Saturday, July 25, 2015

बरसात मे नेत्र रोगों से रहें सतर्क : Be wary of eye diseases in rainy season





     मानसून के सीजन में आखों की विशेष देखभाल जरूरी होती है। तरह-तरह के आंखों के संक्रमण इसी मौसम में पनपते है। बच्चें एवं स्कूल कॉलेज जाने वाले छात्रों को विशेष ध्यान देना चाहिए क्योंकि उनमें ही संक्रमण अधिक फैलता है। मध्य अगस्त से सितम्बर तक की गर्मी में काफी उमस एवं धूप तीखी होती है।   वर्षा एवं गर्मी का मिला-जुला मौसम रहता है। जिसके कारण मानव शरीर का सबसे संवेदनशील अंग आंख बाहरी वातावरण के उतार चढ़ाव झेलती है। इस प्रदूषण भरे वातावरण एवं भागदौड़ की जिंदगी में लोगों द्वारा आंखों की देखभाल के प्रति लापरवाही बरती जाती है।  जिस समस्या से व्यक्ति सबसे अधिक प्रभावित होता है वह कन्जकटीवाईटिस का इंफेक्शन है। जिसे नेत्र फ्लू भी कहा जाता है। इससे प्रभावित व्यक्तियों को हर समय यही लगता रहता है कि उसकी आंख में रेत जैसा कुछ गड़ रहा है। 

       इस मौसम में थोड़ी सी लापरवाही आंखों को काफी नुकसान पहुंचा सकती है।  कन्जकटीवाईटिस के अलावा भी बरसात में और कई तरह के इंफेक्शन होते है। बरसात में होने वाले सामान्य इंफेक्शन इस प्रकार से है:- 

    आंखों का सफेद भाग एवं पलक का अन्दरूनी भाग कन्जकटीवा कहलाता है। आंख के इस भाग में जलन, लाली और सूजन होने को कन्जकटीवाईटिस या नेत्रशोथ कहते है। इसके मुख्य कारण हैं इन्फेक्शन और एलर्जी, इस मौसम में आने वाले वायरल बुखार जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कम कर देते है उसकी वजह से भी नेत्रशोथ हो जाता है। इस मौसम में सबसे ज्यादा फैलने वाली आम बीमारी यही है। कन्जकटीवाईटिस का संक्रमण बहुत तेजी से फैलता है। आंखों को सबसे अधिक कन्जकटीवाईटिस से ही बचाने की जरूरत होती है। स्टाई पलकों के आसपास लाली लिए हुए आई सूजन को कहते है। इसमें पस बन जाता है और पस के पूरी तरह साफ  होने पर ही ठीक होती है। इसके होने का मुख्य कारण बिना धूले हाथों से आंखों को रगडऩा एवं बैक्ट्रीरिया है। ये बीमारी भी इस मौसम में होना एक आम बात है।

      आंखों में किर-किराहट व जलन होने लगती है। ऐसा लगता है कि उनमें कुछ गिर गया हो। रोगी को काफी तकलीफ  होती है। आंखों को धूप तथा तेज रोशनी चुभती है। जिससे आंखों को पूरी तरह खोलने से रोगी हिचकता है। आंखों में थकान तथा दर्द भी महसूस होता है। कभी-कभी आंखों की पुतलियों पर दाने पड़ जाते हैं। उपयुक्त उपचार न होने की स्थिति में दूसरे बैक्ट्रीरिया भी आंखों को प्रभावित कर देते हैं। जिससे सफेद गाढ़ा पदार्थ आंखों के कोने तथा पलकों के किनारों पर एकत्र हो जाता है। यह कीचड़ इतना हो सकता है कि जब सुबह व्यक्ति उठता है उसकी दोनों पलकें चिपकी होती है।


