2.4.18

ओट्स,जौ,जई के अनुपम फायदे //Unique advantages of oats, barley

                                     
                                       


प्राचीन काल से जौ का उपयोग होता चला आ रहा है। कहा जाता है कि प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों का आहार मुख्यतः जौ थे। वेदों ने भी यज्ञ की आहुति के रूप में जौ को स्वीकार किया है। गुणवत्ता की दृष्टि से गेहूँ की अपेक्षा जौ हलका धान्य है।
ओट्स या जई आसानी से पच जाने वाले फाइबर का जबरदस्त स्रोत है। साथ ही यह कॉम्पलेक्स कार्बोहाइडेट्स का भी अच्छा स्रोत है। ओट्स हृदय संबंधी बीमारियों के खतरे को कम करता है। बशर्ते इसे लो सैच्यूरेटिड फैट के साथ लिया जाए। ओट्स एलडीएल की क्लियरेंस बढ़ाता है। ओट्स में फोलिक एसिड होता है जो बढ़ती उम्र वाले बच्चों के लिए बहुत उपयोगी होता है। यह एंटीकैंसर भी होता है
ओट में कैल्शियम, जिंक, मैग्नीज, आयरन और विटामिन-बी और ई भरपूर मात्रा में होते हैं। जो लोग डिसलिपिडेमिया और डायबिटीज से पीड़ित हैं उन्हें ओट्स फायदेमंद होता है। गर्भवती महिलाओं और बढ़ते बच्चों को भी ओट खाना चाहिए। आईये जाने कुछ और ऐसे ही फायदे



हृदय


ओट्स का सेवन दिल के लिये काफी फायदेमंद होता है। ओट्स में खूब फाइबर मौजूद होता है, और इसमें फॉलीबल फाइबर होता है जो दिल के लिये बहुत अच्छा होता है यही नहीं यह दूसरी बीमारियों से भी बचाता है। इससे शुगर लेवल कम रहता है।

कोलेस्ट्रॉल

ओट्स में मौजूद बीटा ग्लूकॉन नामक गाढा चिपचिपा तत्व हमारी आंतों की सफाई करते हुए कब्ज की समस्या दूर करता है। इसकी वजह से शरीर में बुरे कोलेस्ट्रॉल जमा नहीं हो पाता। अगर तीन महीने तक नियमित रूप से ओट्स का सेवन किया जाए तो इससे कोलेस्ट्रॉल के स्तर में 5 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है

स्तन कैंसर से बचाता है

ओट्स में लिग्नंस और एन्टेरोलैक्टोने जैसे फीटोकमिशल पाये जो कैंसर से लड़ने में सहायक हैं। एन्टेरोलैक्टोने विशेष रूप से, स्तन और अन्य हार्मोन से संबंधित कैंसर की रोकथाम में सहायक है




वजन घटाए


इसमें इनसॉलिबुल और सॉलिबुल फाइबर होता है, जो फैट बर्निंग के लिए काफी अच्छा है, साथ ही प्रोटीन भी मौजूद होने से पेट भर जाता है। जो लोग जिम जाने का या व्यायाम करने का समय नहीं निकल पाते हैं, वे ओट्स खा के अपना वजन जल्दी और आसान तरीके से कर सकते हैं।

उच्च रक्तचाप कम करता है

उच्च रक्तचाप हमारे हृदय के लिए बहुत ज्यादा खतरनाक है , इसे समय रहते अगर रोका ना गया तो यह इंसान की जान भी ले सकता है। इससे बचने का सबसे अच्छा उपाए है ओट्स। ओट्स खाने से उच्च रक्तचाप की परेशानी कम होती है क्योंकि इसमें फाइबर होता है जो कोलेस्ट्रोल को नियंत्रित रखता है।

आंत को स्वस्थ रखता है

ओट्स में फाइबर होने की वजह से यह आंत और मलाशय के लिए काफी फायदेमंद होता है। ओट्स उनके लिए बहुत लाभदायक है जो लोग अल्सरेटिव कोलाइटिस से पीड़ित हैं। ओट्स रोज़ खाने से कब्ज़ जैसी परेशानियों से निजात मिल जाता है।

