Wednesday, June 28, 2017

गुर्दे की कार्य क्षमता बढ़ाने के लिए उपयोगी योग आसन //Useful Yoga posture to increase kidney functioning



शरीर का महत्वपूर्ण अंग है गुर्दा जिसे अंग्रेजी में किडनी कहा जाता है। 150 ग्राम वजनी गुर्दे का आकार किसी बीज की भांति होता है। यह शरीर में पीछे कमर की ओर रीढ़ के ढांचे के ठीक नीचे के दोनों सिरों पर स्थित होते हैं। शरीर में दो गुर्दे होते हैं।
गुर्दे का कार्य : 
गुर्दा रक्त में से जल और बेकार पदार्थो को अलग करता है। शरीर में रसायन पदार्थों का संतुलन, हॉर्मोन्स छोड़ना, रक्तचाप नियंत्रित करने में सहायता प्रदान करता है। यह लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में भी सहायता करता है। इसका एक और कार्य है विटामिन-डी का निर्माण करना, जो मनुष्य की हड्डियों को स्वस्थ और मजबूत बनाता है।
गुर्दे के रोग : 
लगातार दूषित पदार्थ खाने, दूषित जल पीने और नेफ्रॉन्स के टूटने से गुर्दे के रोग उत्पन्न होते हैं। इस टूटन के कारण गुर्दे शरीर से व्यर्थ पदार्थो को निकालने में अक्षम हो जाते हैं। गुर्दे.के रोग का बहुत समय तक पता नहीं चलता, लेकिन जब भी कमर के पीछे दर्द उत्पन्न हो तो इसकी जांच करा लेनी चाहिए।
गुर्दे के गंभीर रोगों को दो श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है- पहला एक्यूट रीनल फेल्योर इसमें गुर्दे आंशिक अथवा पूर्ण रूप से काम करना बंद कर देते हैं परंतु लगातार उपचार द्वारा यह धीरे-धीरे पुन:कार्यशील हो जाते हैं। गुर्दे की दूसरी बीमारी क्रोनिक रीनल फेल्योर है इसमें नेफ्रॉन्स की अत्यधिक मात्रा में क्षति हो जाती है जिसके कारण गुर्दो की कार्यक्षमता उत्तरोत्तर कम होती चली जाती है।
गुर्दे की जांच : 
उक्त दो तरह के रोगों के निदान के लिए सबसे पहले रक्त यूरिया नाइट्रोजन तथा किरेटिनाइन का रक्त परीक्षण करवाना चाहिए। मूत्र जांच भी करा लेना चाहिए क्योंकि इससे यह पता चलता है कि गुर्दो की कार्यशीलता और कर्यक्षमता कैसी है।
लक्षण : 
जब गुर्दा किसी रोग से रोगग्रस्त हो जाता है तो मूत्र संबंधि तकलीफ शुरू हो सकती है। आंखों के ‍नीचे सुजन या पैरों के पंजों में सुजन हो सकती है। पाचन क्रिया भी कमजोर पड़ जाती है।
गुर्दे को मजबूत बनाए रखने के लिए योगासन:
:भुजंगासन
   भुजंग आसन करने के लिए सर्वप्रथम किसी स्वच्छ और साफ हवादार जगह का चयन कर लें। उसके बाद आसन (चटाई) बिछा कर पेट के बल लेट जाएं।
फिर दोनों परों को अच्छी तरह से लंबा कर के फैला दें। और ठोड़ी (chin) ज़मीन पर लगा दें। दोनों कुहनिया (Elbows) दोनों तरफ की पसलियों से सटी हुयी रख कर, दोनों हाथों की हथेलियाँ ज़मीन पर लगा दें। (Note- याद रहे की आप के हाथों के पंजे सीधे होने चाहिए ओर ज़मीन की और होने चाहिए, तथा दोनों कुहनिया (Elbows) सीधी आकाश की और मुड़ी होनी चाहिए )।
भुजंग आसन करते वक्त इस बात का खास ध्यान रखे की दोनों हाथों के पंजे, हमेशा दोनों कंधों के ठीक नीचे (ज़मीन पर) लगे होने चाहिए।
अब अपनें सिर को ज़मीन से लगा दें। और फिर अपनी दोनों आँखें बंद कर के सांस शरीर के अंदर भरते हुए धीरे धीरे ठोड़ी (chin) को ऊपर उठाएँ, उसके बाद गर्दन को ऊपर आकाश की तरफ उठाएँ। फिर अपनी छाती को धीरे धीरे ऊपर उठाएँ। और उसके बाद अपने पेट के भाग को धीरे धीरे ऊपर उठा लें।
अब आगे, गर्दन को ऊपर की ओर ले जाते हुए पीठ को पीछे की ओर जुकाना है (कमान की तरह )। ऊपर उठनें के लिए शरीर से ज़ोर लगाएं, हाथों पर हो सके उतना कम बल लगाएं। ध्यान में रखें की दोनों पैरों के अग्र भाग को ज़मीन पर लगा कर सामान्य गति से शरीर के अग्र भाग को ऊपर उठने का प्रयत्न करना है।

भुजंग आसन की इस मुद्रा में आने के बाद अपनी दोनों आँखें खोलें और श्वसन गति सामान्य बनाए रखें (सांस सामान्य गति से अंदर लें तथा बाहर छोड़ें)। और पहली बार में इस आसन मुद्रा को बीस सेकंड से तीस सेकंड तक बनाए रखिए। फिर ऊपर उठाए शरीर को नीचे की ओर ले जाना शुरू कर दीजिये।
शुरुआत में पेट के बल लैट कर जिस मुद्रा से आसन शुरू किया था, उस मुद्रा में लौट जाने के बाद अपनें दोनों हाथों पर अपना सिर टीका कर या ज़मीन से अपना सिर लगा कर उतनी ही देर विश्राम करें, जितनी देर तक भुजंग आसन किया हों।
भुजंगासन कर लेने के बाद शवासन कर के थकान मिटा लेनी चाहिए।

, धनुरासन-

सबसे पहले आप पेट के बल लेट जाए।
सांस छोड़ते हुए घुटनों को मोड़े और अपने हाथ से टखनों को पकड़े।



सांस लेते हुए आप अपने सिर, चेस्ट एवं जांघ को ऊपर की ओर उठाएं।
अपने शरीर के लचीलापन के हिसाब से आप अपने शरीर को और ऊपर उठा सकते हैं।





शरीर के भार को पेट निचले हिस्से पर लेने की कोशिश करें।
जब आप पूरी तरह से अपने शरीर को उठा लें तो पैरों के बीच की जगह को कम करने की कोशिश करें।
धीरे धीरे सांस ले और धीरे धीरे सांस छोड़े। अपने हिसाब से आसन को धारण करें।
जब आप मूल स्थिति में आना हो तो लम्बी गहरी सांस छोड़ते हुए नीचे आएं।
यह एक चक्र पूरा हुआ।
इस तरह से आप 3-5 चक्र करने की कोशिश करें।
 

हलासन-

. सबसे पहले साफ़ जगह पर एक चटाई बिछा लेंं।
2. आप सर्वांगासन की तरह जमीन पर पीठ के बल लेट जाएंं।
3. अपने दोनों पैरों को एक-दूसरे से मिलाकर रखें और अपनी हथेलियों को कमर के पास सटाकर रखें।
4. अपने मुंह को आकाश की तरफ करके अपनी दोनों आखों को बंद कर लेंं।
5. अपने शरीर को एकदम से ढीला छोड़ देंं।

6. श्वास को अंदर की ओर लेते हुए अपने दोनों पैरों को धीरे-धीरे करके उठाएं।
7. जब दोनों पैरों का समकोण बन जाए तब अपने श्वास को छोड़ें।
8. सर्वांगासन की स्तिथि में आने के बाद अपने दोनों पैरों को अपने सिर के पीछे जमीन पर टिकने की कोशिश करे।
9. अपनी कमर और पीठ को पीछे झुकाने के लिए अपने दोनों हाथो का सहारा लेंं, हाथ की कोहनियों से पीठ को पीछे जमीन से लगा कर रखें।
10.फिर अपनी पीठ और पैर को धीरे-धीरे जमीन पर लगाना शुरू कर देंं|
11. इस आसन में घुटनों का मुड़ना नहींं होता है।








उष्ट्रासन,


उष्ट्रासन की विधि :
1. किसी खुली हवादार जगह पर एक चटाई बिछाएं।
2. दोनों पैरों को सामने की तरफ फैलाएं।
3. अब धीरे-धीरे दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर बैठें। जैसा कि वज्रासन में बैठते हैं।
4. धीरे-धीरे घुटनों के बल उपर की तरफ उठें।
5. अब दोनों हाथों को कमर पर रखकर पीछे की और आराम से झुकें।
6. पीछे कि तरफ झुकते हुए एक हाथ को ऐड़ी से लगाएं और एैसे ही दूसरे हाथ को दूसरे पैर की ऐड़ी पर।


7. ध्यान रहे एक बारी में एक ही हाथ को ऐड़ी से लगाएं। नहीं तो गिरने की संभावना अधिक होती है।
8. सिर को पीछे की ओर झुकाएं।



9. इस आसन में थोड़ा रूकने का प्रयास करें।
10. अब धीरे-धीरे क्रम में वापस पहली वाली अवस्था में वापस आएं।


पश्चिमोत्तनासन-
पश्चिमोत्तनासन करने की विधि -
सबसे पहले आप जमीन पर बैठ जाएं।
अब आप दोनों पैरों को सामने फैलाएं।
पीठ की पेशियों को ढीला छोड़ दें।
सांस लेते हुए अपने हाथों को ऊपर लेकर जाएं।
फिर सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुके।
आप कोशिश करते हैं अपने हाथ से उँगलियों को पकड़ने का और नाक को घुटने से सटाने का।





