अमचूर, प्याज, शराब, चाय, कॉफी, उड़द, मटर, कचालू, सूखी मछली, मैदे तथा बेसन की तली हुई चीजें, मावा, सूखे शाक व फल, मसूर, अरहर, मटर, लोबिया आदि की दालें खाने से भी पेट में गैस बन जाती है।
इसके अतिरिक्त मूत्र , मल, वमन , छींक, डकार, आंसू, भूख, प्यास आदि को रोकने से भी गैस बनती है। आमाशय में वायु के बढ़ने से हृदय , नाभि, पेट के बाएं भाग तथा हाथ-पैरों में दर्द होने से गैस बन जाती है।
लक्षण : रोगी की भूख कम हो जाती है। छाती और पेट में दर्द होने लगता है, बेचैनी बढ़ जाती है, मुंह और मल-द्वार से आवाज के साथ वायु निकलती रहती है। इससे पेट व्  हृदय के आस-पास भी दर्द होने लगता है। सुस्ती, ऊंघना, बेहोशी, सिर में दर्द, आंतों में सूजन, नाभि में दर्द, कब्ज, सांस लेने में परेशानी, हृदय के रोग  , जकड़न, पित्त का बढ़ जाना, पेट का फूलना, घबराहट, सुस्ती, थकावट, सिर में दर्द, कलेजे में दर्द और चक्कर आदि लक्षण होने लगते हैं।

भोजन- साग-सब्जी, फल और रेशेवाले खाद्य पदार्थो का सेवन करें। आटे की रोटी में चोकर मिलाकर खाएं। मूंग की दाल की खिचड़ी, मट्ठे के साथ और लौकी (घिया), तोरई, टिण्डे, पालक, मेथी आदि की सब्जी तथा, दही व मट्ठे का प्रयोग हितकर है।शारीरिक व्यायाम और पेट सम्बंधी योगासन करें।
परहेज-चावल, अरबी, फूल गोभी और अन्य वायु पैदा करने वाले पदार्थो का सेवन नहीं करना चाहिए। मिर्च, मसाले, भारी भोजन, मांस, मछली, अण्डे आदि का सेवन न करें।
पेट में गैस के उपचार -
अदरक-अदरक का रस एक चम्मच, नींबू का रस आधा चम्मच और शहद को डालकर खाने से पेट की गैस में धीरे-धीरे लाभ होता है।
सरसों का तेल-यदि पेट की नाभि अपने स्थान से हट जाती है तो पेट में गैस, दर्द और भूख नहीं लगती है। ऐसे में नाभि को सही बैठाने से और नाभि पर सरसों का तेल लगाने से लाभ होता है। यदि पेट में दर्द यादा हो रहा हो तो रूई का फोया सरसों के तेल में भिगोकर नाभि पर रखकर पट्टी भी बांध सकते हैं।
लौंग-
 दो लौंग पीसकर उबलते हुए आधा कप पानी में डालें। फिर कुछ ठण्डा होने हर रोज  तीन  बार सेवन करने से पेट की गैस में फायदा मिलेगा।






पोदीना-
** चार चम्मच पोदीने के रस में एक नींबू का रस और दो चम्मच शहद मिलाकर पीने से गैस के रोग में आराम आता है।
**सुबह एक गिलास पानी में २५ ग्राम पोदीना का रस और २० ग्राम शहद मिलाकर पीने से गैस समाप्त हो जाती है।
**साठ ग्राम पोदीना, दस ग्राम अदरक और आठ ग्राम अजवायन को एक गिलास पानी में डालकर उबालें। उबाल आने पर इसमें आधा कप दूध और स्वाद के अनुसार गुड़ मिलाकर पीएं




** चौथाई कप पोदीने का रस आधा कप पानी में आधा नींबू निचोड़कर पीयें। इससे भी गैस से होने वाला पेट का दर्द तुरंत ठीक हो जाता है।
**बीस ग्राम पोदीने का रस, 10 ग्राम शहद और 5 ग्राम नींबू के रस को मिलाकर खाने से पेट के वायु विकार (गैस) समाप्त हो जाते हैं।
पानी-
एक गिलास पानी में ५० ग्राम पुदीना, १० ग्राम अदरक के टुकड़े, १० ग्राम अजवाइन को उबाल लें। बाद में थोड़ी-सी चीनी या गुड़ मिलाकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े में से 2 चम्मच काढ़ा रोजाना खाना खाने के बाद पीने से पेट की गैस दूर हो जाती है।
अगर बदहजमी की शिकायत हो, खाना न पचता हो तो एक दिन के लिए भोजन बंद करके सिर्फ पानी ही पीने से लाभ होता है।
एक गिलास गुनगुना पानी जितना पिया जा सके, लगातार कुछ सप्ताह तक खाना खाने के बाद पीते रहने से पेट की गैस में राहत मिलती है।
अन्य उपचार-

सुबह जल्दी उठकर गर्म पानी में आधा नींबू को निचोड़कर पीयें।
उपवास रखें।
एनिमा लें।
रोजाना कमर तक पानी में १० से १५ मिनट तक बैठे रहें।
गैस की बीमारी खत्म होने तक नियमित रूप से ठण्डे दूध के अलावा अन्य किसी चीज का सेवन नहीं करना चाहिए।
रोगी को ठीक हो जाने पर भी दो घण्टे के अंतर में एक बार कटे हुए फल खाने में देने चाहिए।
तली हुई चीजें, चाय, कॉफी और शराब का बिल्कुल सेवन नहीं करना चाहिए।
दर्दनाशक और सूजन को दूर करने वाली सारी औषधियां पूरी तरह बंद कर देनी चाहिए।
चिकनाई रहित छाछ और दही का अधिक मात्रा में सेवन करना चाहिए।

पेट पर चिकनी मिट्टी का लेप करें, जब मिट्टी सूख जाए तो उसे हटा दें। एक सप्ताह तक रोजाना मिट्टी से इलाज करें। इससे पेट में गैस बनना बंद हो जाएगी। मिट्टी को कपड़े की पट्टी पर लगाकर भी पेट से बांधा जा सकता है। इसे लगभग आधे घंटे तक अवश्य बांधा जा सकता है। फिर इसी पट्टी को सुबह या शाम को भी प्रयोग में लिया जा सकता है। हाँ ध्यान रहे कि खाना खाने के बाद या नाश्ता करने के बाद मिट्टी का प्रयोग न करें।