त्वचा को चमकदार बनाये

ओट्स ना सिर्फ हमारे शरीर को स्वास्थ रखता है बल्कि यह हमारी त्वचा के लिए भी बहुत लाभदायक है। यह त्वचा को नमी देता है साथ ही जिनकी त्वचा बहुत ज्यादा रूखी या उसमें बहुत खुजली और जलन होती है तो ओट्स बहुत उपयोगी है।

तनाव से बचाता है

ओट्स में फाइबर और मैग्नीशियम पाया जाता है जो दिमाग में सेरोटोनिन की मात्रा बढ़ता है, जिससे मस्तिष्क शांत रहता है। जिसकी वजह से आपका मूड अच्छा रहता है और नींद भी अच्छी आती है। आप चाहें तो इसमें ब्लूबेरी भी दाल के खा सकते हैं, जिस में एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन सी पाया जाता है जो तनाव से लड़ने में मदद करता है।

ब्लड शुगर लेवल को स्थिर रखता है

ओट्स में कार्बोहाइड्रेट काफी अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो आपको ऊर्जा देती है। फाइबर की मात्रा ज्यादा होने की वजह से यह धीरे धीरे पचता है, जिसकी वजह से रक्त में मौजूद ग्लूकोस का स्तर बढ़ता नहीं है। अध्ययनों से यह भी पता चला है कि इसको नियमित खाने से टाइप 2 मधुमेह का खतरा काम हो जाता है।




28.3.18

पित्ताशय की पथरी की दवा गुड़हल के फूल

गाल ब्लैडर स्टोन की चमत्कारी दवा :
गुडहल के फूलों का पाउडर अर्थात इंग्लिश में कहें तो Hibiscus powder. ये पाउडर बहुत आसानी से पंसारी से मिल जाता है. अगर आप गूगल पर Hibiscus powder नाम से सर्च करेंगे तो आपको अनेक जगह ये पाउडर online मिल जायेगा. और जब आप online इसको मंगवाए तो इसको देखिएगा organic hibiscus powder. आज कल बहुत सारी कंपनिया आर्गेनिक भी ला रहीं हैं तो वो बेस्ट रहेगा. कुल मिला कर बात ये है के इसकी उपलबध्ता बिलकुल आसान है। अब जानिये इस पाउडर को इस्तेमाल कैसे करना है...


इस्तेमाल की विधि :
गुडहल का पाउडर एक चम्मच रात को सोते समय खाना खाने के कम से कम एक डेढ़ घंटा बाद गर्म पानी के साथ फांक लीजिये. ये थोडा कड़वा होता है. इसलिए मन भी कठोर कर के रखें. मगर ये इतना भी कड़वा नहीं होता के आप इसको खा ना सकें. इसको खाना बिलकुल आसान है. इसके बाद कुछ भी खाना पीना नहीं है.
इसके साथ में प्रोस्टेट enlargement की समस्या मे भी उपयोगी है|
पालक, टमाटर, चुकंदर, भिंडी का सेवन न करें। और अगर आपका स्टोन बड़ा है तो ये टूटने समय दर्द भी कर सकता है.



24.3.18

जायफल के घरेलू ,आयुर्वेदिक औषधीय प्रयोग // Nutmeg's home, Ayurvedic medicinal use


                                         


आयुर्वेद में जायफल को वात एवं कफ नाशक बताया गया है।
1.आमाशय के लिए उत्तेजक होने से आमाशय में पाचक रस बढ़ता है, जिससे भूख लगती है। आंतों में पहुंचकर वहां से गैस हटाता है। ज्यादा मात्रा में यह मादक प्रभाव करता है। इसका प्रभाव मस्तिष्क पर कपूर के समान होता है, जिससे चक्कर आना, प्रलाप आदि लक्षण प्रकट होते हैं। इससे कई बीमारियों में लाभ मिलता है तथा सौन्दर्य सम्बन्धी कई समस्याओं से भी निजात मिलती है।
2. जायफल को कच्चे दूध में घिसकर चेहरें पर सुबह और रात में लगाएं। मुंहासे ठीक हो जाएंगे और चेहरे निखारेगा।
3. नीबू के रस में जायफल घिसकर सुबह-शाम भोजन के बाद सेवन करने से गैस और कब्ज की तकलीफ दूर होती है।