धीरे धीरे सांस लें, फिर धीरे धीरे सांस छोड़े
और अपने हिसाब से इस अभ्यास को धारण करें।
धीरे धीरे इस की अवधि को बढ़ाते रहे।
यह एक चक्र हुआ।
इस तरह से आप 3 से 5 चक्र करें।

त्रिकोणासन

त्रिकोणासन(Trikonasana) योग करने के नियम
* सबसे पहले एक समतल स्थान पर अपने दोनों पैरों में कुछ फासला रखकर सीधे खड़े हो जाये।
*अपने दाहिने पैर को दायीं तरफ मोड़कर रखे।
* अपने कंधो की ऊंचाई तक अपने दोनों हाथों को बगल में फैला ले।



अब धीरे-धीरे साँस ले और दांयी तरफ झुके। झुकते समय अपनी नजरो को सामने की तरफ रखे।
*अब दायें हाथ से अपने दायें पैर को छूने की कोशिश करें|




*इसअवस्था में आपका बायाँ हाथ सीधा आकाश की ओर रखे और नजरे अपने बाये हाथ की उंगलियों की तरफ रखे।
*अब सामान्य अवस्था में वापिस आकर बांये हाथ के द्वारा समान क्रिया करें|
* ऐसे कम से कम 20 बार करे।
*शरीर उठाते समय सांसों को अन्दर ले और झुकते समय सांसों को छोड़े।

अंर्धचंद्रासन
अर्ध चंद्रासन शरीर की सभी माँसपेशियों में एकसाथ खिंचाव लाता है. यह आसन शरीर को सुगठित बनाने और अतिरिक्त चर्बी को घटाने में भी सक्षम है.
इसके अतिरिक्त कोई ध्यानात्मक आसन भी करना चाहिए. वीरासन ऐसा आसन है जिसके अभ्यास से अनचाहे विचारों को कम किया जा सकता है. इसके अभ्यास से शारीरिक और मानसिक तनाव से भी छुटकारा पाया जा सकता है.

विधि

अर्ध चंद्रासन करने के लिए दोहरा कम्बल बिछाएं और दोनों घुटनों के बल खड़े हो जाएं. अब बाएं पैर को घुटनों से एक क़दम आगे रखें. दायाँ घुटना ज़मीन से स्पर्श करेगा और दोनों हाथ बगल में रहेंगे. यह प्रारंभिक स्थिति है.
धीरे-धीरे कमर को आगे की ओर धकेलिए. ऐसा करने से बाएं पैर की पिछली ओर जंघा के बीच का फ़ासला कम हो जाएगा परंतु एड़ी नहीं उठाएंगे. नियंत्रणपूर्वक साँस भरते हुए दोनों हाथों को पहले कंधों के सामने लेकर आएँ.
फिर सिर के ऊपर हाथों को लाएँ. बाजू सीधी रखें और गर्दन को भी पीछे मोड़ लीजिए. थोड़ी देर रुकें, पीठ और कमर में खिंचाव को महसूस करें. आकाश की ओर देखें और साँस रोक कर रखें.
इस प्रकार आपके हाथ, पीठ, कमर और पैर के बीच में अर्ध चंद्राकार बन जाएगा. इसीलिए इसे अर्ध चंद्रासन नाम दिया गया है.साँस निकालते हुए हाथों को नीचे ले आएँ और फिर से दोनों घुटनों के बल खड़े हो जाएँ. इस बार दाएँ पैर को आगे रखें और फिर से अर्ध चंद्रासन का अभ्यास करें.



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विशिष्ट परामर्श


  

 बढे हुए क्रिएटनिन के लेविल को नीचे लाने और गुर्दे की क्षमता बढ़ाने में हर्बल औषधि सर्वाधिक सफल होती हैं| वैध्य दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क किया जा सकता है| दुर्लभ जड़ी-बूटियों से निर्मित यह औषधि कितनी आश्चर्यजनक रूप से फलदायी है ,इसकी एक केस रिपोर्ट पाठकों की सेवा मे प्रस्तुत कर रहा हूँ -







रोगी का नाम - Awdhesh 
निवासी - कानपुर 
ईलाज से पूर्व की सोनोग्राफी  रिपोर्ट








दिनांक - 26/4/2016
Urea- 55.14   mg/dl

creatinine-13.5   mg/dl 


हर्बल औषधि प्रयोग करने के 23 दिन बाद 17/5/2016 की सोनोग्राफी  रिपोर्ट  यूरिया और क्रेयटिनिन  नार्मल -




creatinine 1.34
mg/dl

urea 22  mg/dl 


हृदय रोगों मे उपकारी है मूँगफली: Peanut is beneficial: in heart disease



   मूंगफली सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होती है, यह तो सभी जानते हैं लेकिन क्‍या आप यह बात जानते हैं कि इससे आप लंबी और सेहतमंद जिंदगी पा सकते हैं। एक अध्‍ययन के अनुसार, इसके सेवन से दिल के दौरे और स्‍ट्रोक की आशंका को कम किया जा सकता है। अमेरिका के वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी और चीन के शंघाई कैंसर संस्थान के संयुक्त अध्ययन से इस बात का खुलासा हुआ है।
पोषक तत्‍वों से भरपूर मूंगफली
मूंगफली में प्रोटीन, कैलोरी, विटामिन बी, ई तथा के, आयरन, फोलेट, कैल्शियम, नियासिन और जिंक पाया जाता है। मात्र 100 ग्राम कच्ची मूंगफली में 1 लीटर दूध के बराबर प्रोटीन होता है। इसमें प्रोटीन की मात्रा 25 प्रतिशत से भी अधिक होती है, जबकि मीट, मछली और अंडों में यह 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होती। मूंगफली में नुट्रिएंट, मिनरल, एंटी-ऑक्सीडेंट और विटामिन जैसे पदार्थ पाए जाते हैं। एक अंडे के मूल्य के बराबर मूंगफली में जितना प्रोटीन व ऊष्मा होती है, उतनी दूध व अंडे से संयुक्त रूप में भी नहीं होती।



मूंगफली सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होती है, यह तो सभी जानते हैं लेकिन क्‍या आप यह बात जानते हैं कि इससे आप लंबी और सेहतमंद जिंदगी पा सकते हैं। एक अध्‍ययन के अनुसार, इसके सेवन से दिल के दौरे और स्‍ट्रोक की आशंका को कम किया जा सकता है। अमेरिका के वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी और चीन के शंघाई कैंसर संस्थान के संयुक्त अध्ययन से इस बात का खुलासा हुआ है।

पोषक तत्‍वों से भरपूर मूंगफली
   मूंगफली में प्रोटीन, कैलोरी, विटामिन बी, ई तथा के, आयरन, फोलेट, कैल्शियम, नियासिन और जिंक पाया जाता है। मात्र 100 ग्राम कच्ची मूंगफली में 1 लीटर दूध के बराबर प्रोटीन होता है। इसमें प्रोटीन की मात्रा 25 प्रतिशत से भी अधिक होती है, जबकि मीट, मछली और अंडों में यह 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होती। मूंगफली में नुट्रिएंट, मिनरल, एंटी-ऑक्सीडेंट और विटामिन जैसे पदार्थ पाए जाते हैं। एक अंडे के मूल्य के बराबर मूंगफली में जितना प्रोटीन व ऊष्मा होती है, उतनी दूध व अंडे से संयुक्त रूप में भी नहीं होती।
शोध के अनुसार
  साइंस डेली में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, मूंगफली पोषक तत्वों से भरा बेहद सस्ता आहार है। इसलिए दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही दिल की बीमारियों की रोकथाम में इसका सेवन प्रभावी हो सकता है। इसके लिए कम आय वाले 70 हजार अमेरिकी और 1.3 लाख शंघाई नागरिकों की जांच की गई। शोध में पाया गया कि मूंगफली खाने वाले लोग अकाल मृत्यु और दिल की बीमारियों से बचे रहते हैं।
साथ ही कुछ विशेषज्ञों का यह भी माना है कि भले ही मूंगफली दिल के लिए फायदेमंद हो, लेकिन नमक लगी मूंगफली ज्यादा मात्रा में खाने से नुकसान भी पहुंच सकता है क्योंकि इसमें कैलोरी ज्यादा होती है। इसलिए रोज थोड़ी मूंगफली ही खाई जाए तो बेहतर होगा।



अन्‍य अध्‍ययन

   फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक अध्ययन की मानें तो मूंगफली के सेवन से कोशिकाएं स्वस्थ रहती हैं जिससे दिल की बीमारी व कैंसर होने का खतरा कम हो जाता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि मूंगफली में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन व अच्छी किस्म की चर्बी मोनो अनसेचुरेटेड फैट पाया जाता है। वहीं ब्रिटिश डायटिक एसोसिएशन के प्रवक्ता ने कहा कि मूंगफली सेहत के लिए फायदेमंद होती है लेकिन नमकीन मूंगफली से जरूर परहेज करना चाहिए।
मुट्ठीभर मूंगफली के ढेर सारे फायदे
मूंगफली खाने से रक्त में कोलेस्टॉल का लेवल कम होता है। इसमें मोनोसैचुरेटेड फैट होती है, जिसकी वजह से एक दिन में औसतन 67 ग्राम मूंगफली खाने से कुल कोलेस्टॉल लेवल में 51 फीसदी की कमी आती है। यही नहीं, इससे कम घनत्व वाले बैड कोलेस्टॉल यानी लिपोप्रोटीन कोलेस्टॉल का लेवल 7.4 फीसदी कम होता है। मूंगफली हमारी धमनियों के लिए भी अच्छी होती है।
दिल को स्‍वस्‍थ रखने के लिए खानपान के साथ नियमित व्‍यायाम भी बहुत जरूरी होता है। इसके अलावा अपने दिल की नियमित रूप से जांच भी करायें।
  इसे अंदर मौजूद हेल्दी फैट आपके हार्ट के लिए बहुत ही अच्छा है। हमारे शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है। जिससे कि दिल के दौरे पड़ने की समस्या कम हो जाती है।
यह शरीर मे खराब कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करता है।
  इसमे मौजूद प्रोटीन मसल बनाने मे मदद करता है। जो लोग जिम में जाते हैं या फिर एक्सरसाइज करते हैं उनको इसका सेवन करना चाहिए क्योंकि इसमें पाया जाने वाला प्रोटीन मसल बनाने में मदद करता है। और जोड़ो की दिक्कत को भी दूर करता है।