     इन सभी समस्याओं के बावजूद बरसात में अगर कुछ बातों का ख्याल रखा जाए तो आप और हम इस इंफेक्शन से बचाव कर सकते है। आपको उपर्युक्त में से यदि कोई लक्षण खुद में या आस-पास किसी में नजर आते है तो इन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:- 

     कंजक्टिवाइटिस होने पर चिकित्सक की सलाह जरूर लें। आखों को दिन में तीन से चार बार धोएं। घरेलू उपचार भी आँखों के रोगों  मे  काफी कारगर साबित  होते हैं| समय पर  रोग का इलाज नहीं किया गया तो कार्निया में जख्म हो सकता है जो बेहद नुकसानदेह  साबित हो सकता है। कंजक्टिवाइटिस संक्रामक बीमारी है। यानी सम्पर्क में आने पर यह एक व्यक्ति से दूसरे में फैलती है।  घर के बाहर निकलने से पहले धूप का चश्मा लगाएं। यह न सिर्फ  धूप से बचाता है बल्कि धुंए और गंदगी से होने वाली एलर्जी से भी रक्षा करता है। आंखों को तेज रोशनी से होने वाली परेशानी से बचाने के लिए कोशिश करे कि आंखों पर गहरे रंग का शीशें वाला धूप का चश्मा पहनें। आई फ्लू होने पर चश्में का प्रयोग करें। तीन-चार दिन रोगी को आराम करना चाहिए धूप में बाहर न निकलें।

मानसून के दौरान, कन्जकटीवाईटिस और स्टाई आखों की इंप्रेक्शन से लोग अधिक पीडि़त हो रहे हैं। इसका इंफेक्शन रोजाना के सामानों के इस्तेमाल से आसानी से फैलता है जैसे तौलिया, रूमाल, लैंसिस, चश्मा और अन्य सामान जो एक हाथ से दूसरे हाथ जाते है। 

    इन इंफेक्शन वाली चींजों से दूर ही रहें। साथ ही साफ -सफाई का ध्यान रखें। इसके लिए आपको निश्चित रूप के तय करना होगा कि परिवार में जो व्यक्ति संक्रमित है, उसका सामान अलग रखें। आंखों को साफ  करने के लिए साफ  तौलिया या रुमाल का इस्तेमाल करें व अपना तौलिया रूमाल एवं साबुन आदि किसी के साथ शेयर न करें। किसी भी संक्रमक चीज को छूने के बाद जैसे(फोन, टीवी रिमोट, दरवाजे इत्यादि)छूने पर हाथ धोकर ही खाना खाएं।

     आंखों में दवा डालने के पहले और बाद में हाथों को अच्छी तरह धो लें। बार-बार अपनी आखों को हाथ से न छुएं। आंखों को हमेशा साफ  और ठंडे पानी से धोएं। आंखों को हाथ से नहीं रगडऩा चाहिए। बिना धुले हाथों से आंखों को ना छूएं।

     कम रोशनी में पढ़ाई न करें। आंख में कुछ गिर जाने पर उसे मले नहीं। उसे साफ  पानी से धुलें। आराम न मिले तो तुरंत चिकित्सक की सलाह लें।

उपचार-

    रोग की प्रारंभिक व्यवस्था आरंभ होते ही तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ की राय लें। बिना डॉक्टरी सलाह लिए कोई दवा न लें। साथ ही मेडिकल स्टोर से स्टेरायड वाली दवा न लें। आंखों का तेज रोशनी से बचाव करें। आंखों को तेज रोशनी से होने वाली परेशानी से बचने के लिए आंखों पर गहरे रंग का शीशे वाला धूप का चश्मा पहनना चाहिए। आंखों को पट्टी बांधकर बंद नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे आखों से निकलने वाले पानी की स्वतंत्र निकासी रूक जाती है तथा पट्टी बांधने से हुई गर्मी आंख में इन्फेक्शन को और बढ़ावा देती है। 