4. जायफल और काली मिर्च और लाल चन्दन को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर चेहरे पर लगाने से चेहरे की चमक बढ़ती है, मुहांसे ख़त्म होते हैं।


5. दस्त आ रहे हों या पेट दर्द कर रहा हो तो जायफल को भून लीजिये और उसके चार हिस्से कर लीजिये एक हिस्सा मरीज को चूस कर खाने को कह दीजिये। सुबह शाम एक-एक हिस्सा खिलाएं।
6. सुबह-सुबह खाली पेट आधा चम्मच जायफल चाटने से गैस्ट्रिक, सर्दी-खांसी की समस्या नहीं सताती है। पेट में दर्द होने पर चार से पांच बूंद जायफल का तेल चीनी के साथ लेने से आराम मिलता है।
7. अनिंद्रा का स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और इसका त्वचा पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है। त्वचा को तरोताजा रखने के लिए भी जायफल का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए आपको रोजाना जायफल का लेप अपनी त्वचा पर लगाना होगा। इससे अनिंद्रा की शिकायत भी दूर होगी और त्वचा भी तरोजाता रहेगी।
8. सर में बहुत तेज दर्द हो रहा हो तो बस जायफल को पानी में घिस कर लगाएं।



9. सर्दी के मौसम के दुष्प्रभाव से बचने के लिए जायफल को थोड़ा सा खुरचिये, चुटकी भर कतरन को मुंह में रखकर चूसते रहिये। यह काम आप पूरे जाड़े भर एक या दो दिन के अंतराल पर करते रहिये। यह शरीर की स्वाभाविक गरमी की रक्षा करता है, इसलिए ठंड के मौसम में इसे जरूर प्रयोग करना चाहिए।
10. आपको किन्हीं कारणों से भूख न लग रही हो तो चुटकी भर जायफल की कतरन चूसिये इससे पाचक रसों की वृद्धि होगी और भूख बढ़ेगी, भोजन भी अच्छे तरीके से पचेगा।

11. फालिज का प्रकोप जिन अंगों पर हो उन अंगों पर जायफल को पानी में घिसकर रोज लेप करना चाहिए, दो माह तक ऐसा करने से अंगों में जान आ जाने की संभावना देखी गयी है।
12. प्रसव के बाद अगर कमर दर्द नहीं ख़त्म हो रहा है तो जायफल पानी में घिसकर कमर पे सुबह शाम लगाएं, एक सप्ताह में ही दर्द गायब हो जाएगा।
13. फटी एडियों के लिए इसे महीन पीसकर बीवाइयों में भर दीजिये। 12-15 दिन में ही पैर भर जायेंगे।
14. जायफल के चूर्ण को शहद के साथ खाने से ह्रदय मज़बूत होता है। पेट भी ठीक रहता है।
15. अगर कान के पीछे कुछ ऎसी गांठ बन गयी हो जो छूने पर दर्द करती हो तो जायफल को पीस कर वहां लेप कीजिए जब तक गाठ ख़त्म न हो जाए, करते रहिये।
16.अगर हैजे के रोगी को बार-बार प्यास लग रही है, तो जायफल को पानी में घिसकर उसे पिला दीजिये।
17.जी मिचलाने की बीमारी भी जायफल को थोड़ा सा घिस कर पानी में मिला कर पीने से नष्ट हो जाती है।
18. इसे थोडा सा घिसकर काजल की तरह आँख में लगाने से आँखों की ज्योति बढ़ जाती है और आँख की खुजली और धुंधलापन ख़त्म हो जाता है।
19. यह शक्ति भी बढाता है।
20. जायफल आवाज में सम्मोहन भी पैदा करता है।
21. किसी को अगर बार-बार पेशाब जाना पड़ता है तो उसे जायफल और सफ़ेद मूसली 2-2 ग्राम की मात्र में मिलाकर पानी से निगलवा दीजिये, दिन में एक बार, खाली पेट, 10 दिन लगातार।
17. बच्चों को सर्दी-जुकाम हो जाए तो जायफल का चूर्ण और सोंठ का चूर्ण बराबर मात्रा में लीजिये फिर 3 चुटकी इस मिश्रण को गाय के घी में मिलाकर बच्चे को सुबह शाम चटायें।
22. चेहरे पर या फिर त्वचा पर पड़ी झाईयों को हटाने के लिए आपको जायफल को पानी के साथ पत्थर पर घिसना चाहिए। घिसने के बाद इसका लेप बना लें और इस लेप का झाईयों की जगह पर इस्तेमाल करें, इससे आपकी त्वचा में निखार भी आएगा और झाईयों से भी निजात मिलेगी।
23. जायफल, सौंठ और जीरे को पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को भोजन करने से पहले पानी के साथ लें। गैस और अफारा की परेशानी नहीं होगी।
24. चेहरे की झुर्रियां मिटाने के लिए आप जायफल को पीस कर उसका लेप बनाकर झुर्रियों पर एक महीने तक लगाएंगे तो आपको जल्द ही झुर्रियों से निजात मिलेगी।
25. आंखों के नीचे काले घेरे हटाने के लिए रात को सोते समय रोजाना जायफल का लेप लगाएं और सूखने पर इसे धो लें। कुछ समय बाद काले घेरे हट जाएंगे।
26. दूध पाचन : शिशु का दूध छुड़ाकर ऊपर का दूध पिलाने पर यदि दूध पचता न हो तो दूध में आधा पानी मिलाकर, इसमें एक जायफल डालकर उबालें। इस दूध को थोडा ठण्डा करके कुनकुना गर्म, चम्मच कटोरी से शिशु को पिलाएँ, यह दूध शिशु को हजम हो जाएगा।