हृदय रोगों मे उपकारी है मूँगफली
   यह मिनरल्स का खजाना है इसके सेवन से आप कई बीमारियों को अपने शरीर से दूर रख सकते है।

यह पाचन क्रिया को ठीक रखने मे मदद करता है।
इसका एक फायदा मेटाबोलिस्म को सही रखना भी है और कर्ब को एनर्जि मे बदलने मे मदद करता है। अगर आप का मेटाबोलिज्म सही रहता है तो आपका वजन बढ़ना और कम होना आसान हो जाता है अगर आप का फायदा होता है जब आपका मेटाबोलिज्म ज्यादा होता है तो आपका वजन कम हो जाएगा। और अगर आपका मेटाबॉलिज्म धीमा होता है तो आपका वजन बढ़ने लगेगा।
यह गर्भवती महिला मे फलोट की मात्रा को ठीक करने मे मदद करता है।
इसमे मौजूद विटामिन बी3 होता है जो दिमाग की ताकत बढ़ाता है।
यह कैंसर से बचाने मे भी मदद करता है। इससे महिलाओ मे 58 % और आदमियो मे 27% तक क्लोन कैंसर की समस्या कम हो सकती है। इसमें पाए जाने वाले एंटी ऑक्सीडेंट पेट में होने वाली कैंसर से बचाता है।
यह बढ़ती उम्र से आने वाली झुरियों को रोकता है।
इसके नियमित सेवन से खून की कमी नही होती है।
हृदय रोगों मे उपकारी है मूँगफली
यह स्किन को मुलायम बनाए रखने मे मदद करता है। और इसके अलावा यह हमारी स्किन को डैमेज होने से भी बचाता है।

अगर आप इसका हर रोज एक मुट्ठी सेवन करते है तो यह आपकी हड्डियों को मजबूत रखने मे मदद करता है।
अगर आप गर्भवती हैं और अपने बच्चे को लेकर परेशान है। तो अगर आप अपनी प्रेगनेंसी से पहले और बाद में मूंगफली का सेवन करते हैं तो आपके होने वाले बच्चे को 70 परसेंट सभी बीमारियों से बचाया जा सकता है।

Monday, June 26, 2017

बवासीर ,मस्से, पाईल्स मे उपयोगी योग आसन :Useful Yoga Posture for Hemorrhoids, piles



   पाइल्स को बवासीर और Hemorrhoids भी कहा जाता है| इसकी समस्या आजकल बहुत ही आम हो गयी है| जैसा की हम सभी जानते है की आजकल की जीवनशैली में सभी का खानपान अनियमित हो गया है, जिसके चलते कब्ज आदि की समस्या रहती है| और यही दोनों बवासीर के होने के मुख्य कारण है|



>दरहसल बवासीर में मलद्वार के आसपास की नसें सूज जाती हैं| जिसके चलते मल त्यागते वक्त बहुत दर्द महसूस होता है, साथ ही मलद्वार से खून भी आता है या खुजली होती है|
इस परेशानी के चलते व्यक्ति की हालत बहुत ही ख़राब हो जाती है| बहुत से लोगो को तो इसका ऑपरेशन भी करवाना पढता है|
बवासीर से निजात के लिए योग
पर्वतासन
   पर्वतासना को माउंटेन पोस के नाम से भी जाना जाता है| यह आपके पुरे शरीर को स्ट्रेच करने के लिए बहुत अच्छा व्यायाम है| इसलिए गठिया रोगी के लिए तो यह बहुत ही अच्छा व्यायाम है| इसे करते वक्त शरीर की मुद्रा पर्वत के समान दिखती है इसलिए इसे पर्वतासन कहा जाता है| Piles Cure के लिए भी इसे करना अच्छा है|
इसे करने के लिए किसी साफ़ समतल जगह पर दरी बीछाकर खड़े हो जाये| अब अपने हाथो को ऊपर कर ले| इसके बाद सांस लेते हुए अपने पंजो को ऊपर उठाये, कुछ सेकंड्स इसी मुद्रा में बने रहे फिर निचे आ जाये|
हलासन-
   हलासन आपके पीठ की मांसपेशियों से तनाव दूर करता है| इसे करने से कब्ज, गैस, खाने का ना पचना जैसी समस्या दूर होती है| इसे करने के लिए सबसे पहले अपने पीठ के बल लेट जाये फिर अपने पैरो को धीरे धीरे उठाये|आपको सांस लेते हुए अपने पैरो को उठाना है और 90 डिग्री तक ले जाना है|
इसके बाद सांस छोड़ते हुए अपने पैरो को 120 डिग्री तक ले जाने का प्रयत्न करे| इसे बाद अपने पंजो को भूमि से लगाए| कुछ देर इसी अवस्था में बने रहे फिर वापिस आ जाये|
बालासन-

   बालासन करने में सरल तो है ही साथ ही इससे आप बवासीर की समस्या से राहत पा सकते है| दरहसल यह आपके पाचन तंत्र को सुचारू रखता है तथा कब्ज की समस्या से निजात दिलाता है| इस आसन को करने के लिए सबसे पहले तो घुटने मोड़कर बैठ जाये| अब हाथो को ऊपर उठाये और आगे जमीन को और रख दे|
अपने माथे को भी जमीन से छुए| इस वक्त आपके शरीर की मुद्रा पेट में पल रहे बच्चे के समान होती है| आपका नितम्ब दोनों एडियो के बिच होना चाहिए| इस मुद्रा में कुछ सेकंड्स बने रहे|
सर्वंगासन-

   सर्वंगासन करने से तनाव दूर होता है, साथ ही यह बवासीर के लक्षणों से भी निजात दिलाता है| इसे करने के लिए सबसे पहले पीठ के बल सीधे लेट जाएं। इसके बाद अपने दोनों पैरों को साथ रखें और हाथों को कमर के पीछे रखे|


इसके पश्चात सांस अंदर की ओर लेते हुए दोनों पैरों को ऊपर की और उठाये| पहले 30 डिग्री के कोण तक उठाएं, फिर धीरे धीरे करकर 90 तक की डिग्री तक उठाएं।

   कुछ सेकंड्स इसी अवस्था में बैठे रहे| फिर सांस छोड़ते हुए धीरे धीरे दोनों पैरों को नीचे ले आएं और कुछ देर शवासन में लेटें। यह फायदेमंद Yoga poses for Piles में से एक है

Saturday, June 24, 2017

कमर दर्द मे लाभदायक योग आसन



  कमर का दर्म कमर तोड़ देता है। कमर का दर्द असहनीय होता है। पीठ दर्द, कमर दर्द, सरवाइकल और कमर से जुड़ी अन्य समस्याएं आम हो गई है। डॉक्टर भी कहते हैं कि इसका सबसे अच्छा इलाज योग (Yoga for Back pain) ही है। आओ जानते हैं कि वह कौन से आसन हैं जिससे कमर का दर्द ठीक हो जाता है। ये चार आसन है- 

1॰भुजंगासन ( bhujangasana ) : 
भुजंगासन की गिनती भी पेट के बल लेटकर किए जाने वाले आसनों में की जाती है।


इस आसन की अंतिम अवस्था में हमारे शरीर की आकृति फन उठाए सांप की तरह प्रतीत होती है इसीलिए इसे भुजंगासन कहते हैं।


2  अर्ध-मत्स्येन्द्रासन ( ardha matsyendrasana ) :
 यह आसन सबसे महत्वपूर्ण है। कहते हैं कि मत्स्येन्द्रासन की रचना गोरखनाथ के गुरु स्वामी मत्स्येन्द्रनाथ ने की थी। वे इस आसन में ध्यानस्थ रहा करते थे।


मत्स्येन्द्रासन की आधी क्रिया को लेकर ही अर्ध-मत्स्येन्द्रासन प्रचलित हुआ।

3॰ मकरासन ( makarasana ) 
: मकरासन की गिनती पेट के बल लेटकर किए जाने वाले आसनों में की जाती है। इस आसन की अंतिम अवस्था में हमारे शरीर की आकृति मगर की तरह प्रतीत होती है इसीलिए इसे मकरासन कहते हैं।


मकरासन से जहां दमा और श्वांस संबंधी रोग समाप्त हो जाते हैं वहीं यह कमर दर्द में रामबाण औषधि है।


4.हलासन ( halasana ) :
 दो आसन पेट के बल करने के बाद अब पीठ के बील किए जाने वाले आसनों में हलासन करें। हलासन करते वक्त शरीर की स्थित हल के समान हो जाती है इसीलिए इसे हलासन कहते हैं।