     इस रोग की चिकित्सा केवल दो बातों पर निर्भर करती है, पहली किसी उचित विसंक्रामक द्रव से आंखों की बार-बार सफाई एवं दूसरी आंखों में सेकेन्डरी इंफेक्शन को रोकने के लिए एंटीबायोटिक का प्रयोग करें। इसका प्रमुख कारण आंखों से निकलने वाले हानि कारक पदार्थों को ठीक करना होता है।  इस तरह आंखों को तब तक धुलना चाहिए जब तक कि आंखों से निकलने वाला पदार्थ कीचड़ पूरी तरह से साफ  न हो जाए। यदि फिर भी परेशानी संभल ना रही हो तो तुंरत किसी नेत्र विशेषज्ञ के पास जाएं और इलाज करवाएं चूंकि थोड़ी सी भी देरी हमेशा के लिए आपको नेत्रहीन कर सकती है।

Thursday, July 9, 2015

त्वचा के रोग : सरल उपचार ; Skin Disease: Simple Remedies


*खाने का सोडा (सोडा बाई कार्ब ) लें और पानी की थोंड़ी सी मात्रा मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बनाएँ| दवा तैयार है | मुहासे पर लगाएँ| समय 20 मिनिट | गुनगुने पानी से धोलें|
*ककड़ी का रस और टमाटर का गुदा अच्छी तरह मिक्स करें | इसे मुहासे पर लगाएँ| समय 15 मिनिट | बाद मे पानी से साफ कर लें| इससे न केवल मुहासे ठीक होंगे ,चेहरे की चमक भी बढ़ेगी|
*नीम के पत्ते डाल कर उबाले गए पानी से स्नान करने से चर्म रोग मिटते है.
*नीम की पत्तियों को पीसकर हाथ पेरों पर लेप करने से जलन शांत होती है|
*गर्मी की घमौरियों पर बर्फ का टुकड़ा मलने से घमौरियां मुरझा जाती है और राहत मिलती है|.
चर्म रोगों में फिटकरी बड़ी गुणकारी होती है. जिस स्थान पर चर्म रोग हुआ हो उस स्थान को बार -बार फिटकरी के पानी से धोने से लाभ होता है
*दाद, खाज, फुंसी, फोड़े इत्यादि चर्म रोगों में ताजे संतरे के छिलके पीस कर लगाने से लाभ होता है.
*रोज सुबह 20 ग्राम शहद ठंडे पानी में मिलाकर चार पांच महीने तक पीने से त्वचा सम्बन्धी रोग दूर होते है.
*हाथ पाँव में जलन की शिकायत होने पर सौंफ के साथ बराबर मात्रा में धनिया व मिश्री मिलाकर पीस कर छान ले. खाना खाने के बाद 5-6 ग्राम की मात्रा में यह चूर्ण लेने से राहत मिलती है.|
*बादाम का तेल चहरे पर विशेषकर आँखों के आस पास मलने से झुर्रियां नहीं पड़ती.|
*गर्मी के दिनों में नींबू का शरबत पीये. इससे खून साफ़ होता है और ठंडक भी मिलती है.
|*सौंफ रक्त को शुद्ध करने वाला एवं चर्म रोग नाशक है. प्रतिदिन 10 ग्राम सौंफ बिना मीठा मिलाये वैसे ही चबा -चबा कर नियमित कुछ दिनों तक खाने से रक्त शुद्ध होता है और त्वचा का रंग साफ़ होता है.|
*त्वचा रोगों मे बादाम बहुत काम की चीज है| 5 बादाम रात को पानी मे भिगोकर रखें सुबह छिलका उतारें थौड़े से गुलाब जल मे पीसकर पेस्ट बनाएं| रुग्ण त्वचा पर लगाएँ | फायदा होगा|
*शकर ,बादाम का तेल और नींबू का रस मिलाएँ | इसे चेहरे पर मालिश करें | समय 10 मिनिट | गुब गुबे जल से धोलें| मुहासे दूर होंगे |
*लहसुन मुहासे दूर करने मे उपयोगी है| चेहरा धोकर भली प्रकार साफ कर पोंछ कर सूखा लें | अब लहसुन या इसके रस को मुहासे पर लगाकर उंगली से रगड़ें| चेहरे पर 15 मिनिट लगा रहने दें फिर गुन गुने पानी से साफ कर लें| दिन मे तीन मर्तबा प्रयोग करना है| एक माह मे परिणाम आएंगे |
*नींबू का रस रुई के फाये से मुहासे पर लगाएँ कुछ देर लगा रहबे के बाद ठंडे जल से साफ कर लें,| दिन मे तीन बार प्रयोग करें| अच्छे परिणाम की आशा की जा सकती है|
चमेली के फूलों को पीसकर चहेरे पर लेप करने से 2 - 3 माह में झांइयां व मुंहासे दूर हो जाते हैं !
* हल्दी व एक चुटकी नमक दूध में मिला सोते समय चेहरे पर लगाएं और सुबह गुनगुने पानी से मुंह धो लें !
कुछ दिनों तक लगातार ऐसा करने से चेहरे पर निखार आता है !
* दाग मिटाने के लिए नीम की ताजी पत्तियों को पीसकर रात के समय चेहरे पर लगाएं व सुबह सामान्य पानी से धो लें !
* गाजर - टमाटर - संतरे और चुकंदर का 25 - 25 ग्राम रस दो - तीन माह तक रोजाना पीने से चेहरे के दाग - धब्बे ~ मुंहासे व कालापन दूर होता है !
* शतावरी की जड़ को पीस पानी में मिलाएं व इस पानी से सिर धोने से बाल लंबे होते हैं !
* 50 ग्राम मुल्तानी मिट्टी व 50 ग्राम आंवला चूर्ण को 10 ग्राम दही में मिला बालों पर लगाएं और एक घंटे बाद धो लें - इससे बाल काले व चमकदार होते हैं !
* आंखों के नीचे का कालापन दूर करने के लिए आलू के रस से सुबह - शाम मसाज करें !
* आलू - टमाटर और नींबू का रस मिला आंखों के नीचे हल्की मालिश करें - इससे भी कालापन दूर होगा !