27. कई बार त्वचा पर कुछ चोट के निशान रह जाते हैं तो कई बार त्वचा पर नील और इसी तरह के घाव पड़ जाते हैं। जायफल में सरसों का तेल मिलाकर मालिश करें। जहां भी आपकी त्वचा पर पुराने निशान हैं रोजाना मालिश से कुछ ही समय में वे हल्के होने लगेंगे। जायफल से मालिश से रक्त का संचार भी होगा और शरीर में चुस्ती-फुर्ती भी बनी रहेगी।
28. जायफल के लेप के बजाय जायफल के तेल का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
29. दांत में दर्द होने पर जायफल का तेल रुई पर लगाकर दर्द वाले दांत या दाढ़ पर रखें, दर्द तुरंत ठीक हो जाएगा। अगर दांत में कीड़े लगे हैं तो वे भी मर जाएंगे।
30. पेट में दर्द हो तो जायफल के तेल की 2-3 बूंदें एक बताशे में टपकाएं और खा लें। जल्द ही आराम आ जाएगा।
31. जायफल को पानी में पकाकर उस पानी से गरारे करें। मुंह के छाले ठीक होंगे, गले की सूजन भी जाती रहेगी।
32. एक चुटकी जायफल पाउडर दूध में मिला कर लेने से सर्दी का असर ठीक हो जाता है। इसे सर्दी में प्रयोग करने से सर्दी नहीं लगती।
33. सरसों का तेल और जायफल का तेल 4:1 की मात्रा में मिलाकर रख लें। इस तेल से दिन में 2-3 बार शरीर की मालिश करें। जोड़ों का दर्द, सूजन, मोच आदि में राहत मिलेगी। इसकी मालिश से शरीर में गर्मी आती है, चुस्ती फुर्ती आती है और पसीने के रूप में विकार निकल जाता है।
34. दस जायफल लेकर देशी घी में अच्छी तरह सेंक लें। उसे पीसकर छान लें। अब इसमें दो कप गेहूं का आटा मिलाकर घी में फिर सेकें।इसमें शक्कर मिलाकर रख लें। रोजाना सुबह खाली पेट इस मिश्रण को एक चम्मच खाएं, बवासीर से छुटकारा मिल जाएगा।



20.3.18

रोस्टेड मखाना चाट बनाने की विधि

                                                         
चाय के साथ अगर रोस्टेड मखाना चाट का स्वाद मिल जाए तो मजा दोगुना हो जाएगा.रोस्टेड मखाना चाट की रेसिपी बनाने की विधि -
एक नज़र
रेसिपी क्विज़ीन : चाइनीज़
कितने लोगों के लिए : 4 - 6
समय : 5 से 15 मिनट
कैलोरी : 350
मील टाइप : वेज