Friday, June 23, 2017

सिरदर्द से निजात पाने के योग आसन



आजकल की तनाव भरी जिंदगी में सिरदर्द होना आम बात है| हर उम्र के लोग अकसर इसकी शिकायत करते हैं। कभी कभी तो सिददर्द ऑफिस में ही शुरु हो जाता है| लगातार कंप्‍यूटर के सामने बैठ कर आंखें गड़ाए रखने के कारण ऐसा होता है। सरदर्द दूर करने के लिए लोग कई तरह की दवाइयां भी लेते हैं। यहाँ तक की कई बार तो सिर दर्द से छुटकारा पाने के लिए लोग काफी पैसे भी खर्च करते हैं।
दवाइया और चाय-कॉफी पी लेने से सरदर्द से छुटकारा भी मिल जाता है| लेकिन क्या आप जानते है यह स्थाई इलाज नहीं है| बार बार दवाई का सेवन भी शरीर के लिए अच्छा नहीं है| क्योकि वैसे तो सिरदर्द थकान या भूख के वजह से होता है| लेकिन कई बार इसके पीछे की वजह अत्यधिक तनाव और आँखों की कमजोरी भी होता है|
सिरदर्द की दवाई से आँखों की रौशनी तो ठीक नहीं होती| इसलिए सरदर्द की समस्या भले ही आम हो लेकिन लगातार बानी रहे तो परेशानी का कारण बन जाती है| इसलिए यदि आप अक्सर सिरदर्द से परेशान हैं और बात-बात पर तनाव लेते हैं तो यह योगासन आपके काम का है। इससे आपकी सिरदर्द की समस्या जड़ से खत्म हो जाएगी|
शीतली प्राणायाम
शीतली प्राणायाम भी सिरदर्द की समस्या से निजाद पाने का बेहतरीन तरीका है| इससे तनाव दूर होता है और दिमाग शांत रहता है| इस आसन का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले तो जमीन पर सुखासन की स्तिथि में बैठ जाएं। इसके बाद जीभ को बाहर निकालें और मुंह से गहरी सांस लीजिये| आपको सांस कुछ इस तरह से लेना है की की जीभ से होकर हवा शरीर के भीतर प्रवेश करें। इसके बाद मुंह बंद करें और नाक के छिद्रों से सांस छोड़ें। इस क्रिया को 8-10 बार तक दोहराये|पालभाति आपकी मदद कर सकता है| कपालभाति में श्वास को शक्ति पूर्वक बाहर छोड़ने में ही पूरा ध्यान दिया जाता है। इस आसन में श्वास को भरने के लिए प्रयत्न नहीं किया जाता है| बल्कि अपने आप जितना श्वास अन्दर जाता है उतना जाने देते है|
सरदर्द से निजाद पाना चाहते है तो इस प्राणायाम को 5 मिनिट तक अवश्य ही करना चाहिए| इसके अतरिक्त इस प्राणायाम को करते समय मन में सोचना चाहिए की जैसे ही मैं श्वास को बाहर निकल रहा हूँ, इसके साथ मेरे शरीर के समस्त रोग भी बाहर निकल रहे है। वैसे तो इस प्राणायम का अभ्यास 5 मिनट रोज करना चाहिए लेकिन शुरवात कम समय से की जा सकती है|
वज्रासन
वज्रासन की मदद से आप सिरदर्द से निजात पा सकते है| और यदि आपको माइग्रेन है, तब भी यह आसन आपको आराम पहुँचाता है| वज्रासन करने से शरीर को मजबूती मिलती है। वज्रासन को खाना खाने के कुछ देर बाद भी किया जा सकता है| इसे करने के लिए खाने के बाद कुछ देर रुकें। फिर समतल जगह पर आसन बिछाकर उसपर घुटनों को मोड़कर बैठे|
आपके बैठने की स्तिथि इस तरह से होनी चाहिए की पैरों के पंजे पीछे की ओर हो जाएं और नितंब दोनों एड़ियों के बीच में रहे। अब अपने दोनों पैरों के अंगूठे आपस में मिलाकर रखें। इस बात का भी ध्यान रखें की एड़ियों के बीच अंतर रहे| इसके पश्चात अपने दोनों हाथों को घुटनों पर रखें।
इस वक्त आपका शरीर बिल्कुल सीधा होना चाहिए| अब हाथों और शरीर को ढीला छोड़ दें। इसके पश्चात आंखें बंद रखें और सांस लेने और छोड़ने का काम करे। इसी अवस्था में कुछ देर यूं ही बैठे रहें। यह आसन को हर रोज खाने के बाद करें। यह आसन ना केवल Headache Relief के लिए बल्कि पेट संबंधी बीमारियों के लिए भी फायदेमंद है।
अनुलोम विलोंम प्राणायाम
आपने अक्सर देखा होगा कई बार आपके सिरदर्द के साथ पेट और पीठ में भी दर्द बना रहता है| दरहसल यह दर्द पेट में होने वाली गैस के कारण होता है| यदि गैस के कारण आपको सिरदर्द है तो अनुलोम विलोंम प्राणायाम करे।
इसे करने के लिए सबसे पहले सुखासन
या पद्मासन में बैठें। शुरुवात और अन्त भी हमेशा बाये नथुने से ही करनी है। पहले नाक का दाया नथुना बंद करें व बाये से लंबी सांस लें। फिर बाये को बंद करके, दाया वाले से लंबी सांस छोडें|


अब दाया से लंबी सांस लें व बाये वाले से छोडें| आपको यही दाया-दाया, बाया-बाया क्रम रखना है| यह प्रक्रिया 10-15 मिनट तक दोहराये| तीन मिनिट से प्रारम्भ करके इस प्राणायाम को 10 मिनिट तक किया जा सकता है।

कपालभाति प्राणायाम
ठण्ड के दिनों में सर्दी की समस्याए आम है| सर्दी के कारण भी सरदर्द बने रहता है| ठण्ड के दिनों में कानो में जाने वाली शीत हवाए भी सिरदर्द का कारण बनती है| ऐसे में सर दर्द से राहत दिलाने में कपालभाति आपकी मदद कर सकता है| कपालभाति में श्वास को शक्ति पूर्वक बाहर छोड़ने में ही पूरा ध्यान दिया जाता है। इस आसन में श्वास को भरने के लिए प्रयत्न नहीं किया जाता है| बल्कि अपने आप जितना श्वास अन्दर जाता है उतना जाने देते है|
सरदर्द से निजात पाना चाहते है तो इस प्राणायाम को 5 मिनिट तक अवश्य ही करना चाहिए| इसके अतरिक्त इस प्राणायाम को करते समय मन में सोचना चाहिए की जैसे ही मैं श्वास को बाहर निकल रहा हूँ, इसके साथ मेरे शरीर के समस्त रोग भी बाहर निकल रहे है। वैसे तो इस प्राणायम का अभ्यास 5 मिनट रोज करना चाहिए लेकिन शुरवात कम समय से की जा सकती है|

पीठ के दर्द के लिये योग
क्या अक्सर आप का हाथ पीठ के ऊपर के हिस्से पर आसानी से चला जाता है ? अनजाने में उसे आराम पहुँचाने में या पीड़ा कम करने में हल्का धड़कने वाला दर्द होता है ? आप रसोई में घर के रोज के काम कर रहे हैं या साथी की मेज़ पर झुके हुये हैं और अचानक आप को पीठ के निचे के हिस्से पर दर्द महसूस होता है ? आप को जीर्ण या पुराना पीठ का दर्द न हो | फिर भी कभी कभी होने वाला यह दर्द हमंऔ सतर्क करने के लिये काफी है, कि हमें सीधा बैठना होगा और प्रतिदिन पाँच मिनट देने होंगे जिससें पीठ की मांसपेशियों योग के अभ्यास से मजबूत हो सके | इसे आज से शुरू करे और प्रतिदिन कुछ समय देना शुरू करें | इसके परिणाम बहुत अच्छे हैं | इससे आपकी पीठ स्वस्थ रहती है |
पीठ के दर्द के लिये ७ योग मुद्रायें

हमारे पीठ की तीन तरह की गति होती है : ऊपर की ओर खिंचाव, घुमाव, आगे और पीछे की ओर झुकना | निन्म दी गई योग मुद्राओं/आसन के निरंतर अभ्यास से यह सुनिश्चित होगा कि जो मांसपेशी इन गतिओं की सहायता करती है, वे मजबूत हो सकें |
आप इन में से कुछ योग मुद्राओं को कभी भी और कहीं भी कर सकते हैं |यदि सुबह आप इसे करना भूल भी गये तो आप दिन में कार्य स्थल में इसके लिये पाँच मिनट निकाल सकते हैं या जब आपकी पीठ इसका संकेत दे कि उसे इनकी आवश्यकता है |
(चटाई ) पर कर के देखें | कुर्सी पर बैठ कर भी आप इस योग मुद्रा तबदीली कर सकते हैं |
सभी दिशा में पीठ का खिंचाव– इस क्रम से आप की पीठ को सभी दिशा में खिंचाव मिलता है और पीठ के दर्द से प्रभावकारी राहत मिलती है | लंबे समय कार चलाने के बाद, कार से उतरकर, अपने पैर जमीन में स्थिर रखे और इन सभी खिंचाव को करें |
त्रिकोणासन ( त्रिकोण मुद्रा ): 

हाथ,पैर, और उदरीय मांसपेशियों को मजबूत करने में सहायक और रीड की हड्डी में लचीलापन | यदि आप रसोई में काफी देर से खड़े है तो कुछ सेकंडों के लिये ब्रेक लें और त्रिकोण मुद्रा को करें |
पवन मुक्तासन (घुटने ने से ठोड़ी में दबाव) : 