Wednesday, July 1, 2015

मेथी के स्वास्थ्यकारी लाभ :Health benefits of Fenugreek seeds





     मेथी  सेहत के लिहाज से बहुत गुणकारी है। मेथी में भरपूर मात्रा में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन सी, नैसिन, पौटेशियम, आयरन और अल्कालाड्यस होता है। इसमें डाइसोजेनिन भी होता है जो ऑस्ट्रियोजेन जैसे गुणों से भरपूर होता है। मेथी में कई स्वास्थ्यवर्धक गुण होते है जो कई शारीरिक समस्याओं को दूर भगा देते है। मेथी के दाने बालों की जड़ों को मजबूत करते हैं और उसे पुनर्जीवित भी करते हैं। इसमें प्रोटीन होता है, इसलिए मेथी दानों को अपनी डाइट में शामिल करने से आपके बाल खूबसूरत बनेंगे।
मेथी के दानों में फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है। खाली पेट मेथी दानों को चबाने से एक्सट्रा कैलरी बर्न होती है। सुबह दो गिलास मेथी का पानी पीने से मोटापा दूर होता है। मेथी का पानी बनाने क लिए एक बड़ा चम्मच मेथी के दानों को दो गिलास पानी में रातभर भिगो दें और सुबह इसे छानकर पी लें। मेथी के सेवन से किडनी भी स्वस्थ होती है। पथरी के इलाज में भी मेथी फायदा करती है। इस जादुई औषधि से पथरी पेशाब के साथ शरीर से बाहर निकल जाती है।