आवश्यक सामग्री
3 कप मखाना
एक चौथाई छोटा चम्मच हल्दी पाउडर
आधा छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
एक छोटा चम्मच चाट मसाला
स्वादानुसार काला नमक
3 बड़ा चम्मच घी



विधि

- धीमी आंच पर एक कड़ाही में घी डालकर गर्म होने के लिए रखें.
- फिर इसमें मखाने डालकर 10-12 मिनट तक चलाते हुए भूनें.
- जब मखाने हल्के सुनहरे रंग के हो जाएं तो इसमें चाट मसाला छोड़कर सभी मसाले डालकर अच्छी तरह मिक्स कर दें.
- आंच बंद करके मखानों को अच्छी तरह चलाते रहें ताकि मसाले जले नहीं.
- इसके बाद इसमें चाट मसाला डालें और मिक्स करें.
- रोस्टेड मसालेदार मखानों को आप चाय के साथ सर्व करें या फिर ठंड होने के बाद एयरटाइट डिब्बे में रख सकते हैं.

17.3.18

जमालघोटा// jamalghota (Croton Tiglum) के गुण,उपयोग,फायदे


                                                 

परिचय – जमालगोटा एक आयुर्वेदिक हर्बल औषधि है जिसका इस्तेमाल कब्ज , गंजेपन , जलोदर आदि में किया जाता है | मुख्य रूप से यह एक तीव्र विरेचक औषधि है , जो पुराने कब्ज को तोड़ने का काम करती है | इसका पौधा हमेशा हरा – भरा रहता है | भारत में इसके क्षुप (पेड़) बंगाल , आसाम , पंजाब एवं दक्षिणी भारत में आसानी से मिल जाते है | जमालघोटा को हमारे यहाँ जयपाल के नाम से भी जानते है |


जमालघोटा के गुण-धर्म एवं रोग प्रभाव

यह कटु रस का होता है | गुणों में स्निग्ध, तीक्ष्ण एवं गुरु होता है | इसका वीर्य उष्ण एवं पचने के बाद विपाक कटु होता है | यह तीव्र विरेचक गुणों से युक्त होता है | इन्ही गुणों के कारण इसका इस्तेमाल जलोदर, शोथ , आमवात , कब्ज एवं उदर कृमि आदि रोगों में किया जाता है | आयुर्वेद में जमालघोटा के इस्तेमाल से नाराच रस , जलोदरारिरस , इछाभेदी रस एवं बिंदुघृत आदि विशिष्ट योग उपलब्ध है |
विभिन्न रोगों में जमालघोटा / jamalgota के फायदे और उपयोग की विधि
गंजापन – अगर आपके बाल झड रहे हो तो जमालगोटा का पेस्ट बना कर गंजेपन से प्रभावित जगह पर लेप करे | जल्द ही बाल झड़ने बंद हो जायेंगे और नए बाल भी आने शुरू हो जायेंगे | निम्बू के रस में जमाल घोटे को पीसकर लेप करने से भी फायदा मिलता है |