कूल्हे के जोड़ों में रक्त परिसंचरण में वृद्धि और पीठ के निचे के भाग में पीड़ा से आराम | इसे अपने योग के आसन
कटिचक्रासन(खड़े रहते हुये रीड की हड्डी में घुमाव ) :

 इससे रीड की हड्डी का लचीलापन बढ़ता है और हाथ और पैर की मांसपेशियों को शक्ति मिलती है | आप ठीक से सीधे खड़े रह सकते हैं |
अर्ध मत्सेंयेंद्रआसन
 (आधे रीड की हड्डी में बैठे हुये घुमाव) और
मार्जरीआसन (मार्जर खिंचाव): इससे रीड की हड्डी कोमल और लचीली होती है | इस योग मुद्रा में तबदीली आप कुर्सी में बैठे हुये कर सकते हैं |
भुजंगासन (सर्प मुद्रा) :

 इससे पीठ की मांसपेशियों की मालिश होती है और पीठ के ऊपर के भाग में लचीलापन आता है | क्या आप ने बच्चों को इस मुद्रा में टीवी देखते हुये या आलस करते हुये देखा है ? सोफे से उतर कर उनके साथ हो जायें |
अन्य लाभ : इन योग मुद्राओं/आसन से शरीर के कई अंग जैसे अग्न्याशय,गुर्दे, आमाशय, छोटी आंत, यकृत, पित्ताशय की मालिश और शक्ति प्रदान करता है |
निर्देश : सिर्फ कुछ योग मुद्रा/आसन का अभ्यास कर के ही अपने आप को सीमित न करें | अपने योग दिनचर्या में विविधता लायें | उपरोक्त योग आसन पीठ की मांसपेशियों में शक्ति देता है | लेकिन हमें हमारे शरीर सभी अंगों पर ध्यान देना होगा जिससे पूरा शरीर स्वस्थ रह सकें |इसके लिये आवश्यक है कि हमें विभिन्न योग मुद्राओं और श्वास प्रक्रियाओं का अभ्यास करना चाहियें |

घुटनो के दर्द के लिए योग (Asan for knee Pain)


घुटनो के दर्द के लिए योग
हम सभी जानते है ,घुटने के दर्द दुनिया भर के बच्चो को और वयस्कों में पाया जाता है ,जो एक आम बीमारी है। असल में घुटने की बीमारी उम्र के साथ बढ़ती है।घुटने के दर्द में हम दवा से पहले के स्तर में घरेलु उपचार का उपयोग करते है ,लेकिन कभी कभी आपको चलने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है इस रूप में परामर्श चिकित्सक आवश्यक होगा।
   जोड़ो के पुराने दर्द के इलाज के लिए योग बहुत विशेष रूप से लाभदाई है। घुटने के दर्द के लिये सकारात्मक परिणाम के लिए दिए गए आसन क्रमशः करना जरुरी है। घुटने के लिए विशेष रूप से जो आसन दिए गए है, जैसे के ताड़ासन(Tadasana),मकरासन (Makrasana),वीरासन(Veerasana),त्रिकोणासन (Trikonasana).
मकरासन

विधिः
पेट के बल लेट जाइए। दोनों हाथ को कोहनियों को मिलाकर स्टैंड बनाते हुए हथेलियों को ठोडी के निचे लगाइए। छाती को ऊपर उठाइए। कोहनियों एवं पैरों को मिलाकर रखें।
अब श्वास भरते हुए पैरो को क्रमशः पहले एक-एक तथा बाद में दोनों पैरों को एक साथ मोड़ना है। मोड़ते समय पैरो को एड़ियां नितम्ब से स्पेर्श करें। श्वास बाहर निकालते हुए पैरों को सीधा करें। इस प्रकार से ये आसान २०-२५ बार करें।
ताड़ासन

विधिः
पूर्ववत् खड़े होकर दोनों हाथो को पाश्वभाग से दीर्घ श्वास भरते हुए ऊपर उठाए। जैसे जैसे हाथ ऊपर उठे वैसे वैसे ही पैर की एड़िया भी उठी रहनी चाहिए। शरीर का भार पंजो पर रहेगा एवं शरीर ऊपर की ओर पूरी तराह से तना होगा।
लाभ
यह आसन घुटनो के स्नायु को मजबूत करता है ,यह आसान कद वृद्धि के लिए सर्वोत्तम है। इससे समस्त शरीर के स्नायु ओ को सक्रीय एवं विकसित करता है।



वीरासन


विधिः
१. समतल भूमि पर नरम आसन बिछाकर वज्रासन की स्थिति में बैठ जाएं।
२. अब दोनों पैरो को थोड़ा फैलायें और हिप्स को भी भूमि पर टीकाकार सीधे में रखे।
३. अब दोनों हाथों को घुटनो पर सीधा तानकर रखें।
४. कंधो को आराम की मुद्रा में रखे और तनकर बैठे। सिर को सीधा रखें और सामने की और देखे।
लाभ:
जंघा और पावं शक्तिशाली बनते है। शरीर का भारीपन दूर होता है। वीरासन योग में जंघाओं,घुटनो,पैरों एवं कोहनियो को आराम मिलता है। शरीर को सुडोल बनायें रखने के लिए ये योग उपयोगी है।
त्रिकोणासन

विधिः
१. दोनों पैरो के बीच में लगभग डेढ़ फुट का अन्तर रखते हुए सीधे खड़े हो जाएँ। दोनों हाथ कंधो के समानान्तर पाश्व भाग मे खुले हुए हों।
२. श्वास अन्दर भरते हुए बाएं हाथ को सामने से लेते हुए बाएं पंजे के पास भूमि पर टिका दें अथवा पंजे को एड़ी का पास लगायें तथा दाएं हाथ को ऊपर की तरफ उठाकर गर्दन को दाए ओर घुमाते हुए दाए हाथ को देखें ,फिर श्वास छोड़ते हुए पूर्व स्थिति में आकर इस तरह अभ्यास को बार बार करें।
लाभ: 
 घुटनो को आराम मिलता है और कटी प्रदेश लचीला बनता है। पाश्वा भाग की चर्बी को कम करता है। छाती का विकास होता है।

रोगों के अनुसार योग आसन / Yoga posture as per diseases


मोटापा : 
वैसे तो मात्र आंजनेय आसन ही लाभयायक सिद्ध होगा लेकिन आप करना चाहे तो ये भी कर सकते हैं- वज्रासन, मण्डूकासन, उत्तानमण्डूसकासन, उत्तानकूर्मासन, उष्ट्रासन, चक्रासन, उत्तानपादासन, सर्वागांसन व धनुरासन, भुजंगासन, पवनमुक्तासन, कटिचक्रासन, कोणासन, उर्ध्वाहस्तोहत्तातनासन और पद्मासन।

कमर और पेट की चर्बी घटाएं : 
ऑफिस में लगातार कुर्सी पर बैठे रहने या अन्य किसी कारण से अब अधिकतर लोगों के पेट निकल आए हैं और कमर पर भी अच्छी-खासी चर्बी चढ़ गई है। इस चर्बी को घटाने के लिए कटि चक्रासन के अलावा तोलांगुलासन भी उत्तम है, लेकिन आप चाहे तो ये आसन भी आजमा सकते हैं- वृक्षासन, ताड़ासन, त्रिकोणासन, पादस्तासन, आंजनेय आसन और वीरभद्रासन भी कर सकते हैं।
कमर दर्द : 
मकरासन, भुजंगासन, हलासन और अर्ध-मत्स्येन्द्रासन के अभ्यास से कमर का दर्द मिट जाता है।
कब्ज आज का महारोग है। यह अनियमित भोजन, मांस, फास्ट-फूड मैदा, धूम्रपान, मदिरा आदि का सेवन करने से होती है। इसके अलावा तनाव और अनिद्रा भी इसके कारण हैं। योगाभ्यास के विभिन्न आसनों और मुद्राओं के माध्यम से हम इस रोग से छुटकारा पा सकते हैं।
कब्ज रोग के लिए : 
वज्रासन, सुप्तवज्रासन, मयूरासन, पश्चिचमोत्तानासन, धनुरासन मत्स्यासन, कूर्मासन, चक्रासन, योग मुद्रा और अग्रिसार क्रिया लाभदायक रहती हैं।
झड़ते बालों के लिए : 
बालों के झड़ने का कारण है शहर का प्रदूषण, धूल, धुआं और दूषित भोजन-पानी। इसके अलावा तनाव और अवसाद। प्रदूषण से त्वचा रूखी हो जाती है रूखी त्वचा में डैंड्रफ हो जाते हैं और यह रूखी त्वचा चर्म रोग का कारण भी बन सकती है। ये करें : वज्रासन के बाद कुर्मासन करें फिर उष्ट्रासन करें। पवनमुक्तासन के बाद मत्स्यासन करें फिर कुछ देर विश्राम करने के बाद शीर्षासन करें। आसनों को करने के बाद अनुलोम-विलोम प्राणायम करें और फिर पांच मिनट का ध्यान करें।
   तनाव भरा जीवन, नशे की प्रवृत्ति और प्रदूषण भरे माहौल में पुरुषों की सेक्स लाइफ का स्तर लगातर गिरता जा रहा है। कहते हैं कि सुखी जीवन के लिए सेक्स के प्रति संतु‍ष्टि होना आवश्यक है, जिससे जीवन के द्वंद्व मिटते हैं।
   सेक्स लाइफ में सुधार के त्रिस्तर : शरीर, प्राण और मन अर्थात आसन से शरीर, प्राणायम से प्राण और ध्यान से मन में शांति और शक्ति संचार होता है। आप यदि प्रतिदिन सूर्यनमस्कार करेंगे तो फायदा होगा।
  