मेथी के दानों के सेवन से पेट दर्द और जलन दूर होती है। साथ ही पाचन क्रिया भी दुरुस्त होती है। मेथी दाने में फॉस्फेट, लेसिथिन और न्यूक्लिओ अलब्यूमिन होने से यह पोषक होती है। इसमें फोलिक एसिड, मैग्नीशियम, सोडियम, जिंक, कॉपर आदि भी मिलते हैं जो शरीर के लिए बेहद जरूरी हैं। पेट ठीक रहे तो स्वास्थ्य भी ठीक रहता है और खूबसूरती भी बनी रहती है। मेथी पेट के लिए काफी अच्छी होती है।

दूध बढ़ाता है -

मेथी के दाने  का सेवन करने से माँ  के शरीर  मे दूध ज्यादा बनाता है |  यह मेथी मे पर्याप्त मात्रा मे डायसोजेनिन  तत्व  होने के कारण  होता है| यह दूध निर्माण को प्रोत्साहित करता है| 

प्रसव आसानी से होता है-

मेथी के प्रयोग से गर्भाशय  ऐसा हो जाता है कि प्रसव के समय महिला को कम पीड़ा होती है|  लेकिन गर्भावस्था   के दौरान इसका उपयोग  वर्जित माना गया है| गर्भ पात हो सकता है| 






  मेथी के सेवन से महिलाओं के शरीर को सभी आवश्‍यक तत्‍व मिल जाते है जो मासिक धर्म की समस्‍या को दूर कर देते है। मासिक धर्म के दौरान होने वाला दर्द आदि भी इसके सेवन से दूर हो जाता है। 

स्तनो को सूडोल  बनाए -

अगर किसी स्त्री के स्टैन सूडोल  नहीं हैं तो उसे मेथी को अपने दैनिक खुराक मे जगह देनी चाहिए|  मेथी के प्रयोग से स्त्रियॉं के स्तन संबंधी हारमोन  बेलेन्स मे रहते हैं| 


  कोलेस्‍ट्रॉल घटाएं :

 अध्‍ययन के अनुसार, कोलेस्‍ट्रॉल बढ़ने पर मेथी का सेवन करना चाहिये, इससे बढ़ता कोलेस्‍ट्रॉल घटता है या स्थिर हो जाता है। 

  डायबटीज को नियंत्रण में लाएं

 मेथी का सेवन करने से डायबटीज यानि मधुमेह की समस्‍या नहीं होती है। इसमें गेलाक्‍टोमेनोन नामक फाइबर होता है जो मेथी में भरपूर मात्रा में पाया जाता है, यह शरीर में सुगर की कम मात्रा को अवशोषित करता है, जिससे शरीर में एसिड कम बनता है और इंसुलिन की मात्रा बढ़ती है।


पेट के कैंसर - 

 मेथी के दानों में फाइबर सामग्री जैसे- सापोनिन्‍स, म्‍यूसिलेज आदि होता है जो शरीर में स्थित विषाक्‍त पदार्थो को बाहर निकाल देता है और पेट में कैंसर जैसी गंभीर समस्‍या होने पर आराम दिलाता है।





पाचन दुरूस्‍त करे : 

 मेथी के बीज का सेवन करने से शरीर के हार्मफुल टॉक्सिन बाहर निकल जाते है। इसके सेवन से पाचन क्रिया भी दुरूस्‍त रहती है।

त्‍वचा सम्‍बंधी रोगों को दूर करें

 त्‍वचा सम्‍बंधी किसी भी प्रकार का रोग होने पर जैसे - जल जाना, खुजली होना आदि को मेथी के बीज क पेस्‍ट लगाकर ठीक किया जा सकता है। इससे त्‍वचा सम्‍बंधी कई अंदरूनी विकार भी दूर हो जाते है।


बुखार और गले के छाले-
बुखार आने और गला पकने  मे भी मेथी का प्रयोग हितकारी होता है|  मेथी बीज के साथ शहद और नींबू  का भी उपयोग करें|  गले की खराश  और खिच खिच  मे भी उपयोगी है|