जीर्ण विबंद –
जमालघोटा एक तीव्र विरेचक औषधि है | कितनी भी पुराणी कब्ज हो जमालघोटे के उपयोग से  कब्जआसानी से टूट जाएगी | जमालघोटे के एक बूंद तेल या इसके बीज के 30 से 40 मिलीग्राम चूर्ण का सेवन करने से दस्त शुरु हो जाते है | ध्यान दे यह एक तीव्र विरेचक औषधि है अगर इससे अधिक मात्रा में सेवन किया जाए तो यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है | अगर दस्त न रुके तो कत्था और निम्बू को मिलाकर सेवन के लिए दे |
त्वचा विकार – त्वचा विकारो में इसके बीजो का लेप बना कर प्रभावित तवचा पर लगाने से लाभ मिलता है |
शीघ्रपतन – शीघ्रपतन या नपुंसकता की समस्या में जमालघोटे के तेल को लिंग पर लगा कर मालिश करने से लाभ मिलता है | यह तेल स्तम्भन शक्ति को बढ़ा देता है जिससे मर्दाना कमजोरी खत्म हो जाती है |
सिरदर्द – सिरदर्द में माथे पर इसके पेस्ट का लेप करने से लाभ मिलता है |
घाव – पुराने घाव पर जमालघोटा को पीसकर लगाने से घाव जल्दी भरता है |
आमवात – आमवात से पीड़ित व्यक्तियो को जमालघोटे के तेल से मालिश करनी चाहिए |जमालघोटे / jamalgota का इस्तेमाल करते समय बरते ये सावधानियां 
जमालघोटा एक तीव्र विरेचक द्रव्य है | इसके अधिक सेवन से तीव्र विरेचन और उल्टियाँ हो सकती है | अत: इसका प्रयोग हमेशा अपने निजी चिकित्सक की देख रेख में ही करना चाहिए | अगर इसके तेल की 10 बूंद एक साथ सेवन करली जाय तो यह जहरीला साबित होता है और इससे व्यक्ति की म्रत्यु तक हो सकती है | जमालगोटा के चूर्ण का सेवन भी एक उचित मात्रा में ही करना चा हिए | अधिक सेवन से पेट में जलन , अमाशय और आंतो पर विपरीत प्रभाव पड़ता है |
      बच्चों और गर्भवती महिलाओं को इसका इस्तेमाल बिलकुल नहीं करना चाहिए | क्योंकि छोटे बच्चे और           गर्भवती महिलाऐं इसके रोग प्रभाव को सहन नहीं कर सकते | ध्यान दे हमेशा शुद्ध जमालघोटे का ही इस्तेमाल करना चाहिए अर्थात इसे सुध्ह कर के ही प्रयोग में ले | जमालघोटे को शुद्ध करने के लिए इसमें दूध , दही या छाछ को मिलाकर इसे शुद्ध करना चाहिए | इसकी सेवन की मात्रा 30 मिलीग्राम से 60 मिलीग्राम तक अधिकतम हो सकती है | इस मात्रा से अधिक कभी भी सेवन न करे |

14.3.18

खरबूजा खाने के फायदे //Benefits of eating muskmelon


                                                    


*खरबूजा विटामिन A और बीटा कैरोटीन से युक्त खरबूजा, आँखों की रौशनी को घटने से रोकता है, आँखों को स्वस्थ रखता है और मोतियाबिंद होने से रोकता है।
*खरबूजे को डायबिटीज में भी फायदेमंद पाया गया है। यह रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित कर डायबिटीज के स्तर को सामान्य बनाता है।
*खरबूजे का सेवन उन लोगों के लिए भी बेहतर होता हैं, जिन्हें कोलेस्ट्रॉल की समस्या होती है।
शरीर की रोग प्रति रोधक क्षमता को बढ़ाता है। खरबूजे में निहित विटामिन C शरीर की रोग-प्रति रोधक क्षमता को बढ़ा कर उसे रोगों और संक्रमणों से लड़ने के लिए मजूबती प्रदान करता है। साथ ही इससे सफ़ेद रक्त कणिकाओं का निर्माण भी होता है और सफ़ेद रक्त कणिकाएं शरीर को संक्रमण के प्रभाव से बचाती हैं। और तो और यह शरीर में कैंसर को पनपने से भी रोकता है।