Thursday, June 22, 2017

जलोदर(ascites)) के आयुर्वेदिक होम्योपैथिक घरेलू उपचार


उदरगुहा में द्रव संचय होकर उदर (पेट) का बड़ा दिखना जलोदर (Ascites) कहलाता है। यह अशोथयुक्त (Noninflammatory) होता है। यह रोग नही बल्कि हृदय, वृक्क, यकृत इत्यादि में उत्पन्न हुए विकारों का प्रधान लक्षण है। यकृत के प्रतिहारिणी (portal) रक्तसंचरण की बाधा हमेशा तथा विशेष रूप से दिखाई देनेवाले जलोदर का सर्वसाधारण कारण है। यह बाधा कर्कट (Cancer) और सूत्रणरोग (Cirrhosis) जैसे यकृत के अन्दर कुछ विकारों में तथा आमाशय, ग्रहणी, अग्न्याशय इत्यादि एवं विदर (Fissure) में बढ़ी हुई लसीका ग्रंथियों जैसे यकृत के बाहर के कुछ विकारों में प्रतिहारिणी शिराओं पर दबाव पड़ने से उत्पन्न होती है।
  जलोदर रोग में इंसान के पेट के अंदर अधिक मात्रा में पानी भर जाता है और पानी किसी भी तरह से यानि मुख या मूत्र के मार्ग से बाहर नहीं आ पता है और फिर रोगी को चलने.फिरने और उठने-बैठने में बहुत दर्द होता है। जलोदर रोग में रोगी का पेट फूल जाता है। जलोदर अपने आप में कोई रोग नहीं है। यह गुर्दे की बीमारी, दिल की बीमारी, प्लीहा रोग और रक्तवाहिकाओं आदि बीमारियों के होने का लक्षण है। इस रोग में इंसान के पेडू में दर्द होता रहता है। वैदिक वाटिका आपको कुछ घरेलू नुस्खे बता रही है जससे जलोदर रोग से बचा जा सकता है।
जलोदर रोग का घरेलू उपचार
आधा कप पानी में पच्चीस ग्राम करेलों का रस मिलाकर रोज तीन बार सेवन करने से जलोदर रोग ठीक हो जाता है।
*ढ़ाई सौ ग्राम पानी में 25 ग्राम चने डालकर इसे उबाल लें। जब आधा पानी बच जाए तब इसे छाने और दो सप्ताह तक इस पानी को पीते रहें। इससे जलोदर रोग पूरी तरह से ठीक हो जाता है। यह बहुत कारगर घरेलू नुस्खा है।
*गर्मियों के मौसम में रोज खरबूजे का सेवन करने से जलोदर रोग ठीक होता है।
*जलोदर की समस्या से ग्रसित इंसान को नियमित रूप से गाजर का जूस पीना चाहिए।
*आधा कप पानी में मूली के पत्तों का रस मिलाकर तीन टाइम पीते रहने से जलोदर रोग से मुक्ति मिलती है।
काली मिर्च, सौंठ और पीपली का थोड़ा-थोड़ा चूर्ण को छाछ में डालकर पीने से जलोदर की बीमारी ठीक होती है।
*खाना खाने के बाद हमेशा पचास ग्राम की मात्रा में गुड़ खाते रहने से जलोदर की बीमारी में फायदा मिलता है।



एक सरल घरेलू नुस्खा है सुबह और शाम दो.दो आम खाने से जलोदर रोग ठीक हो सकता है।

*डेढ़ सौ ग्राम पानी में लहसुन के रस की आठ बूंदें मिलाकर पीने से जलोदर रोग पूरी तरह से ठीक हो सकता है।
*कुछ दिनों तक लगातार बीस ग्राम गुड में दस ग्राम अदरक के रस को मिलाकर खाने से जलोदर रोग ठीक हो जाता है।
*गौमूत्र मे अजवाइन को 24 घंटों के लिए भिगों लें और इसे सुखाकर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में सुबह.शाम लेते रहने से जलोदर शांत हो जाता है।
*प्याज को कच्चा चबाने से पेशाब की रूकावट ठीक हो जाती है और पेशाब भी खुलकर होती है।
पेट मे पानी भर जाने का होम्योपैथिक  इलाज -

आर्सेनिक 30, 200- 
रोगी कमजोर होता जाये, प्यास तो ज्यादा लगे पर पानी कम पीये, रात को ऐसा लगे कि साँस बंद होने वाली है, बेचैनी रहे, रोगी बिस्तर छोड़कर भागना चाहे तो देनी चाहिये ।

चायना 30, 200– 
यकृत या प्लीहा की बीमारी के कारण रोग हुआ हो, शोथ भी हो तो देनी चाहिये ।
आर्सेनिक 30, 200- 
रोगी कमजोर होता जाये, प्यास तो ज्यादा लगे पर पानी कम पीये, रात को ऐसा लगे कि साँस बंद होने वाली है, बेचैनी रहे, रोगी बिस्तर छोड़कर भागना चाहे तो देनी चाहिये ।
चायना 30, 200– यकृत या प्लीहा की बीमारी के कारण रोग हुआ हो, शोथ भी हो तो देनी चाहिये ।
सल्फर 30, 200- 
किसी भी चर्म-रोग के दब जाने के कारण रोग पैदा हो जाये, शरीर की त्वचा गंदी-सी लगे, चेहरे पर सहज ही पसीना आ जाये, नाड़ी तेज चले, रोगी को तन्द्रा बनी रहे, विना दर्द का अतिसार हो तो दें।



एसिड फ्लोर 6, 30–
 व्हिस्की पीने से रोग हुआ हो जिसमें यकृत कड़ा और बड़ा हो जाये तो लाभप्रद है ।
एपोसाइनम Q, 200– 
रोग के साथ में पाकस्थली में उत्तेजना, पानी पीते ही वमन हो जाना, कीचड़ की भाँति का मूत्र होना, अतिसार हो, शरीर में किसी भी प्रकार का शोथ ही तो देनी चाहिये ।
सेनिसियो 30- 

जलोदर के कारण पेट बहुत कड़ा हो जाये, मूत्र लाल रंग का हो जो कभी कम और कभी अधिक मात्रा में ही, निम्नांगों में शोथ हो तो देनी चाहिये ।
एपिस मेल 30, 200-
 मूत्र अत्यधिक मात्रा में हो पर प्यास नहीं लगे, शरीर में स्थान-स्थान पर डंक मारने जैसा दर्द और जलन हो तो यह दवा बहुत लाभकारी है

कब्ज और गैस की समस्या के लिए योग | Yoga to Relieve Constipation



    कुछ लोगों के लिए कब्ज एक दैनिक मामला बन गया है।और, हम आम तौर पर इसे एक बीमारी मान लेते है ; जबकि यह एक लक्षण है। यदि सही समय पर इसका इलाज़ नहीं किया गया तो यह श्रोणि रोगों और पेट के विकारों में बदल सकता है । लेकिन हम अक्सर कब्ज को लापरवाही से लेते हैं।
कब्ज कैसे होता  है-  
कब्ज अलग अलग लोगों के लिए अलग अलग मायने रखता है। कुछ लोगों के लिए यह असामयिक मल हो सकता है, और कुछ लोगों के लिए केवल कठिन मल का पारित होना हो सकता है । जो भी मामला हो, इस समस्या का मूल कारण हमारी अस्वास्थ्यकर जीवनशैली है।
अनुचित काम का समय, आराम करने के लिए कम समय और बहुत अधिक जंक फूड का सेवन हमारे शरीर को नुकसान पहुचाता है जिसे कि हम अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते है । इसके अलावा आहार में ताज़े फल और हरी पत्तेदार सब्जियों की कमी से, विशेष रूप से भोजन जिसमें फाइबर कम हो, कब्ज का कारण बन सकता है। पानी का कम सेवन भी एक और कारण है।
कब्ज के लक्षण 
अनियमित या कम मात्रा में मल त्याग
मल त्यागने में दबाव
छोटे या कठिन मल का पारित होना
पेट में दर्द और ऐंठन
फूला हुआ पेट
कब्ज का इलाज कैसे करें 
कब्ज की समस्या को इसकी प्रारंभिक अवस्था में संबोधित किया जाना चाहिए। समय पर इसकी देखभाल न करनेपर यह एक खतरनाक श्रोणि रोगों और अन्य पेट के विकारों में परिवर्तित हो सकती है।
कब्ज का इलाज करने के लिए कुछ सुझाव:
हमारे आहार के माध्यम से हम कब्ज का सरल तरीके से इलाज कर सकते हैं । ताजी पत्तेदार सब्जियों और फलों जैसे फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों का अधिक से अधिक सेवन करें ।
पानी का खूब सेवन करें। सुबह में गर्म तरल पदार्थ का सेवन बहुत उपयोगी हो सकता है।
दैनिक मल त्याग के लिए एक नियमित दिनचर्या स्थापित करें ।
नियमित योगाभ्यास करें ।
कब्ज का इलाज करने के विभिन्न तरीके हैं। रेचक और अन्य उपचार उपलब्ध हैं जो कब्ज से राहत प्रदान कर सकते हैं। लेकिन यह ठीक ही कहा गया है की - निवारण हमेशा इलाज से बेहतर है और योग कब्ज को रोकने का सबसे अच्छा तरीका है।
योग, कब्ज को दूर करने का एक प्राकृतिक तरीका | 
कुछ ही मिनटों का नियमित योग अभ्यास अनियमित मल त्यागने की तकलीफ़ को सुधारने में मदद करता है, पेट में खिंचाव और पेट फूलने की समस्या से भी राहत दिलाता है व सारा दिन सुख एवं शांति रखने में भी मदद करता है ।
योग हमारे शरीर को तरोताज़ा करता है और शरीर में रक्त औरऑक्सीजन के प्रवाह को भी बढ़ाने में मदद करता है। अधिकांश योग आसनों में श्रोणि का अच्छा संचलन शामिल होने के कारण, योग अभ्यास वास्तव में कब्ज से राहत दिलाने में मदद कर सकता हैं।
कब्ज दूर करने के लिए पाँच योगासन |
अर्ध मत्स्येंद्रासन 
इस आसन के महत्वपूर्ण शारीरिक पहलू यह हैं की - यह अग्न्याशय, जिगर, तिल्ली, गुर्दे, पेट, और आरोही और अवरोही बृहदान्त्र (colon) को उत्तेजित करता है , इसलिए मल त्यागने में सुधार और कब्ज से राहत प्रदान करता है ।
हलासन 
यह आसन यकृत और आंत को आराम प्रदान करता है। यह एक ऐसा आसन है जो श्रोणि क्षेत्र में रक्त परिसंचरण को बढ़ाता है और पाचन को भी बढ़ाता है।