*खरबूजा अल्सर जैसी समस्याओं के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है।
*कब्ज जैसी समस्या में भी खरबूजा फायदेमंद होता है। खरबूजे में पाये जाने वाले डाइटरी फाइबर्स रोगी को कब्ज की समस्या से निजात दिलाते हैं।
*खरबूजा गुर्दे की पथरी समेत गुर्दे में होने वाली अनेकों समस्याओं में भी फायदेमंद होता है। खरबूजे के रस, जिसे ऑक्सीकिन कहा जाता है, को गुर्दों की समस्याओं और पथरी में फायदेमंद पाया गया है। यह किडनी की सफाई कर उससे विषैले पदार्थों को बाहर निकाल देता है।
*खरबूजा गर्भवती महिलाओं के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। इसमें निहित फोलेट शरीर से अधिक मात्रा में सोडियम को बाहर जाने से रोकता है।
*खरबूजा सोने में होने वाली परेशानी को भी दूर करता है। यह मस्तिष्क की मांशपेशियों को आराम देकर इंसोमेनिया जैसी समस्या को दूर करता है।
*जो लोग धूम्रपान छोड़ना तो चाहते हैं, लेकिन चाह कर भी उन्हें इसमें कामयाबी नहीं मिल रही हैं, उनके लिए खरबूजा भी फायदेमंद हो सकता है। खरबूजा खाने से सिगरेट पीने की तलब बंद हो जाती है। इसके अलावा, खरबूजा फेंफड़ों को मजबूती देता हैं और उनसे निकोटिन को तेजी से बाहर निकालने में भी मदद करता है।
*खरबूजा हृदय रोगियों के लिए भी एक अच्छ आहार है। खरबूजा रक्त को पतला कर हृदय में से रक्त के बहाव की गति को तेज करता है। इससे हृदय घात का खतरा खुद-ब-खुद ही कम हो जाता है। साथ ही खरबूजे में पाया जाने वाला पोटेशियम ब्लड प्रैशर को नियंत्रित करने में मदद करता है।
*खरबूजा तनाव रोधी का भी कार्य करता है। खरबूजा खाने से शरीर में ऑक्सीजन का बहाव तेज होता हैं और इससे मस्तिष्क को कार्य करने और तनाव से लड़ने की भरपूर क्षमता मिलती है।



*खरबूजा त्वचा से जुड़ी समस्याओं में भी फायदेमंद होता है। जहाँ इसका सेवन त्वचा सम्बन्धी समस्याओं को अंदरूनी तौर पर ठीक करता है, वहीं इसके लेप से त्वचा पर होने वाली जलन में भी राहत मिलती है। साथ ही इसकी एंटी एजिंग प्रॉपर्टी बढ़ती उम्र के प्रभावों को भी त्वचा से कम करती है।
*खरबूजे के कुछ टुकड़ों को पानी के साथ उबालकर उससे कुल्ला करने से दांतों के दर्द में राहत मिलती है।
खरबूजा, एसीडिटी से पीड़ित लोगों के लिए भी फायदेमंद होता है। खरबूजे का स्थिर पीएच स्तर शरीर में एसिड की मात्रा को नियंत्रित करता है और उसे सामान्य स्तर पर लेकर आता है।

*खरबूजा, यूटीआई में भी फायदेमंद होता है। यहाँ तक कि यूरिनरी ट्रैक्ट जैसी समस्या में, इसे खाने की सलाह भी दी जाती है। यूरिनरी इंफेकशन के अलावा, यह ब्लैडर इंफेकशन (मूत्राशय संक्रमण) में भी फायदेमंद होता है।
*प्रोटीन की अधिकता के कारण यह हड्डियों, बालों और नाखूनों के लिए भी फायदेमंद होता है।
*आँतों के कीड़ों से छुटकारा दिलाता है। अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि खरबूजे के बीजों के प्रयोग से आँतों से कीड़े बाहर निकल जाते हैं।
*शरीर में पानी कि कमी होने से बचाता है और हाड्रेट रखता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें पानी बहुतायत में होता है, और यही पानी शरीर को अधिक गर्मी से राहत देकर उसे ठंडक और ताजगी प्रदान करता है।
छाती में जमे बलगम को निकालने में, खरबूजे के बीज बहुत फायदेमंद होते हैं। खरबूजे के बीज बलगम को शरीर से बाहर निकालकने में मदद करते हैं।
*इसका सेवन आप जैसे चाहे वैसे कर सकते हैं। जैसे कि आप इसका सलाद भी बना कर खा सकते है,आप इसका जूस बना कर भी पि सकते हैं,इसके अलावा आप इसका पना बना कर भी खा सकते है।पना बनाने के लिए आप पहले खरबुजे कि उपरी सतह यानि छिलका निकाल कर इसको छोटे-छोटे टुकड़ो में काट करके,थोडा मिश्री वाला पानी बनाकर इसमें इन टुकड़ो को डालकर ठण्डा करके खा सकते हैं।
*कुछ लोगों को खरबूजे के सेवन से एलर्जी हो सकती है। इसलिए अगर आपको इस फल से एलर्जी होती है तो आपको इसके सेवन से बचना चाहिए।
*खरबूजा खाने के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए। पानी पीने से हैजा होने की आशंका रहती है।
सुबह खाली पेट खरबूजे का सेवन नहीं करना चाहिए। खाली पेट खरबूजा खाने से पेट में पित्त विकारों की उत्पत्ति हो सकती है।
*गर्म प्रकृति वालो को खरबूजे के अधिक सेवन से सूजन हो सकती है।
*अधिक खांसी और जुकाम से पीड़ित रहने वालों को खरबूजे का सेवन कम मात्रा में करना चाहिए।




कंपवात रोग का आयुर्वेदिक इलाज // Ayurvedic treatment of Parkinson's disease

                               

      कम्पवात का अर्थ है शरीर के किसी भी हिस्से में अपने आप ही कम्पन शुरू हो जाना. यह रोग अक्सर 60 वर्ष के बाद अधिक देखने को मिलता है, आज से 15 – 25 वर्ष पहले यह रोग 70 से 80 वर्ष के बाद नजर आती थी . परन्तु खान पान और जीवन के आचार में परिवर्तन होने के कारण यह बीमारी आजकल जल्दी ही शरीर में घर कर जाती है. यह एक प्रकार का वात और वायु रोग है. यदि रोगी का हाथ इस रोग से प्रभावित है तो व्यक्ति भोजन तक भी खाना खाने में सक्षम नहीं हो पाता. रोगी को बहुत परेशानी होती है. अगर पैर इस बीमारी से ग्रसित हो जाता है तो रोगी को चलने फिरने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है. इस बीमारी में मस्तिष्क कार्य करने का आर्डर देता है परन्तु प्रभावित शरीर का अंग इसमें सहयोग देना बंद कर देता है.


सामग्री :-
मेधा क्वाथ :- ३०० ग्राम
दवा बनाने की विधि :-
एक बर्तन में ४०० मिलीलीटर पानी ले इसमें एक चम्मच मेधा क्वाथ की मिलाकर धीमी – धीमी आंच पर थोड़ी देर पकाएं | कुछ देर पकने के बाद जब इसका पानी १०० मिलीलीटर शेष रह जाए तो इसे छानकर सुबह के समय और शाम के समय खाली पेट पीये |
सामग्री : -
एकांगवीर रस (ekangveer rasa) :- १० ग्राम
मुक्ता पिष्टी (mukta pisti) :- ४ ग्राम
वसंतकुसुमाकर रस (vasant kusumaakar rasa) :- १ ग्राम
स्वर्ण माक्षिक भस्म (swaran makshik bhasma) :- ५ ग्राम
प्रवाल पिष्टी (praval pisti) :- १० ग्राम
रसराज रस (rasaraj rasa) :- १ ग्राम
गिलोय सत (giloy sat) :- १० ग्राम
मकरध्वज (makardwaj) :- २ ग्राम



उपरोक्त औषधियों को आपस में मिलाकर एक मिश्रण बनाए | इस मिश्रण की बराबर की मात्रा में दो महीने की खुराक यानि ६० पुड़ियाँ बना ले | और किसी डिब्बे में बंद करके सुरक्षित स्थान पर रख दें | प्रतिदिन एक पुड़ियाँ सुबह के खाने से पहले और एक पुड़ियाँ रत के खाने से पहले खाएं | इन औषधियों को ताज़े पानी के साथ या शहद के साथ प्रयोग करे |
सामग्री :-
मेधा वटी (Megha Vati) :- ६० ग्राम
चन्द्रप्रभा वटी (chandra prabha vati) :- ६० ग्राम
त्रियोद्शांग गुग्गुलु (triyodshaang guggal) :- ६० ग्रा
इन तीनों आयुर्वेदिक औषधियों की एक – एक गोली की मात्रा को रोजाना तीन बार खाना खाने के बाद खाए | इन गोलियों का प्रयोग हल्के गर्म पानी के साथ करे |