पवनमुक्तासन 
जैसा नाम से ही पता चलता है, यह आसन शरीर से गैस को बाहर निकालने में मदद करता है। हम में से ज्यादातर नियमित कब्ज से पीड़ित लोगों के लिए यह एक आम परेशानी है। यह आसन अपच/ मन्दाग्नि सहित कई पाचन संबंधी विकार को भी दूर करने में मदद कर सकता है । यह अम्लपित्त (Acid reflux ) से राहत दिलाने में भी मदद करता है, जो की अपच के कारण ही होता है ।
मयूरासन |
यह आसन पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है और अस्वास्थ्यकर भोजन के प्रभाव को नष्ट करता है। यह आसन पेट दबाव को बढ़ाता है ,जो प्लीहा और यकृत एनलार्ज्मेंट्स को कम कर देता है । यह आसन आंतो को भी मजबूत बनाता है। इस तरह से कब्ज की समस्या से राहत दिलाता में मदद करता है ।
तितली मुद्रा |
   तितली आसन को करते समय आपकी मुद्रा तितली के समान हो जाती हैं| इसिलिये इस आसान को तितली या Butterfly आसान के नाम से जाना जाता हैं| तितली आसन आपके पैरों को मजबूत बनता हैं| तितली आसान एक सरल आसन हैं|
तितली आसन को करने के नियम 
इस आसन को करने के लिए आपको सबसे पहले किसी समतल स्थान पर बैठ जाइए| और दोनों पैरों को सामने की ओर ढीला छोड़कर फैला ले| अब अपने दोनो पैरों को घुटने से अन्दर की ओर मोड़ ले| और दोनों तलवों को आपस में मिलाये |
   अब अपने दोनों हाथों से पैरों की उँगलियों को पकडे| और अपनी दोनों पैरों की एड़ी को खीचकर अपने शरीर के नजदीक ले आये| अपने हाथों और शरीर को सीधा रखने का प्रयास करें|
सामान्य गति से धीरे-धीरे साँस ले और अपने पैरों को तितली के समान ऊपर और नीचे जल्दी जल्दी ले जाएँ| इस क्रिया को तीस से चालीस बार करें| और इसके बाद दोनों पैरों को धीरे-धीरे सीधा करें|
     चिंता करना बंद करें और अभ्यास शुरू करें! आपके दैनिक समय के बस कुछ ही पल के अभ्यास से आप एक स्वस्थ पाचन तंत्र प्राप्त कर सकते है तथा परिणामस्वरूप खुश भी रह सकते हैं । परंतु अपने आहार में सुधार लाना मत भूलिएगा, जैसे की फाइबर रिच खाना, फल और सब्ज़ी और पानी का पर्याप्त सेवन कब्ज को दूर रखने में आपको मदद करेगा । योग का नियमित रूप से अभ्यास शरीर और मन के विकास में मदद करता है, साथ ही इसके कई स्वास्थ्य संबंधी लाभ भी है परंतु फिर भी यह दवा का विकल्प नहीं है।
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Wednesday, June 21, 2017

मिर्गी रोग जड़ से नष्ट करें योग आसन और प्राणायाम से



   मिर्गी एक तरह का न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर है। इस बीमारी से पीडि़त व्‍यक्ति को बार-बार दौरे पड़ते हैं। व्यक्ति का दिमागी संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाता है। इस समस्या में रोगी को शरीर में खिंचाव होने लगता है इसके अलावा हाथ तथा पैरो में अकड़न होने लगती है। और वह व्यक्ति मूर्छित होकर गिर पड़ता है। योग बहुत प्रभावशाली है, मिर्गी में भी लोगो को इसका फायदा मिलता है। विशेषज्ञों की मानें तो योग के जरिये मिर्गी को भी ठीक किया जा सकता है। इसके लिए अनुलोम-विलोम को सबसे बेहतर माना जाता है।

अनुलोम-विलोम प्राणायाम

अनुलोम विलोम प्राणायम से मिर्गी का इलाज किया जा सकता है। इसे करने के लिए सबसे पहले सुखासन में बैठ जाये। अब इस आसान की शुरुवात नाक के बाये छिद्र से करे। सर्वप्रथम उंगली की सहायता से नाक का दाया छिद्र बंद करें व बाये छिद्र से लंबी सांस लें। इसके बाद बायें छिद्र को बंद करे, तथा दायें वाले छिद्र से लम्बी सांस को छोड़े। इस पूरी प्रक्रिया को कम से कम 10-15 मिनट तक दोहराइएं। साँस को छोड़ने और लेने का काम सहजता से करे। गलत तरीके से करने पर नुकसान हो सकता है।

योग के अन्य आसन  प्राणायाम जो मिर्गी में फायदेमंद


कपालभाति प्राणायाम


    कपालभाति प्राणायाम दिन में सुबह के समय, सूर्योदय के पहले करने पर अधिक लाभ होता है। इस प्राणायाम अभ्यास को नया नया शुरू करने वाले व्यक्ति को दो से तीन मिनट में थकान महसूस हो सकती है| परंतु एक या दो हफ्तों के अभ्यास के बाद कोई भी सामान्य व्यक्ति लगातार पांच मिनट से अधिक समय तक कपालभाति प्राणायाम करनें के लिए सक्षम हो जाता है।
कपालभाति प्राणायाम हमेशा शुद्ध वातावरण में ही करना चाहिए। पद्मासन में बैठ कर इस आसान को करने पर अधिक लाभ होता है।
कपालभाति प्राणायाम करने के लिए किसी अच्छी शांत और स्वच्छ जगह का चयन करके, वहाँ पर आसन बिछा कर पद्मासन में बैठ जाए।
अब आगे कपालभाति प्राणायाम की शुरुआत करने के लिए श्वास सामान्य गति से शरीर के अंदर की और लेनी होती है। और तेज़ गति से बाहर निकालनी होती है। यह पूरी प्रक्रिया एक रिद्म में होनी चाहिए।
प्रत्येक सेकंड में एक बार पूरी सांस को तेजी के साथ नाक से बाहर छोड़ें, इससे पेट अन्दर चला जाएगा। कपालभाती में प्रत्येक सेकंड में एक बार सांस को तेजी से बाहर छोड़ने के लिए ही प्रयास करना होता है| साँस को छोड़ने के बाद, सांस को बाहर न रोककर बिना प्रयास किये सामान्य रूप से सांस को अन्दर आने दें| प्रत्येक सेकंड में साँस को तेजी से बाहर छोड़ते रहे| इस हिसाब से एक मिनट में सांठ बार और कुल पाँच मिनट में तीनसौ बार आप वायु (सांस) बाहर फैंकनें की क्रिया करें। (थकान महसूस होने पर बीच बीच में रुक कर विश्राम अवश्य लेते रहें)।
शुरुआत में अगर एक मिनट में साठ बार सांस बाहर फैंकने में थकान हों, तो एक मिनट में तीस से चालीस बार सांस बाहर निकालें और अभ्यास बढ्ने के साथ साथ गति को प्रति मिनट साठ सांस तक ले जायें।
कपालभाति प्राणायाम का अभ्यास लंबे समय तक सही तरीके से करने पर इसकी अवधि पांच मिनट से पंद्रह मिनट तक बढ़ाई जा सकती है। यानी की पांच-पांच मिनट के तीन चरण।
AIDS, कैंसर, एलर्जी, टीबी, हेपीटाइटस और दूसरी ऐसी जटिल बीमारी के रोगी को कपालभाति प्राणायाम दिन में तीस मिनट तक करना चाहिए। और अगर ऐसा रोगी दिन में सुबह और शाम दोनों समय कपालभाति प्राणायाम तीस तीस मिनट कर सके तो और भी बहेतर होगा।
स्वस्थ व्यक्ति कपालभाति प्राणायाम को प्रति दिन एक ही बार करे तो भी उसे बहुत अच्छे शारीरिक और मानसिक लाभ होता है।


भ्रामरी प्राणायाम 

सर्वप्रथम किसी स्वच्छ जगह का चयन करके, आसन बिछा कर पद्मासन अथवा सुखासन में बैठ जायें। मन को शांत कर के अपनी सांस सामान्य कर लें।
अब अपने दोनों हाथों को बगल में अपने दोनों कंधों के समांतर फैला लें, और फिर अपनी कोहनियों को मोड़ कर हाथों को अपने कानों के पास ले आयें। फिर अपनें दोनों नेत्रों (आँखों) को बंद कर लें|
उसके बाद अपने हाथों के दोनों अँगूठों से अपने दोनों कान बंद कर दें। (Note- भ्रामरी प्राणायाम करते वक्त कमर, गरदन और मस्तक स्थिर और सीधे रखने चाहिए)।
अब अपने दोनों हाथों की पहली उंगली को आँखों की भौहों के थोड़ा सा ऊपर लगा दें। और बाकी की तीन तीन उँगलियाँ अपनी आंखों पर लगा दीजिये।
अपने दोनों हाथों को ना तो अधिक दबाएं और ना ही एक दम फ्री छोड़ दें। अपने नाक के आस-पास दोनों तरफ से लगी हुई तीन-तीन उँगलियों से नाक पर हल्का सा दबाव बनायें।
दोनों हाथों को सही तरीके से लगा लेने के बाद अपने चित्त (मन) को अपनी दोनों आंखों के बीछ केन्द्रित करें। (यानि की अपना ध्यान अज्न चक्र पर केन्द्रित करें)।
और अब अपना मुह बिल्कुल बंद रखें और अपने नाक के माध्यम से सामान्य गति से सांस अंदर लें| फिर नाक के माध्यम से ही मधु-मक्खी जैसी आवाज़ (humming sound) करते हुए सांस बाहर निकालें। (Important- यह अभ्यास मुह को पूरी तरह से बंद कर के ही करना है)।
सांस बाहर निकालते हुए अगर “ॐ” का उच्चारण किया जाए तो इस प्राणायाम का लाभ अधिक बढ़ जाता है।
सांस अंदर लेने का समय करीब 3-5 सेकंड तक का होना चाहिए और बाहर छोड़ने का समय 15-20 सेकंड तक का होना चाहिए।
भ्रामरी प्राणायाम कुर्सी(chair) पर बैठ कर भी किया जा सकता है। परंतु यह अभ्यास सुबह के समय में सुखासन या पद्मासन में बैठ कर करने से अधिक लाभ होता है।






ताड़ासन 

इसके लिए सबसे पहले आप खड़े हो जाए और अपने कमर एवं गर्दन को सीधा रखें।
अब आप अपने हाथ को सिर के ऊपर करें और सांस लेते हुए धीरे धीरे पुरे शरीर को खींचें।
खिंचाव को पैर की अंगुली से लेकर हाथ की अंगुलियों तक महसूस करें।



इस अवस्था को कुछ समय के लिए बनाये रखें ओर सांस ले सांस छोड़े।
फिर सांस छोड़ते हुए धीरे धीरे अपने हाथ एवं शरीर को पहली अवस्था में लेकर आयें।
इस तरह से एक चक्र पूरा हुआ।
कम से कम इसे तीन से चार बार प्रैक्टिस करें।


नटराज आसान

सबसे पहले आराम की मुद्रा में खड़े हो जाएं.
शरीर का भार बाएं पैर पर स्थापित करें और दाएं घुटने को धीरे धीरे मोड़ें और पैर को ज़मीन से ऊपर उठाएं.
दाएं पैर को मोड़कर अपने पीछे ले जाएं.
दाएं हाथ से दाएं टखने को पकड़ें.
बाएं बांह को कंधे की ऊँचाई में उठाएं.
सांस छोड़ते हुए बाएं पैर को ज़मीन पर दबाएं और आगे की ओर झुकें.
दांए पैर को शरीर से दूर ले जाएं.
सिर और गर्दन को मेरूदंड की सीध में रखें.
इस मुद्रा में 15 से 30 सेकेण्ड तक बने रहें.



वृक्षासन
  • आप सबसे पहले सीधे खड़े हों जाएं या ताड़ासन में आ जाएं।
  • पैरों के बीच की जगह को कम करें और हाथों को सीधा रखें।
  • दायां पैर उठाएं और दाएं हाथ से टखना पकड़ लें।
  • दाईं एड़ी को दोनों हाथों की सहायता से बाईं जांघ के ऊपरी भाग यानी जोड़ पर रखें।
  • पंजों की दिशा नीचे की ओर हो और दाएं पांव के तलवे से जांघ को दबाएं।
  • ध्यान रहे मुड़े हुए पांव को दूसरे पांव के साथ समकोण बनाए।
  • अब हथेंलियों और अंगुलियों को प्रार्थना की मुद्रा में जोड़ें, ऊपर उठाएं और छाती पर रखें फिर धीरे-धीरे उन्हेंं उठाकर सिर से ऊपर ले जाएं।
  • आपके दोनों हाथ सिर से सटे होनी चाहिए।
  • कुछ समय तक शरीर का संतुलन बनाए रखें और इस अवस्था अपने हिसाब से धारण किये हुए रहे।
  • अब हाथ नीचे ले जाएं और मूल अवस्थाे में लौट आएं।
  • फिर इसी प्रक्रिया को दूसरे तरफ से करें।
  • यह एक चक्र हुआ।
  • इस तरह से आप 3 से 5 चक्र करें।

हस्तपादासन

सबसे पहले जमीन पर एक आसन बिछा लें।
इसके बाद सीधे खड़े हो जाएं। अब पैरों को एक दूसरे से दूर ले जाएं।
इसके बाद अपने दोनों हाथों का एक सीध में उपर की तरफ ले जाइये।



अब आप अपने हाथों को धीरे.धीरे पैरों तक ले जाएं और जमीन को छूएं और अपने सिर को घुटनों से लगाने की कोशिश करें।
साथ ही साथ अपनी उंगलियों के पोरों के जरिए भी जमीन को छूने की कोशिश करें।



जब आप हस्तपादासन योग को कर रहे हों तब अपनी सासों को सामान्य ही रखें।
आसन को पहले बहुत ही आराम से करें।
हस्तपादासन को दिन में दो बार करें।

सर्वांगासन

सर्वांगासन  करने की विधि-
अब बात आती है कि इस आसन को आसानी से कैसे किया जाए। पहले पहले लोग इस आसन को करने से घबराते हैं लेकिन नीचे दिए गए तरीके का अनुसरण करते हुए आप इसको बहुत सरलता के साथ कर सकते हैं।
पीठ के बल लेट जाएं।
हाथों को जांघों के पास रखें।
अब आप अपनें पैरों को पहले 30 डिग्री पर फिर 60 डिग्री और उसके बाद 90 डिग्री तक ले कर जाएं।



हाथों को दबाकर नितंब ऊपर की ओर उठाते हुए पांवों को सिर की ओर लाएं।

सहारे के लिए हथेलियां पीठ पर रखें।
आप अपने शरीर को सीधा इस तरह से करते हैं कि ठोड़ी छाती पर आकर लगें।
ठोड़ी छाती पर इस तरह से लगाते हैं की गर्दन के थाइरोइड वाले हिस्से में दबाब पड़े।
अपने हिसाब से इस मुद्रा को धारण करें।
फिर पैरों को पहले 60 डिग्री पर फिर 30 डिग्री और धीरे-धीरे मूल अवस्था में लौटें।
जब आप नीचे लौटते हैं तो अपने हाथों को नितंब के नीचे लाएं ताकि आप अपने शरीर को बेगैर किसी चोट के आरंभिक अवस्था में ला सके।
हलासन
हलासन योग को करने का नियम:How to do Halasan
एक समतल सतह पर चादर को बिछाकर आराम से बैठ जाए|
सर्वांगासन की मुद्रा की तरह इस आसन में भी आपको जमीन पर पीठ के बल लेटना हैं।
दोनों पैरों को आपस में मिलाये।
अपनी हथेलियों को कमर के नजदीक जमीन पर रखे।



शरीर को बिलकुल ढीला छोड़ दे ।
अब अपनी साँस को अन्दर की ओर खींचे और पेट को अन्दर की और कमर से मिलाने का प्रयास करें अब पैरों को धीरे-धीरे जमीन से ऊपर उठाये।
दोनों पैर ऊपर ले जाते समय धीरे-धीरे साँस को छोड़ते रहें और पैरों को सिर के ऊपर से गुजार कर सिर के पीछे तक ले जाने का प्रयास करें|
शुरुआत में इस स्थिति में आने के लिए शरीर की मांसपेशियों पर जोर पड़ता हैं पर निरंतर अभ्यास से आप इस क्रिया को करने में सक्षम हो जाते हैं
अपने क्षमता के अनुसार इस स्तिथि में रुकने के पश्चात , धीरे-धीरे सामान्य मुद्रा में आ जाएँ|
ये ध्यान रहे की इस संपूर्ण क्रिया में आपके घुटने न मुड़े।


पवन-मुक्तासन

पवनमुक्तासन करने की प्रक्रिया
अपनी पीठ के बल लेट जाएँ और पैरों को साथ में कर ले और हाथों को शरीर के साथ जोड़ लें|
गहरी लंबी साँस अंदर लें और साँस छोड़ते हुए अपने दाएँ घुटने को अपनी छाती के पास ले कर आएँ| जंघा को हाथों से पकड़ते हुए पेट पर दबाएँ|
दोबारा से एक लंबी गहरी साँस ले और छोड़ते हुए अपने सर और छाती को ज़मीन से उठाएँ| अपनी ठोड़ी को अपने दाएँ घुटने से लगाएँ|
आसन में रहें और लंबी गहरी साँसे लेते रहें|
ध्यान दे: साँस छोड़ते हुए अपने घुटने को हाथों से कस कर पकड़ लें| छाती पर दबाव बनाएँ| साँस लेते हुए, ढीला छोड़ दे|
साँस छोड़ते हुए, वापस ज़मीन पर आ जाएँ और विश्राम करें|
यह पूरी प्रक्रिया बाएँ पैर के साथ करें और फिर दोनों पैरों के साथ करें|
चाहे तो आगे-पीछे थोड़ा झूल सकते है| दाएँ-बाएँ भी ३-५ बार झूल सकते हैं और उसके बाद विश्राम करें|